Etah Ground Report: उद्योगों के विकास से लेकर कृषि के क्षेत्र तक, कितनी बदली एटा की तस्वीर, देखें यह रिपोर्ट
अमर उजाला टीम ने एटा में सरकारी योजनाओं और विकास के दावों की जमीनी हकीकत परखी। वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना के तहत घुंघरू-घंटी उद्योग को जाना और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए हुए कामों पर भी जानकारी ली।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
यूपी विधानसभा चुनाव 2027 की आहट तेज हो गई है। इस चुनावी उथल-पुथल से पहले ही राजनीतिक दलों ने अपनी कमर कसनी शुरू कर दी है। इस मद्दोनजर, अमर उजाला की टीम जमीनी हकीकत को टटोलने के लिए प्रदेश के विभिन्न जिलों का दौरा कर रही है। इस बार हमारी टीम एटा ने जिले में सरकारी योजनाओं के आम जनजीवन पर पड़े प्रभाव और विकास के दावों की असल तस्वीर को समझने का प्रयास किया। इस पड़ताल में चिकोरी की खेती, औद्योगिक विकास समेत रोजगार आदि मुद्दों की हकीकत परखी गई।
उद्योगों को कितना मिला ओडीओपी का सहारा
पुष्पेंद्र कुमार, पीतल कारीगर ने बताया कि घंटा बनाने में मिट्टी का सारा कमाल है। जो भी है मिट्टी का खेल है। यहां की मिट्टी में जो आवाज है वो शायद कहीं नहीं मिलेगी। मिट्टी को यहां पर दूर-दूर के खेतों से लाया जाता है। पीतल जो कॉपर और जिंक मिला के हम बनाते हैं। उसको लिक्विड बना के फिर घंटे की डाई तैयार की जाती है। घंटे की जो डाई तैयार होती है उसमें इस लिक्विड को डाला जाता है, तब जाकर घंटा तैयार होता है। उसके बाद वह फिनिशिंग के लिए यहां आता है। ग्राइंडर से उसकी सफाई करते हैं। तब जाकर वह तैयार होता है। यहां से राम मंदिर अयोध्या के लिए अभी घंटा गया है 2100 किलो वाला। यहां पर आधा किलो से 2400 किलो तक का घंटा बन चुका है। सरकार की बहुत ही महत्वाकांक्षा योजना वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) ने घुंघरू-घंटी उद्योग को एक नई पहचान दी है। यहां के घुंघरू-घंटी की खासियत है कि जो खनक आती है वो कहीं पर भी पैदा नहीं होती है।
यहां पर सुनें पूरी बातचीत-
महिलाओं की जिंदगी में कितना आया सुधार
रबीना, सिलाई सेंटर संचालिका ने बताया कि काम को अभी तीन दो-तीन महीने हो गए है। दो-तीन महीने पहले शुरू किया है। इसे शुरू करने में सरकार का सहयोग मिला। अब अच्छा कैसा लगता है, सरकार खुद कहती है कि आप लोग अपना काम शुरू कीजिए। आप लोग उद्यमी बनिए अपनी मेहनत कीजिए। पहले हम घर पर काम करते थे। घर पर काम सीखे थे और फिर ससुराल में आकर घर पर काम करते थे। उसके बाद पता चला कि सहयोग सरकार भी दे रही है। 15-20 लोग काम करते हैं। यहां का सिला हुआ कपड़ा दिल्ली, नोएडा तक जाता है।
यहां पर सुनें पूरी बातचीत-
एटा में होनी वाली चिकोरी की खेती की क्या है हालत
अजय चतुर्वेदी, चिकोरी व्यापारी ने बताया 30 वर्ष पूर्व हम लोगों ने चिकोरी की खेती को यहां के किसानों को करना बताया। हिंदुस्तान ईबी फैक्टरी ने हमको जानकारी दी और उनके माध्यम से हमने यहां किसानों में इसका प्रचार प्रसार किया। आज की तारीख में एटा में करीब-करीब 1 लाख टन से ऊपर चिकोरी का उत्पादन होता है। एटा और कासगंज दोनों जनपदों में इसका उत्पादन होता है। 50% तक हम लोग विदेशों में निर्यात करते हैं और इसका 50% करीब देश में ही कॉफी फैक्ट्रियां हैं वो इसका इस्तेमाल करती हैं। चिकोरी एक शकरकंदी की तरह एक रूट है, जिसको यहां पर किसान बहुत अच्छे से करता है। इससे लोगों में खुशहाली आई है। जब से हम लोगों ने चकोरी का उत्पादन यहां आरंभ कराया है, तब से किसानों में बड़ी प्रतिस्पर्धा रहती है कि हम कैसे बीज लें। इसको लेकर बड़ी-बड़ी सिफारिशें भी आती हैं।
यहां पर सुनें पूरी बातचीत-
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.