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पांच फाइनेंस कंपनी के कार्यालयों पर लगाया ताला
देवरिया/ अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 09 Dec 2016 11:49 PM IST
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महिलाओं ने तल्ख तेवर दिखाया है।
- फोटो : अमर उजाला
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निजी फाइनेंस कंपनियों के उत्पीड़न के खिलाफ लामबंद महिलाओं ने तल्ख तेवर दिखाया है। महिलाओं ने शुक्रवार को आठवें दिन धरना-प्रदर्शन के बाद पांच निजी कंपनी के दफ्तर में तालेे जड़ दिए और नारेबाजी की। इसके पहले महिला एकता शक्ति की अध्यक्ष मन्नू तिवारी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने एडीएम वित्त एवं राजस्व से मुलाकात कर ज्ञापन दिया और कंपनियों की जांच कराकर कार्रवाई की मांग की।
निजी फाइनेंस कंपनियों से ऋण लेकर छोटे-छोटे व्यवसाय करने वाली सैकड़ों महिलाओं ने इन कंपनियों के लोगों पर उत्पीड़न का आरोप लगाया है। महिलाओं का कहना है कि फाइनेंस कंपनियों के एजेंट गरीब और कमजोर महिलाओं को डरा-धमका कर उनका सामान रात में उठा ले जा रहे हैं। शुक्रवार को सुबह जिले के कई इलाकों से महिलाएं कलेक्ट्रेट परिसर में एकत्र होने लगीं। इसके बाद कलेक्ट्रेट परिसर में धरना-प्रदर्शन किया। एडीएम वित्त एवं राजस्व बीएल मौर्य से मिलीं और ज्ञापन देकर कार्रवाई की मांग की। इसके बाद उनका हुजूम शहर के साकेत नगर, परमार्थी पोखरा, कोतवाली रोड, चकियवां ढाला जगहों पर स्थित पांच फाइनेंस कंपनियों के कार्यालय पर पहुंचा। यहां ताला बंदी कर नारेबाजी की। महिलाओं ने मांग किया कि नोटबंदी को देखते हुए फाइनेंस कंपनियों को कुछ महीने के लिए वसूली बंद देनी चाहिए। जबरन वसूली करने वाले अधिकारी और कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई करने, फाइनेंस कंपनियों के वित्तीय लेनदेन की जांच करने, 10 लाख का बीमा कवर की जांच करने और वृद्धा विधवा को पेंशन देने की जांच होनी चाहिए। महिलाओं ने कंपनियों की जांच कराने को कहा ताकि पता चल सके कि इन कंपनियों के पास लाखों रुपये ऋण बांटने के लिए कहां से मिले। चेतावनी दी कि यदि प्रशासन जांच कर कार्रवाई नहीं करता है तो आंदोलन चलता रहेगा। इस मौके पर सलमा खातून, शारदा देवी, माला, रमता, जुलेखा, नसीमा, धर्मेंद्र कुशवाहा आदि मौजूद रहे।
सूदखोरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग
देवरिया। कलेक्ट्रेट परिसर में माइक्रो फाइनेंस कंपनियों की ओर से किए जा रहे उत्पीड़न के खिलाफ कई संगठनों के लोगों ने बैठक की। लोगों ने कहा कि सरकारी संरक्षण में कई संस्थाएं सूदखोरी में लगी हैं। सीपीआई के कलेक्टर शर्मा ने कहा कि पूंजीपतियों का यदि एक लाख 20 हजार रुपये करोड़ माफ किया जा सकता है तो गरीब महिलाओं का क्यों नहीं? डॉ. चतुरानन ओझा ने कहा कि आज जब पूरा देश नोटबंदी और बेरोजगारी के चलते आर्थिक आपातकाल में जी रहा है। गांव की मजबूर महिलाओं से ब्याज वसूली सूदखोरों जमीदारों के उत्पीड़न को भी मात देने वाली है। जनता को इनसे मुक्ति पाना होगा। पूर्वांचल छात्र संघर्ष समिति के मंडल अध्यक्ष अरविंद गिरी ने कहा कि विभिन्न फाइनेंस कंपनियों ने आम जनता के जीने के अधिकार पर हमला किया है। मजदूर किसान एकता मंच के ब्रजेश कुमार ने कहा कि आज गांव के लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार या बेरोजगारी भत्ता और सहयोग दिए जाने की जरूरत है न कि कर्ज के मकड़जाल में फंसाकर उन्हें आत्महत्या की स्थिति में लाने की। इस मौके पर रामप्रताप, अरविंद कुमार, अभिषेक, चक्रपाणि ओझा, सरिता, सोनमति, लक्ष्मी आदि ने विचार रखे।
