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सात साल से कम की सजा पर आरोपी की गिरफ्तारी करने पर विवेचक के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश : न्यायालय
Tue, 16 May 2023 11:42 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Tue, 16 May 2023 11:42 PM IST
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आरोपी को 50 हजार के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। सात साल से कम सजा होने के बाद भी आरोपी को गिरफ्तार करने पर एफटीसी 2 जूनियर डिवीजन सक्षम शेखर के न्यायालय ने मंगलवार को एसपी को पत्र लिखकर विवेचक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई कर न्यायालय में रिपोर्ट देने को कहा है। सुरौली थाने के उपनिरीक्षक बदरुद्दीन ने अपहरण के मामले में श्रवण उर्फ सरवन को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया। विवेचना की कार्रवाई 24 घंटे में पूरी न होने पर 14 दिन की रिमांड की मांग की। मजिस्ट्रेट ने केस डायरी व गिरफ्तारी प्रपत्र को देखा तो पाया कि जिन मामलों में सात वर्ष से कम सजा है तो सीआरपीसी की धारा 41 के तहत प्रक्रिया का पालन न करने के कारण विवेचक के रिमांड प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया। साथ ही आरोपी को 50 हजार के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया। विवेचक बदरुद्दीन ने धारा 363 आईपीसी में युवक श्रवण कुमार को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया था।
मजिस्ट्रेट ने पाया कि विवेचक ने न तो केस डायरी में गिरफ्तारी के कारणों का अंकन किया है और न ही सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए दिशा निर्देश का अनुपालन किया है। विवेचक ने कानून के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए विभागीय निर्देशों का भी अनुपालन नहीं किया है। इसके लिए वह दोषी है। अदालत ने पाया कि जहां किसी व्यक्ति के मौलिक अधिकारों के हनन अथवा विधि विरुद्ध निरुद्धीकरण का मामला उत्पन्न होता है, वहां संरक्षण का दायित्व मजिस्ट्रेट का है। ऐसे में विवेचक बदरुद्दीन के विरुद्ध अवमानना की कार्रवाई अमल में लाए जाने तथा उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई किए जाने के लिए पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखा है। साथ ही आख्या पेश करने को कहा है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। सात साल से कम सजा होने के बाद भी आरोपी को गिरफ्तार करने पर एफटीसी 2 जूनियर डिवीजन सक्षम शेखर के न्यायालय ने मंगलवार को एसपी को पत्र लिखकर विवेचक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई कर न्यायालय में रिपोर्ट देने को कहा है। सुरौली थाने के उपनिरीक्षक बदरुद्दीन ने अपहरण के मामले में श्रवण उर्फ सरवन को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया। विवेचना की कार्रवाई 24 घंटे में पूरी न होने पर 14 दिन की रिमांड की मांग की। मजिस्ट्रेट ने केस डायरी व गिरफ्तारी प्रपत्र को देखा तो पाया कि जिन मामलों में सात वर्ष से कम सजा है तो सीआरपीसी की धारा 41 के तहत प्रक्रिया का पालन न करने के कारण विवेचक के रिमांड प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया। साथ ही आरोपी को 50 हजार के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया। विवेचक बदरुद्दीन ने धारा 363 आईपीसी में युवक श्रवण कुमार को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया था।
मजिस्ट्रेट ने पाया कि विवेचक ने न तो केस डायरी में गिरफ्तारी के कारणों का अंकन किया है और न ही सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए दिशा निर्देश का अनुपालन किया है। विवेचक ने कानून के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए विभागीय निर्देशों का भी अनुपालन नहीं किया है। इसके लिए वह दोषी है। अदालत ने पाया कि जहां किसी व्यक्ति के मौलिक अधिकारों के हनन अथवा विधि विरुद्ध निरुद्धीकरण का मामला उत्पन्न होता है, वहां संरक्षण का दायित्व मजिस्ट्रेट का है। ऐसे में विवेचक बदरुद्दीन के विरुद्ध अवमानना की कार्रवाई अमल में लाए जाने तथा उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई किए जाने के लिए पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखा है। साथ ही आख्या पेश करने को कहा है।
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