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अंजान बना ‘मुक्तिदाता’ तो सुलगी चंदे की चिता
देवरिया
Updated Fri, 08 Jul 2016 11:19 PM IST
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मईल। तीन दिन से डायरिया से जूझ रही मजदूर की बेटी इलाज के अभाव में जिंदगी की जंग हार गई। बेटी की मौत के बाद मजदूर के पास अंत्येष्टि की खातिर भी धन नहीं था।
ऐसे में आठ घंटे तक लाश झोपड़ी में ही पड़ी रही। जानकारी लोगों को हुई तो चंदा लगाकर युवती के अंतिम संस्कार की तैयारी हुई। चंदे से चिता बनकर तैयार हुई। मगर मुखाग्नि देने पहुंचा पिता चिता के पास ही बेहोश हो गया। लोग पशोपेश में फंस गए कि अब दाह कैसे होगा, तभी अंजान शंभू भगवान बनकर आया और चिता सुलग उठी। अंजान युवक ने युवती को मुखाग्नि देकर मानवता का मिसाल पेश की।
पूरे दिन कस्बे में युवक की तारीफ का सिलसिला चलता रहा। भागलपुर के राजीव नगर चौराहा पर शिवबचन सड़क के किनारे झोपड़ी डालकर अपनी छोटी बेटी फूला कुमारी 19 के साथ रहता है। उसकी पत्नी की कुछ वर्ष पूर्व बीमारी से मौत हो गई। तेलिया कला चौराहा पर मोची का काम कर अपना और अपनी बेटी का पेट पालता है।
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चार बेटियाें में से तीन की शादी कर चुका है। छोटी बेटी को तीन दिन पूर्व डायरिया हुआ तो एक प्राइवेट डॉक्टर से दवा ली। लेकिन कोई राहत नहीं मिली। आर्थिक कमजोरी के कारण बीमार युवती को बेहतर इलाज नहीं मिला। तीन दिन तक बीमारी से जूझी युवती की गुरुवार की रात मौत हो गई। सुबह इसकी जानकारी शिवबचन को हुई।
लेकिन रकम नहीं होने के कारण झोपड़ी में लाश सुबह 11 बजे तक झोपड़ी पड़ी थी। इसकी जानकारी जब चौराहा के दुकानदारों और एकौना गांव के प्रधान शैलेष प्रसाद को हुई तो लोगों ने मानवता का परिचय देते हुए चंदा जुटाकर अंतिम संस्कार के लिए युवती की लाश टेंपो से लेकर भागलपुर पहुंचे। इसमें मईल गांव निवासी मजदूर शंभू प्रसाद भी शामिल था। घाट पर बेटी की लाश देख पहले से बीमार चल रहा पिता अचेत हो गया।
लोगों ने उसे भागलपुर पीएचसी पर भर्ती कराया। युवती का मुखाग्नि देने को लेकर लोग परेेशान हो गए। इस पर शंभू प्रसाद आगे आया और मुखाग्नि दी। लोगों ने तहसील प्रशासन से मजदूर के परिवार को आर्थिक सहायता देने की मांग की है।
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ऐसे में आठ घंटे तक लाश झोपड़ी में ही पड़ी रही। जानकारी लोगों को हुई तो चंदा लगाकर युवती के अंतिम संस्कार की तैयारी हुई। चंदे से चिता बनकर तैयार हुई। मगर मुखाग्नि देने पहुंचा पिता चिता के पास ही बेहोश हो गया। लोग पशोपेश में फंस गए कि अब दाह कैसे होगा, तभी अंजान शंभू भगवान बनकर आया और चिता सुलग उठी। अंजान युवक ने युवती को मुखाग्नि देकर मानवता का मिसाल पेश की।
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पूरे दिन कस्बे में युवक की तारीफ का सिलसिला चलता रहा। भागलपुर के राजीव नगर चौराहा पर शिवबचन सड़क के किनारे झोपड़ी डालकर अपनी छोटी बेटी फूला कुमारी 19 के साथ रहता है। उसकी पत्नी की कुछ वर्ष पूर्व बीमारी से मौत हो गई। तेलिया कला चौराहा पर मोची का काम कर अपना और अपनी बेटी का पेट पालता है।
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चार बेटियाें में से तीन की शादी कर चुका है। छोटी बेटी को तीन दिन पूर्व डायरिया हुआ तो एक प्राइवेट डॉक्टर से दवा ली। लेकिन कोई राहत नहीं मिली। आर्थिक कमजोरी के कारण बीमार युवती को बेहतर इलाज नहीं मिला। तीन दिन तक बीमारी से जूझी युवती की गुरुवार की रात मौत हो गई। सुबह इसकी जानकारी शिवबचन को हुई।
लेकिन रकम नहीं होने के कारण झोपड़ी में लाश सुबह 11 बजे तक झोपड़ी पड़ी थी। इसकी जानकारी जब चौराहा के दुकानदारों और एकौना गांव के प्रधान शैलेष प्रसाद को हुई तो लोगों ने मानवता का परिचय देते हुए चंदा जुटाकर अंतिम संस्कार के लिए युवती की लाश टेंपो से लेकर भागलपुर पहुंचे। इसमें मईल गांव निवासी मजदूर शंभू प्रसाद भी शामिल था। घाट पर बेटी की लाश देख पहले से बीमार चल रहा पिता अचेत हो गया।
लोगों ने उसे भागलपुर पीएचसी पर भर्ती कराया। युवती का मुखाग्नि देने को लेकर लोग परेेशान हो गए। इस पर शंभू प्रसाद आगे आया और मुखाग्नि दी। लोगों ने तहसील प्रशासन से मजदूर के परिवार को आर्थिक सहायता देने की मांग की है।