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कोरोना काल में भुखमरी के कगार पर पहुंचे वित्तविहीन शिक्षक
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वित्त विहीन विद्यालय के शिक्षकों ने तहसील प्रशासन को सौंपा पत्रक
- फोटो : DEORIA
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कोरोना काल में भुखमरी के कगार पर पहुंचे वित्तविहीन शिक्षक
एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर निजी शिक्षण संस्थाओं को खोलने की मांग की
संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रपुर। वित्तविहीन विद्यालय संघ की ओर से सोमवार को राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन एसडीएम को सौंपकर निजी शिक्षण संस्थाओं को खोलने की मांग की गई। संघ के पदाधिकारियों ने कोरोना काल में निजी शिक्षण संस्थाओं पर बढ़े बोझ को कम करने के लिए संस्था को सरकारी अनुदान देने को कहा।
संघ के अध्यक्ष शब्बीर अहमद और डॉ अशोक सिंह ने कहा कि वैश्विक महामारी कोरोना के कारण मार्च से ही निजी शिक्षण संस्थाए बंद पड़ी हैं। हालांकि, ऑनलाइन कक्षा संचालन हो रहा है पर इस का संतोषजनक परिणाम नहीं मिल रहा है। ऐसे में अभिभावक भी संतुष्ट नहीं हैं। निजी संस्थाओं का संचालन पूरी तरह शिक्षण शुल्क पर निर्भर है। स्कूल बंद होने से शिक्षण शुल्क स्कूल नहीं आ रहा है। ऐसे निजी शिक्षण संस्थाओं का बिजली का बिल, स्कूल वाहनों के कर्ज की ईएमआई जमा नहीं हो पा रही है। निजी संस्थाओं के प्रबंधक और शिक्षकों को वेतन नहीं मिलने से अवसाद ग्रस्त होकर आत्महत्या जैसी कोशिश कर रहे हैं। स्कूल बंद होने से निजी संस्थाओं पर कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है। उन्होंने निजी संस्थाओं के प्रबंधक, शिक्षक और शिक्षणेतर कर्मचारियों की दयनीय दशा को देखते हुए कोविड नियमों के दायरे में स्कूलों को खोलने, शिक्षक और शिक्षणेतर कर्मचारियों को स्कूल खुलने तक जीविकोपार्जन के लिए मानदेय देने, स्कूल का व्यावसायिक विद्युत बिल कोरोना अवधि में माफ करने, स्कूल वाहनों का छह माह के लोन पर ब्याज माफ करने तथा किराए के भवनों में संचालित हो रहे शिक्षण संस्थाओं का किराया भुगतान में सहयोग प्रदान करने की मांग की। ज्ञापन देने वालों में श्याम सुंदर यादव, अनिल कुमार यादव, राणा प्रताप सिंह, सोनू मणि, सत्राजीत मणि, संजय कुमार यादव, रामाकांत प्रसाद, शिवम कुमार त्रिपाठी आदि संस्था प्रमुख मौजूद रहे।
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एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर निजी शिक्षण संस्थाओं को खोलने की मांग की
संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रपुर। वित्तविहीन विद्यालय संघ की ओर से सोमवार को राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन एसडीएम को सौंपकर निजी शिक्षण संस्थाओं को खोलने की मांग की गई। संघ के पदाधिकारियों ने कोरोना काल में निजी शिक्षण संस्थाओं पर बढ़े बोझ को कम करने के लिए संस्था को सरकारी अनुदान देने को कहा।
संघ के अध्यक्ष शब्बीर अहमद और डॉ अशोक सिंह ने कहा कि वैश्विक महामारी कोरोना के कारण मार्च से ही निजी शिक्षण संस्थाए बंद पड़ी हैं। हालांकि, ऑनलाइन कक्षा संचालन हो रहा है पर इस का संतोषजनक परिणाम नहीं मिल रहा है। ऐसे में अभिभावक भी संतुष्ट नहीं हैं। निजी संस्थाओं का संचालन पूरी तरह शिक्षण शुल्क पर निर्भर है। स्कूल बंद होने से शिक्षण शुल्क स्कूल नहीं आ रहा है। ऐसे निजी शिक्षण संस्थाओं का बिजली का बिल, स्कूल वाहनों के कर्ज की ईएमआई जमा नहीं हो पा रही है। निजी संस्थाओं के प्रबंधक और शिक्षकों को वेतन नहीं मिलने से अवसाद ग्रस्त होकर आत्महत्या जैसी कोशिश कर रहे हैं। स्कूल बंद होने से निजी संस्थाओं पर कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है। उन्होंने निजी संस्थाओं के प्रबंधक, शिक्षक और शिक्षणेतर कर्मचारियों की दयनीय दशा को देखते हुए कोविड नियमों के दायरे में स्कूलों को खोलने, शिक्षक और शिक्षणेतर कर्मचारियों को स्कूल खुलने तक जीविकोपार्जन के लिए मानदेय देने, स्कूल का व्यावसायिक विद्युत बिल कोरोना अवधि में माफ करने, स्कूल वाहनों का छह माह के लोन पर ब्याज माफ करने तथा किराए के भवनों में संचालित हो रहे शिक्षण संस्थाओं का किराया भुगतान में सहयोग प्रदान करने की मांग की। ज्ञापन देने वालों में श्याम सुंदर यादव, अनिल कुमार यादव, राणा प्रताप सिंह, सोनू मणि, सत्राजीत मणि, संजय कुमार यादव, रामाकांत प्रसाद, शिवम कुमार त्रिपाठी आदि संस्था प्रमुख मौजूद रहे।
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