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Deoria News: फर्जी शिक्षक को भेजा गया जेल
Wed, 07 Feb 2024 01:15 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Wed, 07 Feb 2024 01:15 AM IST
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फोटो समाचार...
एसटीएफ ने फर्जी शिक्षक को विद्यालय से किया था गिरफ्तार
खुखुंदू थाना क्षेत्र के रार बड़ी निवासी धर्मेंद्र कुमार वीरपुर मिश्र कंपोजिट विद्यालय में 20 सालों से फर्जी दस्तावेज पर कर रहा था नौकरी
संवाद न्यूज एजेंसी
खुखुंदू। फर्जी शिक्षक धर्मेंद्र कुमार को दर्ज केस के तहत स्थानीय पुलिस ने मंगलवार को न्यायालय में पेश किया। जहां से न्यायिक अभिरक्षा में शिक्षक को जेल भेज दिया गया। सोमवार को एसटीएफ ने कंपोजिट विद्यालय वीरपुर मिश्र से फर्जी शिक्षक को गिरफ्तार कर केस दर्ज कराया था। फर्जी शिक्षक धर्मेंद्र कुमार 20 सालों से फर्जी दस्तावेज के आधार पर नौकरी कर रहा था। गिरफ्तारी के बाद विभाग ने भी उसे निलंबित कर दिया था।
खुखुंदू थाना क्षेत्र के रार बड़ी निवासी धर्मेंद्र कुमार का संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी से शास्त्री परीक्षा का अंकपत्र व प्रमाणपत्र कूट रचना कर फर्जी तरीके से बनाया गया था। इसे अपने हिसाब से अनुक्रमांक 18366 अंकित कर दिया था। साथ ही इंटरमीडिएट का अंकपत्र और प्रमाणपत्र भी कूटरचित तरीके से बनाया था। इसी के आधार पर धर्मेंद्र कुमार वर्ष 2003 से नौकरी कर रहा था।
एसटीएफ इंस्पेक्टर सत्यप्रकाश सिंह ने बताया कि बेसिक शिक्षा कार्यालय में धर्मेंद्र कुमार सहायक शिक्षक के बारे में जानकारियां जुटाईं गई थीं। अभिलेखों का अवलोकन किया गया तो पता चला कि धर्मेंद्र कुमार 20 सालों से वीरपुर मिश्र कंपोजिट विद्यालय में कूटरचित तरीके से फर्जी दस्तावेजों के सहारे नौकरी करते पाया गया।
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सोमवार दोपहर बाद फर्जी शिक्षक धर्मेंद्र कुमार की विद्यालय से गिरफ्तारी की गई थी। फर्जी शिक्षक के विरुद्ध खुखुंदू थाने में संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया गया है। दर्ज केस के आधार पर मंगलवार को फर्जी शिक्षक धर्मेंद्र कुमार न्यायालय में पेश किया गया। जहां से न्यायिक अभिरक्षा में उसे जेल भेज दिया गया।
सीओ सलेमपुर दीपक शुक्ला ने बताया कि फर्जी शिक्षक को दर्ज केस के तहत जेल भेज दिया गया। केस की विवेचना इंस्पेक्टर खुखुंदू दिलीप सिंह करेंगे।
75 शिक्षक हो चुके हैं बर्खास्त, पांच साल में एक से भी रिकवरी नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी करने वाले शिक्षकों के खिलाफ जनपद में पिछले पांच सालों के अंदर बड़ी कार्रवाई हुई है। 75 से अधिक शिक्षकों को सेवा से बाहर का रास्ता दिखाया जा चुका है। हालांकि, अब तक विभाग किसी के वेतन की रिकवरी नहीं कर पाया है।
शिक्षक भर्ती फर्जीवाड़े को लेकर जिला शासन की रडार पर रहा रहा है। बड़े पैमाने पर यहां पूर्व में तैनात रहे बीएसए और कर्मचारियों की मिलीभगत से कूटरचित प्रमाणपत्रों के आधार पर नौकरियां दी गई हैं। सरकार जब इस पर सख्त हुई और मामला जब एसटीएफ को सौंपा गया तो जिले में जमकर किया गया फर्जीवाड़ा सामने आया। एसटीएफ की जांच में अलग-अलग थाना क्षेत्रों में तैनात शिक्षकों के प्रमाणपत्र कूटरचित ढंग से तैयार किए गए पाए गए। पिछले पांच सालों के एसटीएफ की जांच एवं विभागीय सत्यापन में 75 से अधिक शिक्षकों को बर्खास्त किया जा चुका है। इनके विरुद्ध बीईओ की ओर से जिले के अलग-अलग थानों में केस दर्ज कराया गया है।
