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नदियां लाल निशान के पार, बंधों पर 20 से अधिक स्थानों पर रिसाव
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नदियां लाल निशान के पार, बंधों पर 20 से अधिक स्थानों पर रिसाव
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। जिले की चारों नदियां सरयू, राप्ती, गोर्रा, छोटी गंडक खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। इनके बंधों पर 20 से अधिक स्थानों पर रिसाव हो रहा है। इससे 200 से अधिक गांवों में बाढ़ का भय लोगों को सता रहा है।
वहीं प्रशासन की मानें तो 11 गांव पानी से घिरे हैं। जहां 24 से अधिक नावों का इंतजाम लोगों के आने- जाने के लिए किया गया है। इसमें तीन गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। वहीं लोगों की माने तो स्थितियां इससे इतर हैं। जिले में अलग- अलग इलाकों के तकरीबन 70 राजस्व गांव नदी, नालों एवं बारिश के पानी से घिरे हुए हैं।
रामपुर कारखाना के चार गांवों में गंडक नदी दबाव बना रही है। यहां पानी का रिसाव होने से लोगों की चिंता बढ़ गई है। रुद्रपुर इलाके में 14 गांव पानी से घिर गए है, जहां सात गांवों में दस नावें लगाई गई है। यहां दो नदियों पर 13 बंधे हैं। ग्रामीणों की मानें तो यहां रिसाव हो रहा है। इसमें कोई बंधा टूटा तो तकरीबन 116 गांव बाढ़ की पानी से डूब जाएंगे। सबसे खराब स्थिति बरहज की है। जहां सरयू नदी के उस पार के दो गांवों के तकरीबन 22 मजरें सहित 25 से अधिक राजस्व गांव पानी में डूबे हुए है। यहां के तीन गांवों विशुनपुर देवार, परसिया देवार और भदिला प्रथम को प्रशासन बाढ़ प्रभावित क्षेत्र घोषित कर चुका है। बरहज कस्बे के पांच मोहल्लों में सरयू नदी का पानी घुसने लगा है। भागलपुर इलाके के सात गांवों में सरयू नदी का पानी घुस गया है। यहां नाव लगाई गई है।
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भागलपुर प्रतिनिधि के अनुसार, सरयू नदी लाल निशान से एक मीटर 14 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गई है। जल स्तर में आधा सेंटीमीटर प्रति घंटे की बढ़ोतरी हो रही है। सैकड़ों एकड़ फसल पानी से डूब गई है। नदी का पानी घरों में घुसने लगा है। बुधवार दोपहर तुर्तीपार रेगुलेटर पर नदी का जलस्तर 65 मीटर 44 सेंटीमीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 64 मीटर 30 सेंटीमीटर से 1 मीटर 14 सेंटीमीटर ऊपर है। केंद्रीय जल आयोग तुर्तीपार के मुताबिक पहाड़ों पर हो रही बारिश और बैराजों से पानी छोड़े जाने के कारण नदी उफान पर है। अगले 24 घंटे जलस्तर में वृद्धि होती रहेगी।
सलेमपुर प्रतिनिधि के अनुसार, छोटी गंडक नदी का भी पानी बढ़ रहा है। यह नदी एक सप्ताह से खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। यहां खतरे का निशान 64.500 मीटर है। नदी 65.350 मी. पर बह रही है। केंद्रीय जल आयोग के नदावर स्थित कार्यालय के मुताबिक नदी मंगलवार से स्थिर है।
जिले में तीन गांवों को बाढ़ प्रभावित गांव घोषित कर दिया गया है। 11 गांवों में नावें लगा दी गई है। जिन गांवों को बाढ़ प्रभावित घोषित किया गया है वहां राशन किट वितरित की जाएगी। बंधों में कुछ स्थानों पर रिसाव होने की सूचना पर वहां पुख्ता इंतजाम किया गया है। 24 नावें जगह - जगह लोगों की सुविधा के लिए लगाई गई है। जो गांव पानी से चारों तरफ घिरे है वहां बाढ़ जैसी कोई बात नहीं हैं।
