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जांच के दायरे में आ सकते हैं दस सालों में तैनात रहे वित्त व लेखाधिकारी
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जांच के दायरे में आ सकते हैं दस सालों में तैनात रहे वित्त व लेखाधिकारी
फर्जी शिक्षक भर्ती प्रकरण : अपर निदेशक कोषागार बोले, जांच में हेरफेर की बात सामने आई है
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। जिले के दो अनुदानित स्कूलों में फर्जी शिक्षक भर्ती प्रकरण की जांच के दायरे में पिछले दस वर्षों में बीएसए कार्यालय में तैनात रहे वित्त व लेखाधिकारी भी आ सकते हैं। इस मामले में पूर्व वित्त व लेखाधिकारी समेत 17 लोगों पर मुकदमा दर्ज है। निवर्तमान वित्त व लेखाधिकारी जेल में हैं। सूत्रों की माने तो इन स्कूलों के प्रबंधकों व बेसिक शिक्षा कार्यालय और लेखा अनुभाग के अधिकारियों की मिलीभगत की भी बात सामने आने के बाद शासन के तेवर इस मामले में तल्ख हैं। कुछ लोगों पर गाज भी गिर सकती है।
बेसिक में वर्तमान में 72 अनुदानित स्कूलों का संचालन किया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो स्कूलों के प्रबंधकों ने अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत से निर्धारित पदों से अधिक संख्या दिखाकर भर्ती कर लिया। गौरीबाजार के मदरसन स्थित कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय एवं सहदेव लघु माध्यमिक विद्यालय बाबू बभनी में फर्जी शिक्षकों की नियुक्ति के मामले में पूर्व लेखाधिकारी के एसटीएफ की पकड़ में आने और उनके पास से वर्ष 2010-11 का डिस्पैच रजिस्टर भी बरामद होने के बाद मामले में नया मोड़ आ गया है। डिस्पैच रजिस्टर मिलने के बाद कइयों को अब अपना गला फंसते नजर आ रहा है।
शासन की ओर से नामित जांच अधिकारी अपर निदेशक कोषागार हरिशंकर मिश्र ने 26 और 27 अक्तूबर को लेखानुभाग में आकर दो अनुदानित विद्यालयों में की गई फर्जी नियुक्तियों एवं वित्तीय मामले की पड़ताल की। इन विद्यालयों से जुड़ी फाइलों एवं रिकार्डों को ढूंढने में कर्मचारियों को पसीना आ गया। अपर निदेशक कोषागार ने बताया कि उन्होंने अपनी जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी है। बड़े पैमाने पर यहां हेरफेर की बात सामने आई। कई रिकार्डों तो कार्यालय से ही गायब कर दिए गए हैं। पूर्व में बीएसए कार्यालय में तैनात रहे वित्त एवं लेखाधिकारियों की भूमिका होने से इन्कार नहीं किया जा सकता है। सूत्रों की मानें तो पिछले दस वर्षों में तैनात रहे वित्त एवं लेखाधिकारी जांच के दायरे में आ सकते हैं।
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जांच के दायरे में आ सकते हैं ये पूर्व वित्त व लेखाधिकारी
जयमंगल राव 24 जनवरी 2009 से 15 सितंबर 2010, उमाशंकर यादव 15 सितंबर 2010 से 20 अक्तूबर 2010, जगतनारायण झा 20 अक्तूबर 2010 से 24 दिसंबर 2011, दुर्गेश त्रिपाठी 01 अगस्त 2012 से 08 फरवरी 2016, रईस अहमद 08 फरवरी 2016 से 06 जुलाई 2017, जगदीश लाल श्रीवास्तव 06 जुलाई 2016 से अब तक।
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फर्जी शिक्षक भर्ती प्रकरण : अपर निदेशक कोषागार बोले, जांच में हेरफेर की बात सामने आई है
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। जिले के दो अनुदानित स्कूलों में फर्जी शिक्षक भर्ती प्रकरण की जांच के दायरे में पिछले दस वर्षों में बीएसए कार्यालय में तैनात रहे वित्त व लेखाधिकारी भी आ सकते हैं। इस मामले में पूर्व वित्त व लेखाधिकारी समेत 17 लोगों पर मुकदमा दर्ज है। निवर्तमान वित्त व लेखाधिकारी जेल में हैं। सूत्रों की माने तो इन स्कूलों के प्रबंधकों व बेसिक शिक्षा कार्यालय और लेखा अनुभाग के अधिकारियों की मिलीभगत की भी बात सामने आने के बाद शासन के तेवर इस मामले में तल्ख हैं। कुछ लोगों पर गाज भी गिर सकती है।
बेसिक में वर्तमान में 72 अनुदानित स्कूलों का संचालन किया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो स्कूलों के प्रबंधकों ने अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत से निर्धारित पदों से अधिक संख्या दिखाकर भर्ती कर लिया। गौरीबाजार के मदरसन स्थित कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय एवं सहदेव लघु माध्यमिक विद्यालय बाबू बभनी में फर्जी शिक्षकों की नियुक्ति के मामले में पूर्व लेखाधिकारी के एसटीएफ की पकड़ में आने और उनके पास से वर्ष 2010-11 का डिस्पैच रजिस्टर भी बरामद होने के बाद मामले में नया मोड़ आ गया है। डिस्पैच रजिस्टर मिलने के बाद कइयों को अब अपना गला फंसते नजर आ रहा है।
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शासन की ओर से नामित जांच अधिकारी अपर निदेशक कोषागार हरिशंकर मिश्र ने 26 और 27 अक्तूबर को लेखानुभाग में आकर दो अनुदानित विद्यालयों में की गई फर्जी नियुक्तियों एवं वित्तीय मामले की पड़ताल की। इन विद्यालयों से जुड़ी फाइलों एवं रिकार्डों को ढूंढने में कर्मचारियों को पसीना आ गया। अपर निदेशक कोषागार ने बताया कि उन्होंने अपनी जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी है। बड़े पैमाने पर यहां हेरफेर की बात सामने आई। कई रिकार्डों तो कार्यालय से ही गायब कर दिए गए हैं। पूर्व में बीएसए कार्यालय में तैनात रहे वित्त एवं लेखाधिकारियों की भूमिका होने से इन्कार नहीं किया जा सकता है। सूत्रों की मानें तो पिछले दस वर्षों में तैनात रहे वित्त एवं लेखाधिकारी जांच के दायरे में आ सकते हैं।
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जांच के दायरे में आ सकते हैं ये पूर्व वित्त व लेखाधिकारी
जयमंगल राव 24 जनवरी 2009 से 15 सितंबर 2010, उमाशंकर यादव 15 सितंबर 2010 से 20 अक्तूबर 2010, जगतनारायण झा 20 अक्तूबर 2010 से 24 दिसंबर 2011, दुर्गेश त्रिपाठी 01 अगस्त 2012 से 08 फरवरी 2016, रईस अहमद 08 फरवरी 2016 से 06 जुलाई 2017, जगदीश लाल श्रीवास्तव 06 जुलाई 2016 से अब तक।