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राजस्व परिषद से नहीं जारी हो रहा गांवों का कोड
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राजस्व परिषद से नहीं जारी हो रहा गांवों का कोड
रुद्रपुर। रिकॉर्ड आपरेशन वाले गांवों की दुश्वारियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। दो नदियों के बीच बसे करीब एक दर्जन गांवों का रिकॉर्ड दस वर्षों तक सर्वेक्षण में फंसा रहा। सर्वेक्षण पूरा होने के बाद नोटिफिकेशन के लिए राजस्व परिषद में तीन वर्ष तक फाइल अटकी रही। अब नोटिफिकेशन के नौ माह बीतने के बाद भी भू-राजस्व की वेबसाइट पर इन गांवों का दस्तावेज अपलोड नहीं हुआ है।
सर्वेक्षण के उपरांत करीब एक दर्जन गांवों का कोड नहीं जारी होने से इन गांवों में वर्षो से लंबित नामांतरण के मामले जस के तस पड़े है। बदली खतौनी में वरासत नहीं होने से सर्वेमुक्त गांवों में मृतकों के नाम से जमींने पड़ी हैं। तहसील के अधिवक्ता राजशरण सिंह ने कहा कि दैवीय आपदा के बाद दो नदियों के बीच बसे गांवो का भूगोल बदलने से राजस्व अभिलेखों का नए सिरे से सर्वेक्षण करना पड़ता है। रुद्रपुर क्षेत्र में करीब दो दर्जन गांव 20 वर्षो से रिकार्ड आपरेशन में फसे थे। धीरे धीरे इन गांवो का सर्वेक्षण पूरा हो रहा है। रिकार्ड आपरेशन में फंसे गांवो के राजस्व अभिलेखो की नकल और परिवर्तन के आदेश दर्ज नही हो पा रहा है। जिन गांवों का सर्वेक्षण और नोटिफिकेशन का कार्य पूरा हो गया है। उन गांवों की सूची और रिकॉर्ड वेबसाइट पर मौजूद नहीं है। इस कारण ऑनलाइन खतौनी की नकल या नामांतरण का कार्य नहीं हो रहा है। नौ माह पहले जगरनाथपुर, जगंल डोमलडिला, खोपा, भगवानमांझा उर्फ बेलवा, बिशुनपुर बगही, रतनपुर और पटवनिया गांव का नोटिफिकेशन हुआ था। लेकिन गांवों के अभिलेख वेबसाइट पर अपलोड नहीं किए गए और न ही सर्वेक्षण पूर्ण हो चुके गांवों का राजस्व परिषद से कोड जारी किया गया है। इस कारण इन गांवों की खतौनी की नकल नहीं मिल रही है। इस बाबत एसडीएम संजीव कुमार उपाध्याय ने कहा कि जिलाधिकारी के माध्यम से भू राजस्व की वेबसाइट पर नोटिफाइड गांवों का रिकॉर्ड अपलोड करने और कोड जारी करने के लिए राजस्व परिषद को पत्र भेजा गया है। जल्द ही गांवों का कोड जारी हो जाएगा।
वरासत नहीं होने से किसानों की बढ़ी परेशानी
रुद्रपुर। सर्वेक्षण में फंसे गांवों में वरासत लटकने से किसानों की परेशानी बढ़ती जा रही है। जंगल डोमडीला के रणविजय त्रिपाठी ने कहा कि एक साल से वह वरासत के लिए परेशान है। बैंक संबंधित कार्य नहीं हो पा रहे हैं। जगरनाथपुर के संजय कुमार, विशुनपुर बगही के देवराज गुप्ता, वशिष्ठ सिंह, रतनपुर के सुनील पांडेय, शब्बीर अहमद ने कहा कि जमीन पर मालिकाना हक नहीं होने से दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं। तहसील से सिर्फ जल्द ऑनलाइन होने का आश्वासन ही मिल रहा है।
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रुद्रपुर। रिकॉर्ड आपरेशन वाले गांवों की दुश्वारियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। दो नदियों के बीच बसे करीब एक दर्जन गांवों का रिकॉर्ड दस वर्षों तक सर्वेक्षण में फंसा रहा। सर्वेक्षण पूरा होने के बाद नोटिफिकेशन के लिए राजस्व परिषद में तीन वर्ष तक फाइल अटकी रही। अब नोटिफिकेशन के नौ माह बीतने के बाद भी भू-राजस्व की वेबसाइट पर इन गांवों का दस्तावेज अपलोड नहीं हुआ है।
सर्वेक्षण के उपरांत करीब एक दर्जन गांवों का कोड नहीं जारी होने से इन गांवों में वर्षो से लंबित नामांतरण के मामले जस के तस पड़े है। बदली खतौनी में वरासत नहीं होने से सर्वेमुक्त गांवों में मृतकों के नाम से जमींने पड़ी हैं। तहसील के अधिवक्ता राजशरण सिंह ने कहा कि दैवीय आपदा के बाद दो नदियों के बीच बसे गांवो का भूगोल बदलने से राजस्व अभिलेखों का नए सिरे से सर्वेक्षण करना पड़ता है। रुद्रपुर क्षेत्र में करीब दो दर्जन गांव 20 वर्षो से रिकार्ड आपरेशन में फसे थे। धीरे धीरे इन गांवो का सर्वेक्षण पूरा हो रहा है। रिकार्ड आपरेशन में फंसे गांवो के राजस्व अभिलेखो की नकल और परिवर्तन के आदेश दर्ज नही हो पा रहा है। जिन गांवों का सर्वेक्षण और नोटिफिकेशन का कार्य पूरा हो गया है। उन गांवों की सूची और रिकॉर्ड वेबसाइट पर मौजूद नहीं है। इस कारण ऑनलाइन खतौनी की नकल या नामांतरण का कार्य नहीं हो रहा है। नौ माह पहले जगरनाथपुर, जगंल डोमलडिला, खोपा, भगवानमांझा उर्फ बेलवा, बिशुनपुर बगही, रतनपुर और पटवनिया गांव का नोटिफिकेशन हुआ था। लेकिन गांवों के अभिलेख वेबसाइट पर अपलोड नहीं किए गए और न ही सर्वेक्षण पूर्ण हो चुके गांवों का राजस्व परिषद से कोड जारी किया गया है। इस कारण इन गांवों की खतौनी की नकल नहीं मिल रही है। इस बाबत एसडीएम संजीव कुमार उपाध्याय ने कहा कि जिलाधिकारी के माध्यम से भू राजस्व की वेबसाइट पर नोटिफाइड गांवों का रिकॉर्ड अपलोड करने और कोड जारी करने के लिए राजस्व परिषद को पत्र भेजा गया है। जल्द ही गांवों का कोड जारी हो जाएगा।
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वरासत नहीं होने से किसानों की बढ़ी परेशानी
रुद्रपुर। सर्वेक्षण में फंसे गांवों में वरासत लटकने से किसानों की परेशानी बढ़ती जा रही है। जंगल डोमडीला के रणविजय त्रिपाठी ने कहा कि एक साल से वह वरासत के लिए परेशान है। बैंक संबंधित कार्य नहीं हो पा रहे हैं। जगरनाथपुर के संजय कुमार, विशुनपुर बगही के देवराज गुप्ता, वशिष्ठ सिंह, रतनपुर के सुनील पांडेय, शब्बीर अहमद ने कहा कि जमीन पर मालिकाना हक नहीं होने से दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं। तहसील से सिर्फ जल्द ऑनलाइन होने का आश्वासन ही मिल रहा है।
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