अमृतलाल विंद
मुख्य राजस्व अधिकारी
रुद्रपुर : हालात बता रहे हैं भयावह हो सकता है मंजर
फोटो समाचार।
संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रपुर। क्षेत्र में वर्ष 1998 की बाढ़ जैसा का मंजर साफ दिखने लगा है। राप्ती और गोर्रा नदियों पर बने तटबंधों में रिसाव शुरू हो गया है।
नदियों का जलस्तर लाल निशान को पार कर करीब डेढ़ मीटर ऊपर चले जाने से दोआबा और कछार के 116 गांवों में लोग परेशान हैं। गोर्रा नदी वर्ष 2017 के हाई फ्लड लेवल से ऊपर पहुंच गई। गोर्रा का जलस्तर खतरे के निशान 70.50 से बढ़कर 71.90 मीटर पर पहुंच गया। नदीं पिड़रा पुल स्थित मीटर गेज से ऊपर जा रही है। रोज करीब 20 सेमी बढ़ रही गोर्रा नदी की यही रफ्तार रहा तो एक दो दिन में नदी पुल के ऊपर से बहने लगेगी। राप्ती का जलस्तर भी खतरे के निशान से एक मीटर ऊपर पहुंचने से दोआबा के 52 गांवों में भारी तबाही की आशंका जताई जा रही है। यहां तिघरा मराछी बांध पर भेड़ी, नीबा और माझा नरायन गांव के पास रिसाव शुरू हो गया है। गोर्रा नदी पर बने तटबंध पिड़रा भुसवल बांध पर पिड़री गांव के पास रिसाव हो रहा है। पचलड़ी बेलवा बांध पर पांच जगह रिसाव हो रहा है। जगतमाझा गांव के पास गोर्रा के तटबंध के नीचे रिसाव शुरू हो गया है। गोर्रा और राप्ती नदीं पर बने करीब 100 किलोमीटर बांध पर एक साथ एक दर्जन जगहों पर रिसाव शुरू होने से हड़कंप मचा है। सिंचाई विभाग बंधे से हो रहे रिसाव को रोकने का असफल प्रयास कर रहा है। बारिश और कुर्ना नदी में आए ऊफान से क्षेत्र के 14 गांव पानी से घिर गए है।
बांध बचाने की हर तकनीकी नाकामयाब
सरकार के पायलट प्रोजेक्ट के कारण डूबेगें गांव: खोखा सिंह
रुद्रपुर। बांध बचाने के लिए सिंचाई विभाग की हर तकनीकी नाकाम साबित हो रही है। बाढ़ खंड की कामचोरी से दोआबा और कछार के 116 गांवों पर बाढ़ का संकट काल बन कर खड़ा है। यह बात सपा के पूर्व विधायक अनुग्रह नारायण सिंह उर्फ खोखा सिंह ने कहीं। वह बुधवार को दोआबा और कछार में बाढ़ की हालात का जायजा लेने पहुंचे। उन्होंने कहा कि सरकार के नकारेपन से रुद्रपुर की तीन लाख की आबादी के सिर पर मौत का साया मंडरा रहा है। गायघाट में परक्यू पाइन बनाकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है। लाखों रुपये की लागत से बनने वाला यह परक्यू पाइन नदींका वेग रोकना तो दूर बनने के बाद ही ढहने लग रहा है। सिंचाई विभाग बाढ़ निरोधक गतिविधि के नाम पर सिर्फ धन का बंदरबांट कर रहा है। लाखों लोगों के जीवन से खिलड़वाड़ करने वाले प्रशासन के खिलाफ भारी जनाक्रोश है। यदि बाढ़ आई तो प्रशासन को जनता का आक्रोश झेलना पड़ेगा।
बरहज : सरयू उफनाने से चारो ओर पानी ही पानी
फोटो समाचार
संवाद न्यूज एजेंसी
बरहज। सरयू नदी में सैलाब उमड़ आया है। नदी खतरे के निशान से एक मीटर 60 सेमी ऊपर बह रही है। पानी बंधों और रामजानकी मार्ग पर दबाव बना रहा है। तटवर्ती गांवों सहित नगर के कुछ वार्डों में लोगों के घरों तक बाढ़ का पानी पहुंच गया है।
