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भूमि के अभाव में लटकीं बड़ी परियोजनाएं
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भूमि के अभाव में लटकीं बड़ी परियोजनाएं
जिला अस्पताल, केंद्रीय विद्यालय, कृषि विश्वविद्यालय के लिए हो रही जमीन की तलाश
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। बड़ी परियोजनाओं के लिए भूमि की तलाश की जा रही है। जमीन नहीं मिल पा रही है। इस कारण इन परियोजनाओं में देरी हो रही है।
जिला अस्पताल के लिए सदर तहसील में मानक के अनुसार जमीन नहीं मिल पा रही है। केंद्रीय विद्यालय की भूमि का मामला कानूनी दांवपेच में फंस गया है। कृषि विश्वविद्यालय का हाल यह है कि मानक के अनुसार भूमि तलाशने में अफसरों को पसीना छूट रहा है। भूमि न मिलने के कारण जिलों को मिलीं कई बड़ी परियोजनाओं को पंख नहीं लग पा रहा है। इसके चलते विकास की रफ्तार सुस्त पड़ जा रही है।
जिला अस्पताल परिसर में मेडिकल कॉलेज का निर्माण कराया गया है। अब जिला अस्पताल को पांच से सात एकड़ भूमि शहर से तीन किमी की परिधि में चाहिए। काफी तलाश के बाद भूमि तहसील के रास्वकर्मियों को नहीं मिल पाई तो वे हाथ खड़े कर चुके हैं। सदर तहसीलदार ने भूमि न मिल पाने की सूचना आला अफसरों को दे दी है।
केंद्रीय विद्यालय स्थापना के समय से ही आईटीआई कॉलेज परिसर में चल रहा है। इसके लिए खोराराम मार्ग पर रजला गांव की भूमि आवंटित की गई, लेकिन निर्माण शुरू होने पर कानूनी दांवपेच में मामला फंस गया। इसके कारण भूमि के अभाव में भवन निर्माण ठप पड़ा हुआ है। इससे केंद्रीय विद्यालय को शैक्षिक गतिविधियों को सुचारु रूप से संचालित करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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अब कृषि विश्वविद्यालय के लिए दो सौ एकड़ भूमि की तलाश है, लेकिन अभी तक भूमि नहीं मिल पाई है। इससे विश्वविद्यालय की स्थापना की दिशा में कार्य आगे नहीं बढ़ पा रहा है। इसी तरह देवरिया देहात कोतवाली के लिए भूमि न मिलने की वजह से मामला एक साल से ठंडे बस्ते में चला गया है। इन परियोजनाओं के अधर में रहने के कारण जिम्मेदार भी परेशान हैं। कारण यह कि शासन स्तर पर उनसे जवाब मांगा जा रहा है। इसमें सबसे अधिक परेशानी जिला अस्पताल को लेकर हो रही है, क्योंकि मानक के अनुसार शहर के पास भूमि होनी चाहिए।
सलेमपुर में मंडी के लिए नहीं मिल रही जगह
देवरिया। मंडी के लिए सलेमपुर में एक दशक से जमीन की तलाश की जा रही है। पांच से दस एकड़ तक जमीन की जरूरत है। इसके लिए मंडी समिति के अफसरों ने क्षेत्रीय किसानों से संपर्क भी किया था। मंडी समिति देवरिया के तत्कालीन सचिव राकेश कुमार के नेतृत्व में अफसर सलेमपुर से सटे गांव अहिरौली लाला के किसानों से जमीन के लिए संपर्क किए। सर्किल रेट से दोगुना दाम देने को तैयार थे। नवलपुर, मझौलीराज और सलेमपुर के बीच जमीन की तलाश अफसर कर रहे हैं, लेकिन अभी तक जमीन नहीं मिल सकी है।
बरहज, सलेमपुर में बस स्टेशन के लिए चाहिए भूमि
देवरिया। बरहज और सलेमपुर में बस स्टेशन के लिए भूमि की तलाश की जा रही है। अभी भूमि न मिलने के कारण बसें सड़क के किनारे खड़ी होती हैं। लोग सड़क पर घंटों इंतजार करते हैं। इससे हादसा होने का भय बना रहता है।
कोट
जिला अस्पताल के लिए भूमि की तलाश की गई थी। पर मिली नहीं है। फिर से जिला अस्पताल और कृषि विश्व विद्यालय के लिए भूमि की तलाश की जा रही है। अन्य परियोजनाओं के लिए भी प्रयास किया जा रहा है।