इनमें से कुछ जमानत पर बाहर आ गए हैं तो कुछ ने हाईकोर्ट में बर्खास्तगी के खिलाफ याचिका दायर कर रखी है। ऐसे शिक्षकों को विभाग की ओर से वेतन के मद में 30 करोड़ से अधिक का भुगतान किया गया है। पिछले वर्ष विभाग ने जिले के अलग-अलग तहसील क्षेत्रों के 48 शिक्षकों से वेतन की वसूली के लिए पत्राचार किया था। इसके बाद भी बर्खास्त शिक्षकों ने पैसा वापस नहीं किया। पिछले माह बेसिक शिक्षा कार्यालय की ओर से इनके खिलाफ आरसी जारी की गई है। सभी शिक्षकों की सूची उनके तहसील में भेजा गई है।
अन्य जिलों में भी मिले थे जिले के फर्जी शिक्षक
पिछले पांच वर्ष के अंदर प्रदेश के विभिन्न जिलों में फर्जी शिक्षकों को बर्खास्त किया गया है। इनमें भी जिले के निवासी शिक्षक अधिक मिले थे। सिद्धार्थनगर जनपद में इनकी संख्या सर्वाधिक रही थी। भाटपाररानी निवासी एक फर्जी शिक्षक ने खुद के अलावा यहां के कई शिक्षकों की नियुक्ति अन्य जिलों में कराई थी। एसटीएफ ने उसे गिरफ्तार भी किया था।
कोट
एसटीएफ ने भलुअनी क्षेत्र के एक शिक्षक को उठाया है। उसे विभाग ने निलंबित कर दिया है। इसी क्षेत्र के एक और शिक्षक को संदिग्ध पाए जाने पर सोमवार को निलंबित कर दिया गया था। दोनों के खिलाफ विभागीय स्तर पर भी जांच जारी है। जिले में जो भी संदिग्ध शिक्षक हैं। शिकायत के बाद जांच प्रक्रिया जारी है। संबंधित बोर्ड व विश्वविद्यालय से इनके प्रमाणपत्रों का सत्यापन भी कराया जा रहा है। जो शिक्षक बर्खास्त किए जा चुके हैं, उनके विरुद्ध संबंधित थानों में केस भी दर्ज कराया गया है। मुकदमा दर्ज कराने के बाद वेतन मद के रुपये के लिए इनसे पत्राचार भी किया गया था। भुगतान नहीं किए जाने पर जनवरी माह में 48 के खिलाफ आरसी जारी हुई थी।
-शालिनी श्रीवास्तव, बीएसए
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एसटीएफ ने फर्जी शिक्षक को विद्यालय से किया था गिरफ्तार
खुखुंदू थाना क्षेत्र के रार बड़ी निवासी धर्मेंद्र कुमार वीरपुर मिश्र कंपोजिट विद्यालय में 20 सालों से फर्जी दस्तावेज पर कर रहा था नौकरी
संवाद न्यूज एजेंसी
खुखुंदू। फर्जी शिक्षक धर्मेंद्र कुमार को दर्ज केस के तहत स्थानीय पुलिस ने मंगलवार को न्यायालय में पेश किया। जहां से न्यायिक अभिरक्षा में शिक्षक को जेल भेज दिया गया। सोमवार को एसटीएफ ने कंपोजिट विद्यालय वीरपुर मिश्र से फर्जी शिक्षक को गिरफ्तार कर केस दर्ज कराया था। फर्जी शिक्षक धर्मेंद्र कुमार 20 सालों से फर्जी दस्तावेज के आधार पर नौकरी कर रहा था। गिरफ्तारी के बाद विभाग ने भी उसे निलंबित कर दिया था।
खुखुंदू थाना क्षेत्र के रार बड़ी निवासी धर्मेंद्र कुमार का संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी से शास्त्री परीक्षा का अंकपत्र व प्रमाणपत्र कूट रचना कर फर्जी तरीके से बनाया गया था। इसे अपने हिसाब से अनुक्रमांक 18366 अंकित कर दिया था। साथ ही इंटरमीडिएट का अंकपत्र और प्रमाणपत्र भी कूटरचित तरीके से बनाया था। इसी के आधार पर धर्मेंद्र कुमार वर्ष 2003 से नौकरी कर रहा था।
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एसटीएफ इंस्पेक्टर सत्यप्रकाश सिंह ने बताया कि बेसिक शिक्षा कार्यालय में धर्मेंद्र कुमार सहायक शिक्षक के बारे में जानकारियां जुटाईं गई थीं। अभिलेखों का अवलोकन किया गया तो पता चला कि धर्मेंद्र कुमार 20 सालों से वीरपुर मिश्र कंपोजिट विद्यालय में कूटरचित तरीके से फर्जी दस्तावेजों के सहारे नौकरी करते पाया गया।