बुधवार को सरयू थाना घाट पर बने मीटर गेज पर खतरे के निशान 66.50 से एक मीटर 60 सेमी ऊपर 68.10 पर बह रही थी। नदी में उमड़ रहे सैलाब से घाट की सभी सीढ़ियां जलमग्न हो गई हैं। पटेल नगर के संत रविदास मंदिर, पुराना बरहज, रगरगंज, आजाद नगर दक्षिणी पटेल नगर पूर्वी में लोगों के घरों तक बाढ़ का पानी पहुंच गया है। नदी के जलस्तर में पिछले चार दिनों से बेतहाशा बढ़त दर्ज की जा रही है। राप्ती नदी भी उफान पर है। नदियों में आए आफत के कारण भदिला प्रथम, गोरखपुर जनपद का विस्थापित कोलखास गांव मैरुंड हो गया है। वहीं परसियां-विशुनपुर देवार के 22 टोले बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। नदी का जलस्तर थमने का नाम नहीं ले रहा है। जिससे बाढ़ का पानी कटइलवा, बेलडॉड, मठियां, नौका टोला, कुवाईच टोला, रमईपुरा, धनया कुंड महाल आदि जगहों पर रामजानकी मार्ग तक पहुंच गया है। उधर, राप्ती नदी कपरवार-रुद्रपुर मार्ग पर बिनवापुरी के गांव के निकट सड़क पार करने को मचल रही है। जवाहिर यादव, मंजनाथ, संजय यादव, जगदीश, चंदन, मुखलाल आदि का कहना है कि नदी के बढ़त बनाने से 1998 का डर सताने लगा है। यही आलम रहा तो गांवों में नदी भारी तबाही मचा सकती है। बाढ़ से सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि जलमग्न होने से फसलें बर्बाद हो रही हैं। वहीं मवेशियों के लिए चारा का संकट गहरा गया है। बाढ़ के पानी से घिरे गांवों के लोग उचित ठौर की तलाश में जुट गए है।
अधिकारियों ने तटबंधों का किया निरीक्षण
बरहज। सरयू नदी में उमड़ रहे सैलाब के कारण चारो ओर पानी ही पानी हो गया है। बाढ़ की विभीषिका से तटवर्ती गांवों के लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। नदी निरंतर बढ़त बना रही है। बुधवार को बाढ़ खंड विभाग के सहायक अभियंता अशोक द्विवेदी, जेई नागेंद्र प्रताप सिंह नके साथ थाना घाट पर बने मीटर गेज पर बह रही नदी की स्थिति देखी। अधिकारियों ने कटइलवा, विस्थापित कुरह परसियां पर नवनिर्मित बंधे का हाल जाना। सहायक अभियंता अशोक द्विवेदी ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में नदी के जलस्तर में काफी बढ़त दर्ज की गई है। आपात स्थिति से निपटने के लिए मुकम्मल इंतजामात कर लिए गए हैं।
बाढ़ प्रभावित गांवों के लिए पहुंची राहत सामग्री
बरहज। सरयू नदी में आए सैलाब से राप्ती नदी भी उफान पर है। नदी में आए आफत के बाढ़ के कारण दर्जनों गांवों के लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। जरुरत के सामानों के लिए लोग जान जोखिम में डाल नाव से सफर कर रहे हैं। बाढ़ को लेकर प्रशासन सतर्क है। लोगों की मुश्किलों को देखते हुए प्रशासन ने तहसील मुख्यालय पर 500 आपदा राहत पैकेट भेजा है। पैकेट में आलू, दाल, चावल, आटा, नमक, रिफाइंड तेल आदि सामान है। जो बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में वितरित किए जाएंगे।
कुरह परसियां और बेलडॉड गांव में जाने वाला मार्ग डूबा
कपरवार। सरयू नदी का जलस्तर थमने का नमा नहीं ले रहा है। जिससे बाढ़ का पानी गांवों में लोगों के घरों तक पहुंच गया है। जलस्तर में निरंतर हो रही वृद्धि के कारण बेलडॉड गांव में जाने वाले मुख्य मार्ग और नदी में विलीन हो चुका कुरह परसियां मार्ग डूब गया है। जिससे लोगों को आवागमन में दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है।
जिला पंचायत अध्यक्ष ने कटान स्थलों का किया निरीक्षण
रुद्रपुर। जिला पंचायत अध्यक्ष गिरिशचंद्र तिवारी ने बुधवार को क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया। उन्होंने सिंचाई विभाग को बंधों को बचाए रखने का निर्देश दिया।
