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यूपी के इस 'पीपली लाइव' के पीछे कोई 'खेल' तो नहीं?

Wed, 30 Jul 2014 12:02 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जगनेर (आगरा)
ब्यूरो/अमर उजाला, जगनेर (आगरा) Updated Wed, 30 Jul 2014 12:02 AM IST
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devi statue found in khaurapura up

अब इसे संयोग कहिए या कुछ और। उन्नाव के डौंडियाखेड़ा में संत शोभन सरकार का खजाने का सपना भले सच न हुआ, लेकिन यहां जगनेर के खौरपुरा गांव में सपने के आधार पर नौ लड़कियों द्वारा किए गए दावे के मुताबिक 15 फीट खोदाई के बाद ‘देवी की प्रतिमा’ निकल आई।

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इस इलाके में बहुतायत में पाए जाने वाले पत्थर के अनगढ़ टुकड़े पर आंख-मुंह की आकृति खोदी गई सी दिखती है। मुंह के नीचे की आकृति को जीभ बताते हुए इसे काली माता की प्रतिमा बताते हुए पूजा-अर्चना भी शुरू कर दी गई है।
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सपना देखने वाली नौ लड़कियों ने भी अपना ‘तप’ समाप्त कर दिया है। यद्यपि उन्हें देवी रूप मानकर पूज रहे लोग अब भी उनके जयकारे लगा रहे हैं। ‘देवी प्रतिमा’ को अभी गड्ढे से बाहर नहीं निकाला गया है।

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14 फीट की खोदाई पर मिली 'भैरो मूर्ति'

devi statue found in khaurapura up

दरअसल ‘प्रतिमा’ मिलने ही वाली है, इसके संकेत तो कल ही मिल गए थे, जब करीब 14 फीट की खोदाई में एक और शिला (इसे भैरो मूर्ति कहा जा रहा है) मिलने के बाद पत्थर का एक टुकड़ा दिखने लगा था तभी खोदाई बंद करा दी गई। पत्थर को चुनरी से ढंक दिया गया था। भैरो मूर्ति खोदे गए गड्ढे में ही रहने दी गई।

पूजन किए जाने के बाद भी किसी को उसके पास नहीं जाने दिया गया था। इन सबसे पहले भी एक शिला निकली थी जिसे शेड देवी की मूर्ति बताते हुए खननस्थल के पास ही स्थापित कर दिया गया था।

सुबह 11 बजे जैसे ही 15 फीट की खोदाई पूरी हुई तभी शिला दिखाई देने लगी। इसके बाद लोग जयकारे लगाने लगे। देर रात तक पूजा पाठ चलता रहा।

क्या है मामला

devi statue found in khaurapura up

गत 13 जुलाई को खौरपुरा की अंजलि ने यहां देवी प्रतिमा दबे होने का सपना देखा। एक दिन बाद गांव की आठ अन्य लड़कियों ने भी ठीक यही सपना देखने का दावा किया। इनकी उम्र छह से लेकर 14 साल तक है।

17 जुलाई को ये सभी यहां ‘तप’ (उपवास) करने बैठ गईं। तब उनके ‘आदेश’ पर गांव वालों ने वहां खोदाई शुरू की।

ये तब से वहीं उपवास पर थीं और वहीं डाल दी गई चौकी पर ही सोती थीं। दो लड़कियों को छोड़ बाकी ने सोमवार से फलाहार शुरू कर दिया था।

रचा हुआ ड्रामा तो नहीं?

devi statue found in khaurapura up

भले खौरपुरा में पूजा करने वालों की भीड़ उमड़ रही है पर ऐसे लोग भी कम नहीं, जो इसे लोकविश्वास का फायदा उठाकर रचा गया ड्रामा मान रहे हैं। खननस्थल पर जिस तरह से लोगों को दूर-दूर रखने की कोशिश हुई वह इस संदेह का बड़ा कारण है।

अंतिम क्षणों में जिस तरह गोपनीयता बरती गई उसने तो चौंकाया भी। दूसरी शिला की फोटो नहीं करने दी गई जबकि उसे  गड्ढे में ही पूजा भी गया। कहा गया देवियों (नौ लड़कियों) का आदेश है। अब तीसरे शिलाखंड को काली की प्रतिमा बताकर खूब प्रचारित किया जा रहा है।

ग्रामीण अब यहां मंदिर निर्माण कर मूर्तियां स्थापित करने की बात कह रहे हैं।

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