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Etah News: अतरंजी खेड़ा के प्राचीन बौद्ध विहार शिव मंदिर में उमड़ती है आस्था

Thu, 30 Jul 2026 11:48 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Thu, 30 Jul 2026 11:48 PM IST
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A wave of faith surges at the ancient Buddhist monastery and Shiva temple of Atranjikhera.
अचलपुर का बौद्ध विहार स्थित शिव मंदिर। संवाद
मिरहची। क्षेत्र के अतरंजी खेड़ा के बौद्ध विहार परिसर में स्थित भगवान शिव का कई हजार वर्ष पुराना मंदिर है। कहा जाता है कि मंदिर में चौमुखी शिवलिंग की स्थापना राजा वेन चक्र ने कराई थी। बताते हैं कि निर्माण के समय इसकी धरातल से ऊंचाई 100 फीट थी।
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मंदिर के पुजारी ने बताया कि किवदंतियों के अनुसार त्रेता युग में प्रतापी राजा वेन चक्र ने अपने राज्य की सुख-समृद्धि के लिए इस दुर्लभ शिवलिंग की स्थापना कराई थी। चार मुख वाले इस शिवलिंग को चतुर्मुखी बाबा के नाम से भी जाना जाता है। कहा जाता है कि राजा ने मंदिर का निर्माण ऊंचे टीले पर इसीलिए कराया था, ताकि दूर-दूर तक इसकी ऊर्जा फैले और प्रजा कष्टों से मुक्त रहे।
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अचलपुर के पूर्व प्रधान नरोत्तम सिंह बताते हैं कि समय के साथ बौद्ध विहार के विकसित होने पर भी इसकी मान्यता कम नहीं हुई। इस चतुर्मुखी शिवलिंग की वजह से अतरंजीखेड़ा बौद्ध और सनातन दोनों धर्म का संगम बना हुआ है। अतरंजी खेड़ा को 3000 साल पुराना बौद्ध स्थल माना जाता है। यहां श्रीलंका, थाईलैंड, नेपाल, म्यांमार, जापान और भारत के कोने-कोने से बौद्ध अनुयायी आते हैं। बौद्ध भिक्षु और पर्यटक भी यहां शिव मंदिर में मत्था टेकते हैं और साधना करते हैं। थाईलैंड से आई एक बौद्ध अनुयायी दुआन फेन ने कहा था कि हमारे यहां शांति और करुणा की पूजा होती है। यहां आकर लगता है कि भगवान शिव भी उसी शांति का प्रतीक हैं। इसलिए हम यहां ध्यान करते हैं।
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बाबा भोलेनाथ सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी करते हैं। सावन माह के सोमवार और शिवरात्रि पर यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। यहां मन्नत मांगने दूर-दूर से लोग आते हैं।

पं. श्याम सुंदर मिश्रा, अचलपुर
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प्राचीन शिव मंदिर के जीर्णोंद्धार की मांग
अचलपुर के विनोद कुमार, नरोत्तम सिंह आदि ने कहा कि मंदिर जीर्ण-शीर्ण हो गया है। इस धरोहर का सौंदर्यीकरण कराना अति आवश्यक है। जिससे देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा मिल सके।
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अतरंजीखेड़ा ऐतिहासिक और धार्मिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इस ऐतिहासिक धरोहर के सौंदर्यीकरण को प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा। भगवान भोलेनाथ देवों के देव महादेव हैं, इसलिए यहां बौद्ध और सनातनी सभी शीष झुकाते हैं।
वीरेंद्र लोधी, विधायक मारहरा

अचलपुर का बौद्ध विहार स्थित शिव मंदिर। संवाद

अचलपुर का बौद्ध विहार स्थित शिव मंदिर। संवाद

अचलपुर का बौद्ध विहार स्थित शिव मंदिर। संवाद

अचलपुर का बौद्ध विहार स्थित शिव मंदिर। संवाद

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