जिला पंचायत अध्यक्ष पचलड़ी बेलवा बांध पर रतनपुर, तिघरा मराछी बांध पर नीबा, भेड़ी, नरायनपुर आदि कटान स्थलों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने सिंचाई विभाग के अवर अभियंताओं से गोर्रा और राप्ती नदी के जलस्तर का जायजा लिया। कहा कि किसी भी हाल में बंधा नहीं कटना चाहिए। निरीक्षण के दौरान जिला पंचायत सदस्य रविंद्र पासवान, सूर्यभान सिंह, चंद्रशेखर निषाद, अनिरूद्ध चौधरी आदि मौजूद रहे।
बाढ़ से निपटने की प्रशासन ने तैयारी पूरी की
रुद्रपुर। उपजिलाधिकारी संजीव कुमार उपाध्याय ने कहा कि संभावित बाढ़ से निपटने के लिए प्रशासन ने तैयारी पूरी कर ली है। आठ गांवों में आवागमन के लिए नाव लगा दी गई है। गोर्रा और राप्ती नदी के किनारे 14 जगह पर बाढ़ चौकियां अलर्ट कर दी गई है। दोआबा और कछार के बाढ़ प्रभावितों के लिए सात जगहों पर शिविर में चिन्हित कर लोगों की तैनाती कर दी गई है। सिंचाई विभाग को बंधे की निगरानी में मुस्तैद रहने का निर्देश दिया गया है। एसडीओ बाढ़ खंड रविशंकर यादव ने कहा कि गोर्रा और राप्ती नदी के तट पर सभी बंधे सुरक्षित है। 24 घंटे बंधों की निगरानी में टीम कार्य कर रही है। बाढ़ चौकियों पर प्रशासन के लोग पूरे मुस्तैदी से जमे है।
रिसाव से सैकड़ों एकड़ फसल डूबी
फोटो समाचार
भाटपार रानी ।खनुवा नदी इस समय उफान पर है। सरया बनकटा शंभू तटबंध पर ग्राम धर्मखोर करण स्थित रेगुलेटर से पिछले कई दिनों से रिसाव जारी है। इससे धर्मखोर करन,सरया, छरौछा, केहुनियाँ, आदि गांव की सैकड़ों एकड़ किसानों की धान मक्का बाजरा अरहर आदि फसलें जलमग्न हो गईं हैं ।
ग्रामीणों ने बताया कि बरसात व बाढ़ का पानी धरमखोर करन के प्राथमिक और जूनियर हाई स्कूल के प्रांगण में पहुंच गया है। जिससे पठन-पाठन का काम पूरी तरह बाधित है ।बच्चे स्कूल आने से कतरा रहे हैं। गांव के राम इकबाल सिंह , सुधीर सिंह,बृद्धि चंद,प्रदीप सिंह ,शिव प्रसाद आदि ने रिसाव बंद करने तथा बर्बाद फसलों की मुआवजा की मांग की है। उप जिला अधिकारी ध्रुव कुमार शुक्ला ने बताया कि इसकी सूचना संबंधित उच्च अधिकारियों को भेज दी गई है । तटबंधों पर नजर रखी जा रही है।
मऊ के बाढ़ प्रभावित लोगों का ठिकाना बना महाविद्यालय तेलिया कला
मईल। मऊ जनपद के चक्की मूसा दोही में सरयू नदी के बाढ़ आने से तबाही मचा दी है। वहां के प्रशासन ने बाढ़ से प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थान रहने के लिए देवरिया जनपद के तेलिया कला महाविद्यालय को ठिकाना बनाया है।
मऊ जनपद के मधुबन थाना क्षेत्र के चौकी मूसा डीह गांव सरयू नदी के किनारे बसा है। यह मईल थाना क्षेत्र के तेलिया कला से मात्र 5 किलोमीटर की दूरी पर है। जबकि मधुबन की दूरी यहां से 50 किलोमीटर है। मऊ जनपद के प्रशासन ने बाढ़ से बचाव के लिए श्री राम महाविद्यालय तेलिया कला को शरणस्थली बनाया है। जहां पर बाढ़ प्रभावित लोग विद्यालयों में शरण लिए हुए हैं। ग्राम प्रधान ललन प्रसाद ने बताया कि प्रशासन द्वारा बाढ़ प्रभावित लोगों को दो दो लीटर प्रति कार्ड मिट्टी का तेल बुधवार को वितरण किया गया। इस संबंध में उप जिलाधिकारी मधुबन लालबाबू दुबे ने बताया कि बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए राहत सामग्री भेज दी गई है। प्रशासन बाढ़ प्रभावित लोगों का हर सहयोग किया जा रहा है। आने जाने के लिए नाव की व्यवस्था कराई गई है।
