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शक के घेरे में मंदिर का करीबी, पूछताछ
देविररिया, अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 03 Jun 2016 11:37 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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देवरिया, पैकौली कुटी के पुजारी प्रयाग दास की हत्या में आए नए मोड़ की पड़ताल में पुलिस के हाथ अहम सुराग लगे हैं।
गुरुवार की शाम मंदिर से एक छोटी सीढ़ी मिली, जो रसोइघर और कुएं के पास थी। सीढ़ी पर खून के निशान मिले। सबूत के तौर पर पुलिस ने खून जांच के लिए भेज दिया है।
मैनुअल मुखबिरी फेल होने पर पुलिस सर्विलांस के भरोसे बैठ गई है। हत्या में नए क्लू मिलने के बाद मंदिर के एक पुजारी पर शक गहरा हो गया है। सूत्रों का दावा है कि प्रयाग दास की हत्या में सर्वाधिक लाभ पुजारी को हो सकता है। नई उम्मीद दिखने के बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी हैं।
हिरासत में लिए गए पुजारी के पुराने रिकॉर्ड के साथ अन्य लोगों की पड़ताल की जा रही है। चर्चा है कि जब मंदिर में सीढ़ी मिली तो पुलिस ने पड़ताल शुरू की।
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पुलिस कीे पूछताछ में पुजारी ने बताया कि सीढ़ी पर लगा खून उसका है। जब घाव दिखाने की बारी आई तो पुजारी चुप हो गया। इसी संदेह में पुलिस ने उसे दबोच लिया। पवहारी महराज के गद्दी विवाद की पड़ताल में जुटी पुलिस अब सीढ़ी वाली कड़ियों को जोड़ने में जुट गई है। संदेह में आया पुजारी बिहार का रहने वाला है और वर्षों से मंदिर का करीबी है। वारदात से पहले उसने किसी दूसरे के मोबाइल से घर पर बात की।
इस बात की पुष्टि हो रही है। पुलिस अब सर्विलांस के सहारे मामले की तह तक पहुंचने की कोशिश में है। इसके अलावा करीब 15 ऐसे संदिग्ध हैं जो मंदिर के काफी करीबी रहे हैं। कुछ पवहारी महराज के अत्यंत करीब हैं। हत्या के पर्दाफाश में जुटी पुलिस के हाथ कई ऐसी जानकारियां हाथ लगी हैं जो कई लोगों के चेहरे को बेनकाब कर देंगी। फिलहाल, पुलिस इन बिंदुओं से दूर रहने की कोशिश कर रही है।
शुक्रवार की सुबह रुद्रपुर कोतवाल रामऔतार यादव, भलुअनी एसओ जेपी यादव पैकौली कुटी पहुंचे। एक दर्जन पुलिसकर्मियों ने सीढ़ी की पड़ताल के बाद मंदिर में चढ़ने और निकलने का अभ्यास किया। कई बार गोसाई ओमप्रकाश गिरी, रामकेश्वर बिंद, काशीमिश्र, और दयाराम मिश्र सहित दर्जन भर लोगों से पूछताछ की गई। शक होने पर पुलिस ने इन लोगों से अलग-अलग बात की। बयान में काफी अंतर पाया गया। सीढ़ी के बारे में कोई संतोष जनक उत्तर नहीं मिलने पर पुलिस ने एक पुजारी को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया। सीढ़ी को भी पुलिस ने जांच के लिए भेज दिया।
सुबह से लेकर दोपहर तक की पड़ताल में पुलिस के घेरे में कर्मचारी थे। जिनका मंदिर में आना जाना था। पुलिस के हाथ जो कालडिटेल लगे हैं। उससे किसी नतीजे पर पुलिस नहीं पहुंच पा रही है। उल्टे मंदिर में अविश्वास पैदा करने वालों की पोल खुल रही है।
मामला हाइप्रोफाइल होने के कारण पुलिस फूंक कर कदम रख रही है। वारदात के पांच दिन बाद भी पुलिस चोरी गई मूर्तियों के बारे में कुछ नहीं बता पा रही है। पुलिस की जांच में करीब एक दर्जन से अधिक मूर्ति चोर हैं।