-अमृत लाल बिंद, मुख्य राजस्व अधिकारी
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जिला अस्पताल, केंद्रीय विद्यालय, कृषि विश्वविद्यालय के लिए हो रही जमीन की तलाश
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। बड़ी परियोजनाओं के लिए भूमि की तलाश की जा रही है। जमीन नहीं मिल पा रही है। इस कारण इन परियोजनाओं में देरी हो रही है।
जिला अस्पताल के लिए सदर तहसील में मानक के अनुसार जमीन नहीं मिल पा रही है। केंद्रीय विद्यालय की भूमि का मामला कानूनी दांवपेच में फंस गया है। कृषि विश्वविद्यालय का हाल यह है कि मानक के अनुसार भूमि तलाशने में अफसरों को पसीना छूट रहा है। भूमि न मिलने के कारण जिलों को मिलीं कई बड़ी परियोजनाओं को पंख नहीं लग पा रहा है। इसके चलते विकास की रफ्तार सुस्त पड़ जा रही है।
जिला अस्पताल परिसर में मेडिकल कॉलेज का निर्माण कराया गया है। अब जिला अस्पताल को पांच से सात एकड़ भूमि शहर से तीन किमी की परिधि में चाहिए। काफी तलाश के बाद भूमि तहसील के रास्वकर्मियों को नहीं मिल पाई तो वे हाथ खड़े कर चुके हैं। सदर तहसीलदार ने भूमि न मिल पाने की सूचना आला अफसरों को दे दी है।
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केंद्रीय विद्यालय स्थापना के समय से ही आईटीआई कॉलेज परिसर में चल रहा है। इसके लिए खोराराम मार्ग पर रजला गांव की भूमि आवंटित की गई, लेकिन निर्माण शुरू होने पर कानूनी दांवपेच में मामला फंस गया। इसके कारण भूमि के अभाव में भवन निर्माण ठप पड़ा हुआ है। इससे केंद्रीय विद्यालय को शैक्षिक गतिविधियों को सुचारु रूप से संचालित करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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अब कृषि विश्वविद्यालय के लिए दो सौ एकड़ भूमि की तलाश है, लेकिन अभी तक भूमि नहीं मिल पाई है। इससे विश्वविद्यालय की स्थापना की दिशा में कार्य आगे नहीं बढ़ पा रहा है। इसी तरह देवरिया देहात कोतवाली के लिए भूमि न मिलने की वजह से मामला एक साल से ठंडे बस्ते में चला गया है। इन परियोजनाओं के अधर में रहने के कारण जिम्मेदार भी परेशान हैं। कारण यह कि शासन स्तर पर उनसे जवाब मांगा जा रहा है। इसमें सबसे अधिक परेशानी जिला अस्पताल को लेकर हो रही है, क्योंकि मानक के अनुसार शहर के पास भूमि होनी चाहिए।
सलेमपुर में मंडी के लिए नहीं मिल रही जगह
देवरिया। मंडी के लिए सलेमपुर में एक दशक से जमीन की तलाश की जा रही है। पांच से दस एकड़ तक जमीन की जरूरत है। इसके लिए मंडी समिति के अफसरों ने क्षेत्रीय किसानों से संपर्क भी किया था। मंडी समिति देवरिया के तत्कालीन सचिव राकेश कुमार के नेतृत्व में अफसर सलेमपुर से सटे गांव अहिरौली लाला के किसानों से जमीन के लिए संपर्क किए। सर्किल रेट से दोगुना दाम देने को तैयार थे। नवलपुर, मझौलीराज और सलेमपुर के बीच जमीन की तलाश अफसर कर रहे हैं, लेकिन अभी तक जमीन नहीं मिल सकी है।
बरहज, सलेमपुर में बस स्टेशन के लिए चाहिए भूमि
देवरिया। बरहज और सलेमपुर में बस स्टेशन के लिए भूमि की तलाश की जा रही है। अभी भूमि न मिलने के कारण बसें सड़क के किनारे खड़ी होती हैं। लोग सड़क पर घंटों इंतजार करते हैं। इससे हादसा होने का भय बना रहता है।
कोट
जिला अस्पताल के लिए भूमि की तलाश की गई थी। पर मिली नहीं है। फिर से जिला अस्पताल और कृषि विश्व विद्यालय के लिए भूमि की तलाश की जा रही है। अन्य परियोजनाओं के लिए भी प्रयास किया जा रहा है।
-अमृत लाल बिंद, मुख्य राजस्व अधिकारी