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अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। जिले की चारों नदियां सरयू, राप्ती, गोर्रा, छोटी गंडक खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। इनके बंधों पर 20 से अधिक स्थानों पर रिसाव हो रहा है। इससे 200 से अधिक गांवों में बाढ़ का भय लोगों को सता रहा है।
वहीं प्रशासन की मानें तो 11 गांव पानी से घिरे हैं। जहां 24 से अधिक नावों का इंतजाम लोगों के आने- जाने के लिए किया गया है। इसमें तीन गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। वहीं लोगों की माने तो स्थितियां इससे इतर हैं। जिले में अलग- अलग इलाकों के तकरीबन 70 राजस्व गांव नदी, नालों एवं बारिश के पानी से घिरे हुए हैं।
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रामपुर कारखाना के चार गांवों में गंडक नदी दबाव बना रही है। यहां पानी का रिसाव होने से लोगों की चिंता बढ़ गई है। रुद्रपुर इलाके में 14 गांव पानी से घिर गए है, जहां सात गांवों में दस नावें लगाई गई है। यहां दो नदियों पर 13 बंधे हैं। ग्रामीणों की मानें तो यहां रिसाव हो रहा है। इसमें कोई बंधा टूटा तो तकरीबन 116 गांव बाढ़ की पानी से डूब जाएंगे। सबसे खराब स्थिति बरहज की है। जहां सरयू नदी के उस पार के दो गांवों के तकरीबन 22 मजरें सहित 25 से अधिक राजस्व गांव पानी में डूबे हुए है। यहां के तीन गांवों विशुनपुर देवार, परसिया देवार और भदिला प्रथम को प्रशासन बाढ़ प्रभावित क्षेत्र घोषित कर चुका है। बरहज कस्बे के पांच मोहल्लों में सरयू नदी का पानी घुसने लगा है। भागलपुर इलाके के सात गांवों में सरयू नदी का पानी घुस गया है। यहां नाव लगाई गई है।
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भागलपुर प्रतिनिधि के अनुसार, सरयू नदी लाल निशान से एक मीटर 14 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गई है। जल स्तर में आधा सेंटीमीटर प्रति घंटे की बढ़ोतरी हो रही है। सैकड़ों एकड़ फसल पानी से डूब गई है। नदी का पानी घरों में घुसने लगा है। बुधवार दोपहर तुर्तीपार रेगुलेटर पर नदी का जलस्तर 65 मीटर 44 सेंटीमीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 64 मीटर 30 सेंटीमीटर से 1 मीटर 14 सेंटीमीटर ऊपर है। केंद्रीय जल आयोग तुर्तीपार के मुताबिक पहाड़ों पर हो रही बारिश और बैराजों से पानी छोड़े जाने के कारण नदी उफान पर है। अगले 24 घंटे जलस्तर में वृद्धि होती रहेगी।
सलेमपुर प्रतिनिधि के अनुसार, छोटी गंडक नदी का भी पानी बढ़ रहा है। यह नदी एक सप्ताह से खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। यहां खतरे का निशान 64.500 मीटर है। नदी 65.350 मी. पर बह रही है। केंद्रीय जल आयोग के नदावर स्थित कार्यालय के मुताबिक नदी मंगलवार से स्थिर है।
जिले में तीन गांवों को बाढ़ प्रभावित गांव घोषित कर दिया गया है। 11 गांवों में नावें लगा दी गई है। जिन गांवों को बाढ़ प्रभावित घोषित किया गया है वहां राशन किट वितरित की जाएगी। बंधों में कुछ स्थानों पर रिसाव होने की सूचना पर वहां पुख्ता इंतजाम किया गया है। 24 नावें जगह - जगह लोगों की सुविधा के लिए लगाई गई है। जो गांव पानी से चारों तरफ घिरे है वहां बाढ़ जैसी कोई बात नहीं हैं।
अमृतलाल विंद
