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Deoria News: साइबर ठगी का मास्टरमाइंड ढाई महीने बाद भी पकड़ से दूर
Fri, 30 Oct 2026 12:36 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Fri, 30 Oct 2026 12:36 AM IST
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देवरिया। गौरी बाजार थाना क्षेत्र में म्यूल बैंक खातों के जरिये साइबर ठगी की रकम क्रिप्टोकरेंसी में बदलने वाले गिरोह का पर्दाफाश हुए करीब ढाई महीने बीत चुके हैं।
पुलिस ने अगस्त में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था मगर गिरोह के मास्टरमाइंड और अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी की मौजूदा स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। बिहार के पटना से जुड़े आरोपी अभिषेक का नाम भी जांच में सामने आया था। गौरी बाजार पुलिस ने छह अगस्त को साइबर ठगी के गिरोह का पर्दाफाश किया था। इस मामले में 24 लोगों पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पुलिस ने पवन वर्मा, शुभम सिंह, सैफ अंसारी और रोशन वर्मा को गिरफ्तार कर लिया था। आरोपियों के पास से 52 हजार रुपये नकद, सिम कार्ड, पीओएस मशीन, आधार कार्ड, बैंक की मुहर और एटीएम कार्ड बरामद हुए थे।
जांच में सामने आया था कि गिरोह म्यूल खातों में साइबर ठगी की रकम मंगाकर बाइनेंस, टीजी एक्सचेंज और आईपे जैसे प्लेटफॉर्म के जरिये डिजिटल करेंसी की खरीद-फरोख्त करता था।
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रुपये के लेनदेन के विवाद की जांच के दौरान गिरोह का पर्दाफाश हुआ था। शुरुआती जांच में बरपार निवासी इसराफिल को भी गिरोह का मास्टरमाइंड बताया गया था।
पुलिस ने अन्य आरोपियों की तलाश और बैंक खातों के लेनदेन की जांच शुरू की थी। हालांकि, अभी तक कितने आरोपी गिरफ्तार हुए और कितनी रकम का पता चला, इसकी ताजा आधिकारिक जानकारी नहीं मिल सकी है।
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पुलिस ने अगस्त में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था मगर गिरोह के मास्टरमाइंड और अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी की मौजूदा स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। बिहार के पटना से जुड़े आरोपी अभिषेक का नाम भी जांच में सामने आया था। गौरी बाजार पुलिस ने छह अगस्त को साइबर ठगी के गिरोह का पर्दाफाश किया था। इस मामले में 24 लोगों पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पुलिस ने पवन वर्मा, शुभम सिंह, सैफ अंसारी और रोशन वर्मा को गिरफ्तार कर लिया था। आरोपियों के पास से 52 हजार रुपये नकद, सिम कार्ड, पीओएस मशीन, आधार कार्ड, बैंक की मुहर और एटीएम कार्ड बरामद हुए थे।
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जांच में सामने आया था कि गिरोह म्यूल खातों में साइबर ठगी की रकम मंगाकर बाइनेंस, टीजी एक्सचेंज और आईपे जैसे प्लेटफॉर्म के जरिये डिजिटल करेंसी की खरीद-फरोख्त करता था।
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रुपये के लेनदेन के विवाद की जांच के दौरान गिरोह का पर्दाफाश हुआ था। शुरुआती जांच में बरपार निवासी इसराफिल को भी गिरोह का मास्टरमाइंड बताया गया था।
पुलिस ने अन्य आरोपियों की तलाश और बैंक खातों के लेनदेन की जांच शुरू की थी। हालांकि, अभी तक कितने आरोपी गिरफ्तार हुए और कितनी रकम का पता चला, इसकी ताजा आधिकारिक जानकारी नहीं मिल सकी है।