कई से पूछताछ में भी पुलिस के हाथ खाली हैं। नई उम्मीद के साथ जांच को आगे बढ़ा रही पुलिस के हाथ कितनी कामयाबी हाथ लगेगी, यह बाद की बात है। लेकिन पुलिस का मुख्य फोकस गद्दी विवाद पर लगा है। कुछ इंटरनेशनल तस्करों की गतिविधियों पर नजर है।
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गुरुवार की शाम मंदिर से एक छोटी सीढ़ी मिली, जो रसोइघर और कुएं के पास थी। सीढ़ी पर खून के निशान मिले। सबूत के तौर पर पुलिस ने खून जांच के लिए भेज दिया है।
मैनुअल मुखबिरी फेल होने पर पुलिस सर्विलांस के भरोसे बैठ गई है। हत्या में नए क्लू मिलने के बाद मंदिर के एक पुजारी पर शक गहरा हो गया है। सूत्रों का दावा है कि प्रयाग दास की हत्या में सर्वाधिक लाभ पुजारी को हो सकता है। नई उम्मीद दिखने के बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी हैं।
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हिरासत में लिए गए पुजारी के पुराने रिकॉर्ड के साथ अन्य लोगों की पड़ताल की जा रही है। चर्चा है कि जब मंदिर में सीढ़ी मिली तो पुलिस ने पड़ताल शुरू की।
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पुलिस कीे पूछताछ में पुजारी ने बताया कि सीढ़ी पर लगा खून उसका है। जब घाव दिखाने की बारी आई तो पुजारी चुप हो गया। इसी संदेह में पुलिस ने उसे दबोच लिया। पवहारी महराज के गद्दी विवाद की पड़ताल में जुटी पुलिस अब सीढ़ी वाली कड़ियों को जोड़ने में जुट गई है। संदेह में आया पुजारी बिहार का रहने वाला है और वर्षों से मंदिर का करीबी है। वारदात से पहले उसने किसी दूसरे के मोबाइल से घर पर बात की।
इस बात की पुष्टि हो रही है। पुलिस अब सर्विलांस के सहारे मामले की तह तक पहुंचने की कोशिश में है। इसके अलावा करीब 15 ऐसे संदिग्ध हैं जो मंदिर के काफी करीबी रहे हैं। कुछ पवहारी महराज के अत्यंत करीब हैं। हत्या के पर्दाफाश में जुटी पुलिस के हाथ कई ऐसी जानकारियां हाथ लगी हैं जो कई लोगों के चेहरे को बेनकाब कर देंगी। फिलहाल, पुलिस इन बिंदुओं से दूर रहने की कोशिश कर रही है।
शुक्रवार की सुबह रुद्रपुर कोतवाल रामऔतार यादव, भलुअनी एसओ जेपी यादव पैकौली कुटी पहुंचे। एक दर्जन पुलिसकर्मियों ने सीढ़ी की पड़ताल के बाद मंदिर में चढ़ने और निकलने का अभ्यास किया। कई बार गोसाई ओमप्रकाश गिरी, रामकेश्वर बिंद, काशीमिश्र, और दयाराम मिश्र सहित दर्जन भर लोगों से पूछताछ की गई। शक होने पर पुलिस ने इन लोगों से अलग-अलग बात की। बयान में काफी अंतर पाया गया। सीढ़ी के बारे में कोई संतोष जनक उत्तर नहीं मिलने पर पुलिस ने एक पुजारी को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया। सीढ़ी को भी पुलिस ने जांच के लिए भेज दिया।
सुबह से लेकर दोपहर तक की पड़ताल में पुलिस के घेरे में कर्मचारी थे। जिनका मंदिर में आना जाना था। पुलिस के हाथ जो कालडिटेल लगे हैं। उससे किसी नतीजे पर पुलिस नहीं पहुंच पा रही है। उल्टे मंदिर में अविश्वास पैदा करने वालों की पोल खुल रही है।
मामला हाइप्रोफाइल होने के कारण पुलिस फूंक कर कदम रख रही है। वारदात के पांच दिन बाद भी पुलिस चोरी गई मूर्तियों के बारे में कुछ नहीं बता पा रही है। पुलिस की जांच में करीब एक दर्जन से अधिक मूर्ति चोर हैं।
कई से पूछताछ में भी पुलिस के हाथ खाली हैं। नई उम्मीद के साथ जांच को आगे बढ़ा रही पुलिस के हाथ कितनी कामयाबी हाथ लगेगी, यह बाद की बात है। लेकिन पुलिस का मुख्य फोकस गद्दी विवाद पर लगा है। कुछ इंटरनेशनल तस्करों की गतिविधियों पर नजर है।