मुख्य राजस्व अधिकारी
रुद्रपुर : हालात बता रहे हैं भयावह हो सकता है मंजर
फोटो समाचार।
संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रपुर। क्षेत्र में वर्ष 1998 की बाढ़ जैसा का मंजर साफ दिखने लगा है। राप्ती और गोर्रा नदियों पर बने तटबंधों में रिसाव शुरू हो गया है।
नदियों का जलस्तर लाल निशान को पार कर करीब डेढ़ मीटर ऊपर चले जाने से दोआबा और कछार के 116 गांवों में लोग परेशान हैं। गोर्रा नदी वर्ष 2017 के हाई फ्लड लेवल से ऊपर पहुंच गई। गोर्रा का जलस्तर खतरे के निशान 70.50 से बढ़कर 71.90 मीटर पर पहुंच गया। नदीं पिड़रा पुल स्थित मीटर गेज से ऊपर जा रही है। रोज करीब 20 सेमी बढ़ रही गोर्रा नदी की यही रफ्तार रहा तो एक दो दिन में नदी पुल के ऊपर से बहने लगेगी। राप्ती का जलस्तर भी खतरे के निशान से एक मीटर ऊपर पहुंचने से दोआबा के 52 गांवों में भारी तबाही की आशंका जताई जा रही है। यहां तिघरा मराछी बांध पर भेड़ी, नीबा और माझा नरायन गांव के पास रिसाव शुरू हो गया है। गोर्रा नदी पर बने तटबंध पिड़रा भुसवल बांध पर पिड़री गांव के पास रिसाव हो रहा है। पचलड़ी बेलवा बांध पर पांच जगह रिसाव हो रहा है। जगतमाझा गांव के पास गोर्रा के तटबंध के नीचे रिसाव शुरू हो गया है। गोर्रा और राप्ती नदीं पर बने करीब 100 किलोमीटर बांध पर एक साथ एक दर्जन जगहों पर रिसाव शुरू होने से हड़कंप मचा है। सिंचाई विभाग बंधे से हो रहे रिसाव को रोकने का असफल प्रयास कर रहा है। बारिश और कुर्ना नदी में आए ऊफान से क्षेत्र के 14 गांव पानी से घिर गए है।
बांध बचाने की हर तकनीकी नाकामयाब
सरकार के पायलट प्रोजेक्ट के कारण डूबेगें गांव: खोखा सिंह
रुद्रपुर। बांध बचाने के लिए सिंचाई विभाग की हर तकनीकी नाकाम साबित हो रही है। बाढ़ खंड की कामचोरी से दोआबा और कछार के 116 गांवों पर बाढ़ का संकट काल बन कर खड़ा है। यह बात सपा के पूर्व विधायक अनुग्रह नारायण सिंह उर्फ खोखा सिंह ने कहीं। वह बुधवार को दोआबा और कछार में बाढ़ की हालात का जायजा लेने पहुंचे। उन्होंने कहा कि सरकार के नकारेपन से रुद्रपुर की तीन लाख की आबादी के सिर पर मौत का साया मंडरा रहा है। गायघाट में परक्यू पाइन बनाकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है। लाखों रुपये की लागत से बनने वाला यह परक्यू पाइन नदींका वेग रोकना तो दूर बनने के बाद ही ढहने लग रहा है। सिंचाई विभाग बाढ़ निरोधक गतिविधि के नाम पर सिर्फ धन का बंदरबांट कर रहा है। लाखों लोगों के जीवन से खिलड़वाड़ करने वाले प्रशासन के खिलाफ भारी जनाक्रोश है। यदि बाढ़ आई तो प्रशासन को जनता का आक्रोश झेलना पड़ेगा।
बरहज : सरयू उफनाने से चारो ओर पानी ही पानी
फोटो समाचार
संवाद न्यूज एजेंसी
बरहज। सरयू नदी में सैलाब उमड़ आया है। नदी खतरे के निशान से एक मीटर 60 सेमी ऊपर बह रही है। पानी बंधों और रामजानकी मार्ग पर दबाव बना रहा है। तटवर्ती गांवों सहित नगर के कुछ वार्डों में लोगों के घरों तक बाढ़ का पानी पहुंच गया है।
