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Deoria News: दूध व पनीर में मिलावट खोआ भी नहीं मिला शुद्ध
Fri, 30 Oct 2026 11:48 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Fri, 30 Oct 2026 11:48 PM IST
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देवरिया। जिले में दूध, पनीर और खोआ की शुद्धता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। खाद्य पदार्थों में मिलावट का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की ओर से लिए गए 116 नमूनों में से 60 जांच में फेल हो गए।
जांच रिपोर्ट में इन नमूनों के मानक के अनुरूप नहीं पाए जाने से मिलावटखोरी की आशंका सामने आई है। खासकर दूध और उससे तैयार होने वाले उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ गई है। त्योहारों के मौसम में इन खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने के साथ ही मिलावट का खतरा भी बढ़ जाता है।
खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से समय-समय पर दुकानों, प्रतिष्ठानों और खाद्य पदार्थों की बिक्री करने वाले स्थानों से नमूने लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे जाते हैं।
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इस प्रक्रिया का उद्देश्य बाजार में बिकने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और शुद्धता सुनिश्चित करना है। विभाग की ओर से लिए गए 116 नमूनों में 60 के फेल होने का आंकड़ा बताता है कि बाजार में मानकों के विपरीत खाद्य पदार्थों की बिक्री पर प्रभावी नियंत्रण की जरूरत है।
दूध, पनीर और खोआ जैसे खाद्य पदार्थ सीधे लोगों के खानपान का हिस्सा हैं। ऐसे में इनकी गुणवत्ता से समझौता उपभोक्ताओं की सेहत पर भारी पड़ सकता है। दूध में पानी, स्टार्च, डिटर्जेंट या अन्य पदार्थों की मिलावट की शिकायतें अक्सर सामने आती हैं। पनीर और खोआ तैयार करने में भी गुणवत्ता से समझौता कर मिलावट की जाती है।
इससे न सिर्फ उपभोक्ताओं को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है, बल्कि उनकी सेहत पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए मिलावटी खाद्य पदार्थ विशेष रूप से नुकसानदायक साबित हो सकते हैं।ं
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जांच रिपोर्ट में इन नमूनों के मानक के अनुरूप नहीं पाए जाने से मिलावटखोरी की आशंका सामने आई है। खासकर दूध और उससे तैयार होने वाले उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ गई है। त्योहारों के मौसम में इन खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने के साथ ही मिलावट का खतरा भी बढ़ जाता है।
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खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से समय-समय पर दुकानों, प्रतिष्ठानों और खाद्य पदार्थों की बिक्री करने वाले स्थानों से नमूने लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे जाते हैं।
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इस प्रक्रिया का उद्देश्य बाजार में बिकने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और शुद्धता सुनिश्चित करना है। विभाग की ओर से लिए गए 116 नमूनों में 60 के फेल होने का आंकड़ा बताता है कि बाजार में मानकों के विपरीत खाद्य पदार्थों की बिक्री पर प्रभावी नियंत्रण की जरूरत है।
दूध, पनीर और खोआ जैसे खाद्य पदार्थ सीधे लोगों के खानपान का हिस्सा हैं। ऐसे में इनकी गुणवत्ता से समझौता उपभोक्ताओं की सेहत पर भारी पड़ सकता है। दूध में पानी, स्टार्च, डिटर्जेंट या अन्य पदार्थों की मिलावट की शिकायतें अक्सर सामने आती हैं। पनीर और खोआ तैयार करने में भी गुणवत्ता से समझौता कर मिलावट की जाती है।
इससे न सिर्फ उपभोक्ताओं को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है, बल्कि उनकी सेहत पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए मिलावटी खाद्य पदार्थ विशेष रूप से नुकसानदायक साबित हो सकते हैं।ं