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खतौनी देखकर रकबा जान सकेंगे किसान
देवरिया
Updated Thu, 07 Jul 2016 10:31 PM IST
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पंजाब में खेती और उत्पादन पर मॉनसून का असर
- फोटो : फाइल फोटो
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नीलांबुज मिश्र
सलेमपुर। खतौनी का नकल देखकर किसान अपने खेत का हिस्सा जान सकेंगे। गांव के नक्शे में भी किसानों के जमीन का बंटवारा होगा। इसके लिए तहसील प्रशासन जल्द ही अभियान शुरू करेगा और राजस्वकर्मी नया खतौनी तैयार करेंगे। इससे खतौनी में जो भी विसंगतियां हैं वह दूर हो जाएंगी। इससे अफसरों पर काम का दबाव जहां कम होगा। वहीं किसानों को सहूलियत मिलेगी।
तहसील से मिलने वाली खतौनी देखकर कोई भी किसान या राजस्व कर्मचारी यह नहीं जान पाएगा कि खतौनी में जिस किसान का नाम दर्ज है उसके हिस्से में कितनी जमीन आएगी। इसको लेकर राजस्व कर्मचारी भी उहापोह की स्थिति में रहते हैं।
खतौनी में रकबा दर्ज नहीं होने से किसानों को बैंक से ऋण लेने, सूखा राहत और आपदा राहत देने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। इससे जहां लेखपालों को घंटों अभिलेखों का अवलोकन करना पड़ता था। वहीं किसानों को इसके लिए अफसरों का चक्कर काटना पड़ता है।
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वर्तमान में मिलने वाली खतौनी में यह सबसे बड़ी विसंगतियां हैं। हाल ही में बांटे गए सूखा राहत की रकम में रकबे की पूरी जानकारी नहीं होने के कारण किसी किसान के बैंक अकाउंट में रकबा से अधिक तो किसी के मामूली धनराशि गया है।
इसकी वजह से गांवों में जमीन और हिस्सा को लेकर विवाद भी खूब होता है। शासन ने इन बातों को ध्यान में रखते हुए ऐसा करने का निर्णय लिया है। इसको अमली जमा पहनाने के लिए बहुत जल्द जिले में काम शुरू होने वाला है।
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सलेमपुर। खतौनी का नकल देखकर किसान अपने खेत का हिस्सा जान सकेंगे। गांव के नक्शे में भी किसानों के जमीन का बंटवारा होगा। इसके लिए तहसील प्रशासन जल्द ही अभियान शुरू करेगा और राजस्वकर्मी नया खतौनी तैयार करेंगे। इससे खतौनी में जो भी विसंगतियां हैं वह दूर हो जाएंगी। इससे अफसरों पर काम का दबाव जहां कम होगा। वहीं किसानों को सहूलियत मिलेगी।
तहसील से मिलने वाली खतौनी देखकर कोई भी किसान या राजस्व कर्मचारी यह नहीं जान पाएगा कि खतौनी में जिस किसान का नाम दर्ज है उसके हिस्से में कितनी जमीन आएगी। इसको लेकर राजस्व कर्मचारी भी उहापोह की स्थिति में रहते हैं।
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खतौनी में रकबा दर्ज नहीं होने से किसानों को बैंक से ऋण लेने, सूखा राहत और आपदा राहत देने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। इससे जहां लेखपालों को घंटों अभिलेखों का अवलोकन करना पड़ता था। वहीं किसानों को इसके लिए अफसरों का चक्कर काटना पड़ता है।
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वर्तमान में मिलने वाली खतौनी में यह सबसे बड़ी विसंगतियां हैं। हाल ही में बांटे गए सूखा राहत की रकम में रकबे की पूरी जानकारी नहीं होने के कारण किसी किसान के बैंक अकाउंट में रकबा से अधिक तो किसी के मामूली धनराशि गया है।
इसकी वजह से गांवों में जमीन और हिस्सा को लेकर विवाद भी खूब होता है। शासन ने इन बातों को ध्यान में रखते हुए ऐसा करने का निर्णय लिया है। इसको अमली जमा पहनाने के लिए बहुत जल्द जिले में काम शुरू होने वाला है।