बुधवार को सरयू थाना घाट पर बने मीटर गेज पर खतरे के निशान 66.50 से एक मीटर 60 सेमी ऊपर 68.10 पर बह रही थी। नदी में उमड़ रहे सैलाब से घाट की सभी सीढ़ियां जलमग्न हो गई हैं। पटेल नगर के संत रविदास मंदिर, पुराना बरहज, रगरगंज, आजाद नगर दक्षिणी पटेल नगर पूर्वी में लोगों के घरों तक बाढ़ का पानी पहुंच गया है। नदी के जलस्तर में पिछले चार दिनों से बेतहाशा बढ़त दर्ज की जा रही है। राप्ती नदी भी उफान पर है। नदियों में आए आफत के कारण भदिला प्रथम, गोरखपुर जनपद का विस्थापित कोलखास गांव मैरुंड हो गया है। वहीं परसियां-विशुनपुर देवार के 22 टोले बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। नदी का जलस्तर थमने का नाम नहीं ले रहा है। जिससे बाढ़ का पानी कटइलवा, बेलडॉड, मठियां, नौका टोला, कुवाईच टोला, रमईपुरा, धनया कुंड महाल आदि जगहों पर रामजानकी मार्ग तक पहुंच गया है। उधर, राप्ती नदी कपरवार-रुद्रपुर मार्ग पर बिनवापुरी के गांव के निकट सड़क पार करने को मचल रही है। जवाहिर यादव, मंजनाथ, संजय यादव, जगदीश, चंदन, मुखलाल आदि का कहना है कि नदी के बढ़त बनाने से 1998 का डर सताने लगा है। यही आलम रहा तो गांवों में नदी भारी तबाही मचा सकती है। बाढ़ से सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि जलमग्न होने से फसलें बर्बाद हो रही हैं। वहीं मवेशियों के लिए चारा का संकट गहरा गया है। बाढ़ के पानी से घिरे गांवों के लोग उचित ठौर की तलाश में जुट गए है।
अधिकारियों ने तटबंधों का किया निरीक्षण
बरहज। सरयू नदी में उमड़ रहे सैलाब के कारण चारो ओर पानी ही पानी हो गया है। बाढ़ की विभीषिका से तटवर्ती गांवों के लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। नदी निरंतर बढ़त बना रही है। बुधवार को बाढ़ खंड विभाग के सहायक अभियंता अशोक द्विवेदी, जेई नागेंद्र प्रताप सिंह नके साथ थाना घाट पर बने मीटर गेज पर बह रही नदी की स्थिति देखी। अधिकारियों ने कटइलवा, विस्थापित कुरह परसियां पर नवनिर्मित बंधे का हाल जाना। सहायक अभियंता अशोक द्विवेदी ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में नदी के जलस्तर में काफी बढ़त दर्ज की गई है। आपात स्थिति से निपटने के लिए मुकम्मल इंतजामात कर लिए गए हैं।
बाढ़ प्रभावित गांवों के लिए पहुंची राहत सामग्री
बरहज। सरयू नदी में आए सैलाब से राप्ती नदी भी उफान पर है। नदी में आए आफत के बाढ़ के कारण दर्जनों गांवों के लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। जरुरत के सामानों के लिए लोग जान जोखिम में डाल नाव से सफर कर रहे हैं। बाढ़ को लेकर प्रशासन सतर्क है। लोगों की मुश्किलों को देखते हुए प्रशासन ने तहसील मुख्यालय पर 500 आपदा राहत पैकेट भेजा है। पैकेट में आलू, दाल, चावल, आटा, नमक, रिफाइंड तेल आदि सामान है। जो बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में वितरित किए जाएंगे।
कुरह परसियां और बेलडॉड गांव में जाने वाला मार्ग डूबा
कपरवार। सरयू नदी का जलस्तर थमने का नमा नहीं ले रहा है। जिससे बाढ़ का पानी गांवों में लोगों के घरों तक पहुंच गया है। जलस्तर में निरंतर हो रही वृद्धि के कारण बेलडॉड गांव में जाने वाले मुख्य मार्ग और नदी में विलीन हो चुका कुरह परसियां मार्ग डूब गया है। जिससे लोगों को आवागमन में दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है।
जिला पंचायत अध्यक्ष ने कटान स्थलों का किया निरीक्षण
रुद्रपुर। जिला पंचायत अध्यक्ष गिरिशचंद्र तिवारी ने बुधवार को क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया। उन्होंने सिंचाई विभाग को बंधों को बचाए रखने का निर्देश दिया।
