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उपले बेचकर बनाया अपने बच्चों को डिप्टी एसपी
मुरादाबाद/पुनीत शर्मा
Updated Sat, 23 Mar 2013 01:15 PM IST
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वाकई सैल्यूट करना होगा सोमवती को। इस मां ने अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए उपले तक बेचे हैं। आज इसके दोनों बेटे डिप्टी एसपी हैं। मुफलिसी के उस दौर से वह गुजरीं है, जिसे सुनने भर से कंपकंपी आ जाए। पति गांव छोड़ने को तैयार नहीं थे लेकिन सोमवती ने बच्चों को पढ़ाने के लिए गांव छोड़ दिया और अल्मोड़ा की तंग बस्ती में 70 रुपये महीना पर एक कमरा ले लिया। पास के एक प्राइमरी स्कूल में एडमीशन करा दिया।
जब महेश और नरेश दूसरी और तीसरी कक्षा में थे तब सोमवती बुक स्टाल से पुरानी किताबें खरीदकर लातीं और बच्चों को देती थी, लेकिन आज उनकी तपस्या पूरी हो गई। दोनों बेटे डिप्टी एसपी जो बन गए।
पीलीभीत जनपद के पिपरिया गांव का रहने वाला है यह परिवार। बालकराम यहां अपनी पत्नी सोमवती और बच्चों के साथ रहते थे। थोड़ी बहुत जमीन थी जिसमें फसल उगाकर घर का खर्च चलाते। लेकिन जब बच्चे बड़े हुए तो सोमवती को उनकी पढ़ाई की चिंता सताने लगी। सोमवती ने अपने पति से कहा कि वह अब गांव में नहीं रहेंगे। बालकराम ने समझाया भी कि शहर में रहने के लिए बहुत पैसा चाहिए। कहां से लाएंगे।
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खैर बालकराम ने गांव छोड़ दिया और अल्मोड़ा में रहने लगे। इसी दौरान बालकराम भी पुलिस में भर्ती हो गए। लेकिन तनख्वाह से चार बच्चों की पढ़ाई का खर्च संभव नहीं था। अल्मोड़ा के बाद यह परिवार संभल आ गया। यहां सोमवती ने गाय और भैंस पाल लीं। दूध बेचा।
आमदनी बढ़ी तो बच्चों की पढ़ाई का खर्च निकलने लगा। बाद में बालकराम का तबादला रामपुर पुलिस लाइन में हो गया। सोमवती का संघर्ष यहां भी जारी रहा। उन्होंने उपले बनाकर बेचने शुरू कर दिए। बच्चों ने भी मां की मेहनत को देखते हुए पढ़ाई में पूरी जान लगा दी। रिजल्ट आज सबके सामने है। सोमवती के बेटे महेश और नरेश डिप्टी एसपी बन गए। महेश की तैनाती शाहजहांपुर में हुई है जबकि नरेश की रामपुर में।
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जब महेश और नरेश दूसरी और तीसरी कक्षा में थे तब सोमवती बुक स्टाल से पुरानी किताबें खरीदकर लातीं और बच्चों को देती थी, लेकिन आज उनकी तपस्या पूरी हो गई। दोनों बेटे डिप्टी एसपी जो बन गए।
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पीलीभीत जनपद के पिपरिया गांव का रहने वाला है यह परिवार। बालकराम यहां अपनी पत्नी सोमवती और बच्चों के साथ रहते थे। थोड़ी बहुत जमीन थी जिसमें फसल उगाकर घर का खर्च चलाते। लेकिन जब बच्चे बड़े हुए तो सोमवती को उनकी पढ़ाई की चिंता सताने लगी। सोमवती ने अपने पति से कहा कि वह अब गांव में नहीं रहेंगे। बालकराम ने समझाया भी कि शहर में रहने के लिए बहुत पैसा चाहिए। कहां से लाएंगे।
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खैर बालकराम ने गांव छोड़ दिया और अल्मोड़ा में रहने लगे। इसी दौरान बालकराम भी पुलिस में भर्ती हो गए। लेकिन तनख्वाह से चार बच्चों की पढ़ाई का खर्च संभव नहीं था। अल्मोड़ा के बाद यह परिवार संभल आ गया। यहां सोमवती ने गाय और भैंस पाल लीं। दूध बेचा।
आमदनी बढ़ी तो बच्चों की पढ़ाई का खर्च निकलने लगा। बाद में बालकराम का तबादला रामपुर पुलिस लाइन में हो गया। सोमवती का संघर्ष यहां भी जारी रहा। उन्होंने उपले बनाकर बेचने शुरू कर दिए। बच्चों ने भी मां की मेहनत को देखते हुए पढ़ाई में पूरी जान लगा दी। रिजल्ट आज सबके सामने है। सोमवती के बेटे महेश और नरेश डिप्टी एसपी बन गए। महेश की तैनाती शाहजहांपुर में हुई है जबकि नरेश की रामपुर में।