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नसबंदी में महिलाओं से पीछे हैं पुरुष
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14 माह में 12 पुरुषों और 4307 महिलाओं ने नसबंदी को अपनाया
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। जिले में नसबंदी के प्रति पुरुषों का रुझान कम है। चौदह माह में मात्र बारह पुरुषों ने नसबंदी को अपनाया। वहीं 4307 महिलाओं ने नसबंदी कराई।
सरकार का परिवार नियोजन पर जोर है। जनपद में स्वास्थ्य विभाग निर्धारित लक्ष्य को हासिल करने के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रहा है। इसके मद्देनजर स्वास्थ्य विभाग की ओर से जागरूकता कार्यक्रम चलाकर पुरुष नसबंदी का संदेश दिया जा रहा है, लेकिन पुरुष इसे लेकर गंभीर नहीं दिख रहे हैं।
उधर जनपद में परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत निर्धारित लक्ष्य महिलाओं के दम पर पूरा हो रहा है। महिलाएं नसबंदी के लिए बढ़-चढ़कर हिस्सेदारी कर रहीं हैं। अप्रैल 2020 से जून 2021 तक नसबंदी कराने में जहां पुरुषों की संख्या 12 है, वहीं इस दौरान 4307 महिलाओं ने नसबंदी को अपनाया है। महिलाओं ने नसबंदी में दिलचस्पी दिखाने के साथ ही अन्य संसाधनों को अपनाने में भी पुरुषों को पछाड़ दिया है। महिलाओं ने परिवार नियोजन संबंधी अन्य साधनों का भी सहारा लिया है।
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नसबंदी कराने वालों दी जाती है प्रोत्साहन राशि
नसबंदी कराने वालों को प्रदेश सरकार की तरफ से प्रोत्साहन राशि दी जाती है। इसके तहत पुरुष को तीन हजार और महिला को दो हजार रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाती है।
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नसबंदी को लेकर न पालें वहम
पुरुषों में नसबंदी के बाद बीमारी होने, कमजोर होने का भ्रम होता है। इस भ्रम से दूर रहें। पुरुष नसबंदी में कोई चीरा या टांका नहीं लगता। नसबंदी के आधे घंटे बाद व्यक्ति घर जा सकता है। नसबंदी के 48 घंटे बाद व्यक्ति सामान्य हो जाता है।
नसबंदी से किसी तरह की परेशानी नहीं होती है। पुरुष नसबंदी के प्रति कम जागरूक हैं। उनमें कई तरह का भ्रम भी है। इसे दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि नसबंदी के लिए आगे आएं। परिवार नियोजन को लेकर महिलाएं अधिक जागरूक हैं। वे नसबंदी तथा परिवार नियोजन के अन्य संसाधनों को अपना रही हैं। नसबंदी कराने पर महिलाओं से अधिक प्रोत्साहन राशि पुरुषों को दी जाती है। उन्होंने पुरुषों से अपील करते हुए कहा कि वे नसबंदी को अपनाएं।
डॉ. एसके चौधरी, एसीएमओ, आरसीएच
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संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। जिले में नसबंदी के प्रति पुरुषों का रुझान कम है। चौदह माह में मात्र बारह पुरुषों ने नसबंदी को अपनाया। वहीं 4307 महिलाओं ने नसबंदी कराई।
सरकार का परिवार नियोजन पर जोर है। जनपद में स्वास्थ्य विभाग निर्धारित लक्ष्य को हासिल करने के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रहा है। इसके मद्देनजर स्वास्थ्य विभाग की ओर से जागरूकता कार्यक्रम चलाकर पुरुष नसबंदी का संदेश दिया जा रहा है, लेकिन पुरुष इसे लेकर गंभीर नहीं दिख रहे हैं।
उधर जनपद में परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत निर्धारित लक्ष्य महिलाओं के दम पर पूरा हो रहा है। महिलाएं नसबंदी के लिए बढ़-चढ़कर हिस्सेदारी कर रहीं हैं। अप्रैल 2020 से जून 2021 तक नसबंदी कराने में जहां पुरुषों की संख्या 12 है, वहीं इस दौरान 4307 महिलाओं ने नसबंदी को अपनाया है। महिलाओं ने नसबंदी में दिलचस्पी दिखाने के साथ ही अन्य संसाधनों को अपनाने में भी पुरुषों को पछाड़ दिया है। महिलाओं ने परिवार नियोजन संबंधी अन्य साधनों का भी सहारा लिया है।
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नसबंदी कराने वालों दी जाती है प्रोत्साहन राशि
नसबंदी कराने वालों को प्रदेश सरकार की तरफ से प्रोत्साहन राशि दी जाती है। इसके तहत पुरुष को तीन हजार और महिला को दो हजार रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाती है।
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नसबंदी को लेकर न पालें वहम
पुरुषों में नसबंदी के बाद बीमारी होने, कमजोर होने का भ्रम होता है। इस भ्रम से दूर रहें। पुरुष नसबंदी में कोई चीरा या टांका नहीं लगता। नसबंदी के आधे घंटे बाद व्यक्ति घर जा सकता है। नसबंदी के 48 घंटे बाद व्यक्ति सामान्य हो जाता है।
नसबंदी से किसी तरह की परेशानी नहीं होती है। पुरुष नसबंदी के प्रति कम जागरूक हैं। उनमें कई तरह का भ्रम भी है। इसे दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि नसबंदी के लिए आगे आएं। परिवार नियोजन को लेकर महिलाएं अधिक जागरूक हैं। वे नसबंदी तथा परिवार नियोजन के अन्य संसाधनों को अपना रही हैं। नसबंदी कराने पर महिलाओं से अधिक प्रोत्साहन राशि पुरुषों को दी जाती है। उन्होंने पुरुषों से अपील करते हुए कहा कि वे नसबंदी को अपनाएं।
डॉ. एसके चौधरी, एसीएमओ, आरसीएच