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निजी फाइनेंस कंपनियों से ऋण लेकर छोटे-छोटे व्यवसाय करने वाली सैकड़ों महिलाओं ने इन कंपनियों के लोगों पर उत्पीड़न का आरोप लगाया है। महिलाओं का कहना है कि फाइनेंस कंपनियों के एजेंट गरीब और कमजोर महिलाओं को डरा-धमका कर उनका सामान रात में उठा ले जा रहे हैं। शुक्रवार को सुबह जिले के कई इलाकों से महिलाएं कलेक्ट्रेट परिसर में एकत्र होने लगीं। इसके बाद कलेक्ट्रेट परिसर में धरना-प्रदर्शन किया। एडीएम वित्त एवं राजस्व बीएल मौर्य से मिलीं और ज्ञापन देकर कार्रवाई की मांग की। इसके बाद उनका हुजूम शहर के साकेत नगर, परमार्थी पोखरा, कोतवाली रोड, चकियवां ढाला जगहों पर स्थित पांच फाइनेंस कंपनियों के कार्यालय पर पहुंचा। यहां ताला बंदी कर नारेबाजी की। महिलाओं ने मांग किया कि नोटबंदी को देखते हुए फाइनेंस कंपनियों को कुछ महीने के लिए वसूली बंद देनी चाहिए। जबरन वसूली करने वाले अधिकारी और कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई करने, फाइनेंस कंपनियों के वित्तीय लेनदेन की जांच करने, 10 लाख का बीमा कवर की जांच करने और वृद्धा विधवा को पेंशन देने की जांच होनी चाहिए। महिलाओं ने कंपनियों की जांच कराने को कहा ताकि पता चल सके कि इन कंपनियों के पास लाखों रुपये ऋण बांटने के लिए कहां से मिले। चेतावनी दी कि यदि प्रशासन जांच कर कार्रवाई नहीं करता है तो आंदोलन चलता रहेगा। इस मौके पर सलमा खातून, शारदा देवी, माला, रमता, जुलेखा, नसीमा, धर्मेंद्र कुशवाहा आदि मौजूद रहे।
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सूदखोरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग
देवरिया। कलेक्ट्रेट परिसर में माइक्रो फाइनेंस कंपनियों की ओर से किए जा रहे उत्पीड़न के खिलाफ कई संगठनों के लोगों ने बैठक की। लोगों ने कहा कि सरकारी संरक्षण में कई संस्थाएं सूदखोरी में लगी हैं। सीपीआई के कलेक्टर शर्मा ने कहा कि पूंजीपतियों का यदि एक लाख 20 हजार रुपये करोड़ माफ किया जा सकता है तो गरीब महिलाओं का क्यों नहीं? डॉ. चतुरानन ओझा ने कहा कि आज जब पूरा देश नोटबंदी और बेरोजगारी के चलते आर्थिक आपातकाल में जी रहा है। गांव की मजबूर महिलाओं से ब्याज वसूली सूदखोरों जमीदारों के उत्पीड़न को भी मात देने वाली है। जनता को इनसे मुक्ति पाना होगा। पूर्वांचल छात्र संघर्ष समिति के मंडल अध्यक्ष अरविंद गिरी ने कहा कि विभिन्न फाइनेंस कंपनियों ने आम जनता के जीने के अधिकार पर हमला किया है। मजदूर किसान एकता मंच के ब्रजेश कुमार ने कहा कि आज गांव के लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार या बेरोजगारी भत्ता और सहयोग दिए जाने की जरूरत है न कि कर्ज के मकड़जाल में फंसाकर उन्हें आत्महत्या की स्थिति में लाने की। इस मौके पर रामप्रताप, अरविंद कुमार, अभिषेक, चक्रपाणि ओझा, सरिता, सोनमति, लक्ष्मी आदि ने विचार रखे।
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