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सोमवार दोपहर बाद फर्जी शिक्षक धर्मेंद्र कुमार की विद्यालय से गिरफ्तारी की गई थी। फर्जी शिक्षक के विरुद्ध खुखुंदू थाने में संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया गया है। दर्ज केस के आधार पर मंगलवार को फर्जी शिक्षक धर्मेंद्र कुमार न्यायालय में पेश किया गया। जहां से न्यायिक अभिरक्षा में उसे जेल भेज दिया गया।
सीओ सलेमपुर दीपक शुक्ला ने बताया कि फर्जी शिक्षक को दर्ज केस के तहत जेल भेज दिया गया। केस की विवेचना इंस्पेक्टर खुखुंदू दिलीप सिंह करेंगे।
75 शिक्षक हो चुके हैं बर्खास्त, पांच साल में एक से भी रिकवरी नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी करने वाले शिक्षकों के खिलाफ जनपद में पिछले पांच सालों के अंदर बड़ी कार्रवाई हुई है। 75 से अधिक शिक्षकों को सेवा से बाहर का रास्ता दिखाया जा चुका है। हालांकि, अब तक विभाग किसी के वेतन की रिकवरी नहीं कर पाया है।
शिक्षक भर्ती फर्जीवाड़े को लेकर जिला शासन की रडार पर रहा रहा है। बड़े पैमाने पर यहां पूर्व में तैनात रहे बीएसए और कर्मचारियों की मिलीभगत से कूटरचित प्रमाणपत्रों के आधार पर नौकरियां दी गई हैं। सरकार जब इस पर सख्त हुई और मामला जब एसटीएफ को सौंपा गया तो जिले में जमकर किया गया फर्जीवाड़ा सामने आया। एसटीएफ की जांच में अलग-अलग थाना क्षेत्रों में तैनात शिक्षकों के प्रमाणपत्र कूटरचित ढंग से तैयार किए गए पाए गए। पिछले पांच सालों के एसटीएफ की जांच एवं विभागीय सत्यापन में 75 से अधिक शिक्षकों को बर्खास्त किया जा चुका है। इनके विरुद्ध बीईओ की ओर से जिले के अलग-अलग थानों में केस दर्ज कराया गया है।
इनमें से कुछ जमानत पर बाहर आ गए हैं तो कुछ ने हाईकोर्ट में बर्खास्तगी के खिलाफ याचिका दायर कर रखी है। ऐसे शिक्षकों को विभाग की ओर से वेतन के मद में 30 करोड़ से अधिक का भुगतान किया गया है। पिछले वर्ष विभाग ने जिले के अलग-अलग तहसील क्षेत्रों के 48 शिक्षकों से वेतन की वसूली के लिए पत्राचार किया था। इसके बाद भी बर्खास्त शिक्षकों ने पैसा वापस नहीं किया। पिछले माह बेसिक शिक्षा कार्यालय की ओर से इनके खिलाफ आरसी जारी की गई है। सभी शिक्षकों की सूची उनके तहसील में भेजा गई है।
अन्य जिलों में भी मिले थे जिले के फर्जी शिक्षक
पिछले पांच वर्ष के अंदर प्रदेश के विभिन्न जिलों में फर्जी शिक्षकों को बर्खास्त किया गया है। इनमें भी जिले के निवासी शिक्षक अधिक मिले थे। सिद्धार्थनगर जनपद में इनकी संख्या सर्वाधिक रही थी। भाटपाररानी निवासी एक फर्जी शिक्षक ने खुद के अलावा यहां के कई शिक्षकों की नियुक्ति अन्य जिलों में कराई थी। एसटीएफ ने उसे गिरफ्तार भी किया था।
कोट
एसटीएफ ने भलुअनी क्षेत्र के एक शिक्षक को उठाया है। उसे विभाग ने निलंबित कर दिया है। इसी क्षेत्र के एक और शिक्षक को संदिग्ध पाए जाने पर सोमवार को निलंबित कर दिया गया था। दोनों के खिलाफ विभागीय स्तर पर भी जांच जारी है। जिले में जो भी संदिग्ध शिक्षक हैं। शिकायत के बाद जांच प्रक्रिया जारी है। संबंधित बोर्ड व विश्वविद्यालय से इनके प्रमाणपत्रों का सत्यापन भी कराया जा रहा है। जो शिक्षक बर्खास्त किए जा चुके हैं, उनके विरुद्ध संबंधित थानों में केस भी दर्ज कराया गया है। मुकदमा दर्ज कराने के बाद वेतन मद के रुपये के लिए इनसे पत्राचार भी किया गया था। भुगतान नहीं किए जाने पर जनवरी माह में 48 के खिलाफ आरसी जारी हुई थी।
-शालिनी श्रीवास्तव, बीएसए