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Deoria News: 28 साल पुराने मामले में तीन को जमानत
Mon, 19 Oct 2026 01:11 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Mon, 19 Oct 2026 01:11 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। ग्रामसभा की जमीन के राजस्व अभिलेखों में हेराफेरी के 28 साल पुराने मामले में जिला जज की अदालत ने तीन आरोपियों की अग्रिम जमानत मंजूर कर ली है। जिला जज धनेंद्र प्रताप सिंह ने रामपुर कारखाना थाना क्षेत्र के गोरयाघाट निवासी विश्वनाथ मिश्र, उपेंद्र मिश्र और सूर्यभान मिश्र को सशर्त अग्रिम जमानत देने का आदेश दिया।
रामपुर कारखाना के तत्कालीन ग्राम प्रधान बिगन प्रसाद ने शिकायत की थी कि ग्रामसभा की गाटा संख्या 70, 71, 77, 78, 206 और 248 की भूमि पर गलत साक्ष्यों के आधार पर राजस्व अभिलेखों में निजी व्यक्तियों के नाम दर्ज कराए गए थे।
तत्कालीन परगनाधिकारी ने 19 जनवरी 1996 को संबंधित नाम निरस्त कर ग्रामसभा का नाम दर्ज करने का आदेश दिया था। इस मामले में तीन नवंबर 1998 को सर्वदेव, बैजनाथ, विश्वनाथ और उपेंद्र पर प्राथमिकी दर्ज हुई थी।
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बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि विश्वनाथ के पिता त्रिभुवन और उपेंद्र व सूर्यभान के पिता दीपनारायण की मृत्यु हो चुकी है। जमीन पर आरोपियों ने अपना नाम दर्ज नहीं कराया था।
उन्होंने तत्कालीन ग्राम प्रधान से चुनावी रंजिश के कारण झूठा फंसाने का आरोप लगाया। अभियोजन ने जमानत का विरोध किया। अदालत ने पाया कि संबंधित जमीन से त्रिभुवन और दीपनारायण के नाम हटाकर ग्रामसभा का नाम दर्ज हो चुका है। मामले की पुरानी अवधि को देखते हुए अग्रिम जमानत मंजूर की गई।
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देवरिया। ग्रामसभा की जमीन के राजस्व अभिलेखों में हेराफेरी के 28 साल पुराने मामले में जिला जज की अदालत ने तीन आरोपियों की अग्रिम जमानत मंजूर कर ली है। जिला जज धनेंद्र प्रताप सिंह ने रामपुर कारखाना थाना क्षेत्र के गोरयाघाट निवासी विश्वनाथ मिश्र, उपेंद्र मिश्र और सूर्यभान मिश्र को सशर्त अग्रिम जमानत देने का आदेश दिया।
रामपुर कारखाना के तत्कालीन ग्राम प्रधान बिगन प्रसाद ने शिकायत की थी कि ग्रामसभा की गाटा संख्या 70, 71, 77, 78, 206 और 248 की भूमि पर गलत साक्ष्यों के आधार पर राजस्व अभिलेखों में निजी व्यक्तियों के नाम दर्ज कराए गए थे।
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तत्कालीन परगनाधिकारी ने 19 जनवरी 1996 को संबंधित नाम निरस्त कर ग्रामसभा का नाम दर्ज करने का आदेश दिया था। इस मामले में तीन नवंबर 1998 को सर्वदेव, बैजनाथ, विश्वनाथ और उपेंद्र पर प्राथमिकी दर्ज हुई थी।
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बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि विश्वनाथ के पिता त्रिभुवन और उपेंद्र व सूर्यभान के पिता दीपनारायण की मृत्यु हो चुकी है। जमीन पर आरोपियों ने अपना नाम दर्ज नहीं कराया था।
उन्होंने तत्कालीन ग्राम प्रधान से चुनावी रंजिश के कारण झूठा फंसाने का आरोप लगाया। अभियोजन ने जमानत का विरोध किया। अदालत ने पाया कि संबंधित जमीन से त्रिभुवन और दीपनारायण के नाम हटाकर ग्रामसभा का नाम दर्ज हो चुका है। मामले की पुरानी अवधि को देखते हुए अग्रिम जमानत मंजूर की गई।