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Etah News: जिले में शतरंज के कोच ही नहीं... खिलाड़ी कैसे बनेंगे डी गुकेश
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संवाद न्यूज एजेंसी
एटा। जिले में अंतरराष्ट्रीय शतरंज दिवस पर भी शतरंज की तस्वीर निराशाजनक बनी हुई है। प्रतिभाओं की कमी नहीं है, लेकिन उन्हें न उचित मंच मिल रहा है और न ही प्रशिक्षण की व्यवस्था। जिले में आज तक खेल विभाग की ओर से शतरंज प्रतियोगिता आयोजित नहीं की गई। इतना ही नहीं, खिलाड़ियों के चयन के लिए कभी ट्रायल भी नहीं कराए गए। ऐसे में एटा से डी गुकेश और प्रज्ञानानंद जैसे खिलाड़ी कैसे निकलेंगे।
खेल विभाग की प्राथमिकता सूची में शतरंज अब भी पीछे नजर आता है।
क्रिकेट, बास्केटबॉल और एथलेटिक्स जैसे खेलों पर अधिक ध्यान दिए जाने के कारण शतरंज उपेक्षा का शिकार है। न नियमित कोच की तैनाती है और न ही अभ्यास के लिए कोई निर्धारित केंद्र।
ऐसे में शतरंज सीखने के इच्छुक बच्चों और युवाओं को निजी स्तर पर ही प्रयास करने पड़ते हैं। खेल प्रेमियों का कहना है कि यदि समय-समय पर प्रतियोगिताएं और ट्रायल आयोजित किए जाएं तो जिले से भी राज्य और राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार हो सकते हैं। लेकिन विभागीय उदासीनता के चलते प्रतिभाएं शुरुआती दौर में ही दम तोड़ देती हैं। जिला क्रीड़ाधिकारी अरविंद सिंह ने बताया कि शतरंज प्रतियोगिता के बारे में जानकारी नहीं है। अगर यहां प्रतियोगिता नहीं हो रही है तो प्रयास किया जाएगा कि शतरंज से संबधित खिलाड़ियों को प्रोत्साहित कर आगे बढ़ने का मौका मिले।
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एटा। जिले में अंतरराष्ट्रीय शतरंज दिवस पर भी शतरंज की तस्वीर निराशाजनक बनी हुई है। प्रतिभाओं की कमी नहीं है, लेकिन उन्हें न उचित मंच मिल रहा है और न ही प्रशिक्षण की व्यवस्था। जिले में आज तक खेल विभाग की ओर से शतरंज प्रतियोगिता आयोजित नहीं की गई। इतना ही नहीं, खिलाड़ियों के चयन के लिए कभी ट्रायल भी नहीं कराए गए। ऐसे में एटा से डी गुकेश और प्रज्ञानानंद जैसे खिलाड़ी कैसे निकलेंगे।
खेल विभाग की प्राथमिकता सूची में शतरंज अब भी पीछे नजर आता है।
क्रिकेट, बास्केटबॉल और एथलेटिक्स जैसे खेलों पर अधिक ध्यान दिए जाने के कारण शतरंज उपेक्षा का शिकार है। न नियमित कोच की तैनाती है और न ही अभ्यास के लिए कोई निर्धारित केंद्र।
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ऐसे में शतरंज सीखने के इच्छुक बच्चों और युवाओं को निजी स्तर पर ही प्रयास करने पड़ते हैं। खेल प्रेमियों का कहना है कि यदि समय-समय पर प्रतियोगिताएं और ट्रायल आयोजित किए जाएं तो जिले से भी राज्य और राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार हो सकते हैं। लेकिन विभागीय उदासीनता के चलते प्रतिभाएं शुरुआती दौर में ही दम तोड़ देती हैं। जिला क्रीड़ाधिकारी अरविंद सिंह ने बताया कि शतरंज प्रतियोगिता के बारे में जानकारी नहीं है। अगर यहां प्रतियोगिता नहीं हो रही है तो प्रयास किया जाएगा कि शतरंज से संबधित खिलाड़ियों को प्रोत्साहित कर आगे बढ़ने का मौका मिले।
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