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सरयू, गोर्रा और राप्ती नदियों का जलस्तर स्थिर, बंधों पर कटान तेज

Wed, 23 Jun 2021 11:40 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 23 Jun 2021 11:40 PM IST
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rivers constant, begins dam cutting
सरयू, गोर्रा और राप्ती नदियों का जलस्तर स्थिर, बंधों पर कटान तेज
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रुद्रपुर/बरहज/भागलपुर। सरयू, गोर्रा और राप्ती नदियों का जलस्तर पिछले 24 घंटे से स्थिर है। सरयू नदी खतरे के निशान से 45 सेमी ऊपर बह रही है। तुर्तीपार रेगुलेटर पर नदी बुधवार दोपहर तीन बजे 64 मीटर 42 सेमी पर बह रही थी। नदी अब भी खतरे के निशान से 12 सेमी ऊपर है। तुर्तीपार रेगुलेटर पर खतरे का निशान 64.30 मीटर है। नदी में आई बाढ़ से भदिला प्रथम गांव चारों ओर से पानी से घिर गया है। गोर्रा और राप्ती नदियों ने कटान शुरू कर दिया है। बंधों पर तेजी से कटान को देख तटवर्ती गांव के लोग दहशत में आ गए।
सरयू नदी में करीब 10 दिनों से बाढ़ आ गई है। नदी के जलस्तर में निरंतर हो रही वृद्धि के कारण सरयू थाना घाट पर सिंचाई विभाग के गेज पर खतरे के निशान 66.50 से 45 सेमी ऊपर 66.95 पर बह रही है। मंगलवार की रात से नदी स्थिर है। हालांकि बाढ़ की आशंका से तटवर्ती गांव गौरा, कटइलवा, मेहियवां, रगरगंज, नौका टोला, बेलडांड़ आदि गांवों के लोग सकते में हैं। प्रशासन किसी भी विषम स्थिति से निपटने के लिए मुस्तैद है। सुरक्षा व्यवस्था के लिए 12 बाढ़ चौकियों को अलर्ट पर रखते हुए नाविकों और गोताखोरों को तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।
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सरयू नदी का पानी तेजी से गांवों की ओर बढ़ रहा है। सहायक अभियंता अशोक द्विवेदी ने बताया कि जलस्तर थमा है। हालात काबू में हैं।
मंगलवार की शाम राप्ती नदी 69.05 मीटर और गोर्रा नदी 69.40 मीटर पर बह रही थी, जबकि बुधवार को राप्ती नदी करीब बीस सेमी और गोर्रा 25 सेमी घट गई। नदियों का जलस्तर घटने के साथ बंधे पर दबाव तेज हो गया। बंधे कट कट कर नदी में गिर रहे है। पिड़री गांव के समीप गोर्रा नदी के कटान को रोकने के लिए लगाए बोल्डर पिचिंग नदी में धसक रहे है। सिलहटा गांव के समीप गोर्रा नदी करीब दस बीघा तक कटान करते हुए आबादी की तरफ तेजी से बढ़ रही है। गोर्रा नदी के किनारे हो रहा पायलट प्रोजेक्ट कार्य बारिश और नदी के जलस्तर में बढोतरी के कारण ठप पड़ा है। नदी और बंधे के बीच बसे बहोरा दलपतपुर और नरायनपुर की मकाने इस बार भी नदी में विलीन होने के कागार पर है। दोआबा के सबसे लंबे तिघरा मराछी बांध पर एक दर्जन जगहों पर राप्ती नदी कटान कर रही है। तिघरा गांव के समीप रिटायर बंधे को नदी अपने आगोश में लेकर नए बंधे के समीप तक पहुंच रही है। गायघाट और केवटलिया गांव के समीप कटान से ग्रामीणों में भय बना है। इस बाबत एसडीओ दीन दयाल दूबे ने कहा कि नदियों का जलस्तर घटा है। कुछ स्थानों पर जलस्तर घटने से कटान हो रहा है। बंधों की सुरक्षा की जा रही है।
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पालिका ने स्नानार्थियों के लिए नदी घाट पर बंधवाई रस्सी
बरहज। सरयू नदी पिछले 10 दिनों से उफान पर है। जिससे बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। नदी के रौद्र रुप अख्तियार करने से घाट की सीढ़ियां डूब गई हैं। नदी की धारा तेज है। इसको देखते हुए एसडीएम न्यायिक सुनील कुमार सिंह और नपा चेयरमैन उमाशंकर सिंह विशेन के निर्देश पर पालिका कर्मियों ने थाना, आरती, परशुराम, सीता सहित अन्य घाटों पर स्नान के लिए एक निश्चित सीमा रेखा तय करते हुए रस्सी बंधवाई है, जिससे दूर-दराज से आने वाले लोग रस्सी के सहारे स्नान कर सकें।
दो दर्जन से अधिक गांवों पर बाढ़ का खतरा
पिंडी। सरयू नदी के बढ़ने से तटवर्ती इलाकों में हड़कंप मचा हुआ है। क्षेत्र के दो दर्जन से अधिक गांवों पर खतरा मंडराने लगा है। तटवर्ती इलाकों व कस्बे में बाढ़ का पानी घुसना शुरू हो गया है।
नदी की तेज धारा अब सीधे नदी के किनारे पर बने तटबंधों पर टक्कर मार रही है। तटवर्ती क्षेत्र के नेमा, सहिया, तकिया, धरहरा, डुमरी, हटवा, मठिया, खरवानिया, मझवालिया, पिंडी, आदर्शनगर, सरैया, कौसड, खेमादेई सहित दो दर्जन से अधिक गांवों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। नदी की कटान से अब तक भारी नुकसान हुआ है। कटान ने अब तक तुर्तीपार चुरिया तटबंध के किनारे की हजारों एकड़ कृषि योग्य भूमि विलीन हो चुकी है।

नहीं हो सकी कटान से बचाव की स्थाई व्यवस्था
सरयू नदी की कटान रोकने के लिए अब तक स्थाई व्यवस्था नहीं हो सकी है। वर्तमान समय में कई प्रोजेक्ट कटान से बचाव के लिए प्रस्तावित हुए हैं। कार्य प्रारंभ भी हुआ है पर पूर्ण नहीं हो सका है। अब देखना है कि इस वर्ष कितना कारगर होता है। सिंचाई विभाग ने जितना पैसा कटान को रोकने के लिए खर्च किया, उतनी राशि से अगर एक बार जगह-जगह बोल्डर रखा गया होता तो पहाड़ बन जाता। लेकिन सिंचाई विभाग की कारगुजारी के चलते नदी ने सबके मंसूबे पर पानी फेर दिया है। तुर्तीपार से चुरिया तक का तटवर्ती इलाका आज भी संवेदनशील है।
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