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430 विद्यालयों में टाट-पट्टी पर बैठ रहे बच्चे
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शहर में रामदरबार मंदिर के सामने जीटी रोड स्थित प्राथमिक विद्यालय में टाट-पट्टी पर बैठे बच्चे ।सं?
- फोटो : ETAH
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एटा। ऑपरेशन कायाकल्प के तहत स्कूलों में फर्नीचर की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी बेसिक शिक्षा विभाग को दी गई थी, लेकिन अभी तक 430 विद्यालयों में बच्चे टाट-पट्टी पर बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। यहां ऑपरेशन कायाकल्प धड़ाम हो गया और फर्नीचर नहीं पहुंचा है। जिम्मेदार टेंडर लेने वाली फर्म को दोषी ठहरा रहे हैं।
जिले में बेसिक के 561 विद्यालय हैं। ऑपरेशन कायाकल्प के माध्यम से इनमें निजी विद्यालयों जैसी सुविधाएं मुहैया कराने की कवायद सरकार कर रही है। इसके तहत ही सभी विद्यालयों में बच्चों के बैठने के लिए फर्नीचर की व्यवस्था करनी है, लेकिन वर्तमान में 430 विद्यालय ऐसे हैं, जिनमें तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी ऑपरेशन कायाकल्प कोसों दूर है। विभागीय जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते बच्चों को बैठने के लिए बैंच नहीं मिल पा रही हैं। बेसिक शिक्षा विभाग अब तक 125 विद्यालयों में ही फर्नीचर मुहैया करा सका है। जबकि छह विद्यालयों में पहले से ही फर्नीचर उपलब्ध था। बता दें कि शासन ने सितंबर 2020 तक परिषदीय विद्यालयों में ऑपरेशन कायाकल्प के तहत 14 पैरामीटर पूरे करने के आदेश जारी किए थे।
जिला समन्वयक निर्माण संजय कुमार का कहना है कि विद्यालयों में फर्नीचर मुहैया कराने का टेंडर भोपाल मप्र की एक फर्म को दिया गया था। फर्म फर्नीचर की सप्लाई नहीं कर सकी, इसके बाद इसे ब्लैक लिस्टेड कराया गया। 15 दिसंबर को टेंडर प्रक्रिया दोबारा की गई है। इसमें चयनित होने वाली फर्म से फर्नीचर लिया जाएगा।
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जिले में बेसिक के 561 विद्यालय हैं। ऑपरेशन कायाकल्प के माध्यम से इनमें निजी विद्यालयों जैसी सुविधाएं मुहैया कराने की कवायद सरकार कर रही है। इसके तहत ही सभी विद्यालयों में बच्चों के बैठने के लिए फर्नीचर की व्यवस्था करनी है, लेकिन वर्तमान में 430 विद्यालय ऐसे हैं, जिनमें तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी ऑपरेशन कायाकल्प कोसों दूर है। विभागीय जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते बच्चों को बैठने के लिए बैंच नहीं मिल पा रही हैं। बेसिक शिक्षा विभाग अब तक 125 विद्यालयों में ही फर्नीचर मुहैया करा सका है। जबकि छह विद्यालयों में पहले से ही फर्नीचर उपलब्ध था। बता दें कि शासन ने सितंबर 2020 तक परिषदीय विद्यालयों में ऑपरेशन कायाकल्प के तहत 14 पैरामीटर पूरे करने के आदेश जारी किए थे।
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जिला समन्वयक निर्माण संजय कुमार का कहना है कि विद्यालयों में फर्नीचर मुहैया कराने का टेंडर भोपाल मप्र की एक फर्म को दिया गया था। फर्म फर्नीचर की सप्लाई नहीं कर सकी, इसके बाद इसे ब्लैक लिस्टेड कराया गया। 15 दिसंबर को टेंडर प्रक्रिया दोबारा की गई है। इसमें चयनित होने वाली फर्म से फर्नीचर लिया जाएगा।
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