जिला पंचायत अध्यक्ष पचलड़ी बेलवा बांध पर रतनपुर, तिघरा मराछी बांध पर नीबा, भेड़ी, नरायनपुर आदि कटान स्थलों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने सिंचाई विभाग के अवर अभियंताओं से गोर्रा और राप्ती नदी के जलस्तर का जायजा लिया। कहा कि किसी भी हाल में बंधा नहीं कटना चाहिए। निरीक्षण के दौरान जिला पंचायत सदस्य रविंद्र पासवान, सूर्यभान सिंह, चंद्रशेखर निषाद, अनिरूद्ध चौधरी आदि मौजूद रहे।
बाढ़ से निपटने की प्रशासन ने तैयारी पूरी की
रुद्रपुर। उपजिलाधिकारी संजीव कुमार उपाध्याय ने कहा कि संभावित बाढ़ से निपटने के लिए प्रशासन ने तैयारी पूरी कर ली है। आठ गांवों में आवागमन के लिए नाव लगा दी गई है। गोर्रा और राप्ती नदी के किनारे 14 जगह पर बाढ़ चौकियां अलर्ट कर दी गई है। दोआबा और कछार के बाढ़ प्रभावितों के लिए सात जगहों पर शिविर में चिन्हित कर लोगों की तैनाती कर दी गई है। सिंचाई विभाग को बंधे की निगरानी में मुस्तैद रहने का निर्देश दिया गया है। एसडीओ बाढ़ खंड रविशंकर यादव ने कहा कि गोर्रा और राप्ती नदी के तट पर सभी बंधे सुरक्षित है। 24 घंटे बंधों की निगरानी में टीम कार्य कर रही है। बाढ़ चौकियों पर प्रशासन के लोग पूरे मुस्तैदी से जमे है।
रिसाव से सैकड़ों एकड़ फसल डूबी
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भाटपार रानी ।खनुवा नदी इस समय उफान पर है। सरया बनकटा शंभू तटबंध पर ग्राम धर्मखोर करण स्थित रेगुलेटर से पिछले कई दिनों से रिसाव जारी है। इससे धर्मखोर करन,सरया, छरौछा, केहुनियाँ, आदि गांव की सैकड़ों एकड़ किसानों की धान मक्का बाजरा अरहर आदि फसलें जलमग्न हो गईं हैं ।
ग्रामीणों ने बताया कि बरसात व बाढ़ का पानी धरमखोर करन के प्राथमिक और जूनियर हाई स्कूल के प्रांगण में पहुंच गया है। जिससे पठन-पाठन का काम पूरी तरह बाधित है ।बच्चे स्कूल आने से कतरा रहे हैं। गांव के राम इकबाल सिंह , सुधीर सिंह,बृद्धि चंद,प्रदीप सिंह ,शिव प्रसाद आदि ने रिसाव बंद करने तथा बर्बाद फसलों की मुआवजा की मांग की है। उप जिला अधिकारी ध्रुव कुमार शुक्ला ने बताया कि इसकी सूचना संबंधित उच्च अधिकारियों को भेज दी गई है । तटबंधों पर नजर रखी जा रही है।
मऊ के बाढ़ प्रभावित लोगों का ठिकाना बना महाविद्यालय तेलिया कला
मईल। मऊ जनपद के चक्की मूसा दोही में सरयू नदी के बाढ़ आने से तबाही मचा दी है। वहां के प्रशासन ने बाढ़ से प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थान रहने के लिए देवरिया जनपद के तेलिया कला महाविद्यालय को ठिकाना बनाया है।
मऊ जनपद के मधुबन थाना क्षेत्र के चौकी मूसा डीह गांव सरयू नदी के किनारे बसा है। यह मईल थाना क्षेत्र के तेलिया कला से मात्र 5 किलोमीटर की दूरी पर है। जबकि मधुबन की दूरी यहां से 50 किलोमीटर है। मऊ जनपद के प्रशासन ने बाढ़ से बचाव के लिए श्री राम महाविद्यालय तेलिया कला को शरणस्थली बनाया है। जहां पर बाढ़ प्रभावित लोग विद्यालयों में शरण लिए हुए हैं। ग्राम प्रधान ललन प्रसाद ने बताया कि प्रशासन द्वारा बाढ़ प्रभावित लोगों को दो दो लीटर प्रति कार्ड मिट्टी का तेल बुधवार को वितरण किया गया। इस संबंध में उप जिलाधिकारी मधुबन लालबाबू दुबे ने बताया कि बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए राहत सामग्री भेज दी गई है। प्रशासन बाढ़ प्रभावित लोगों का हर सहयोग किया जा रहा है। आने जाने के लिए नाव की व्यवस्था कराई गई है।