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जेल में ऐसी गुजरी पूर्व IPS की पहली रात: अमिताभ का चश्मा टूटा, रात में टहलने लगते; कभी सोने की कोशिश करते रहे

Fri, 12 Dec 2025 12:07 AM IST
आकाश दुबे अमर उजाला ब्यूरो, देवरिया
अमर उजाला ब्यूरो, देवरिया Published by: आकाश दुबे Updated Fri, 12 Dec 2025 12:07 AM IST
सार

बुधवार को धोखाधड़ी से संबंधित मामले में 13 दिन के न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजे गए अमिताभ रात में करीब एक बजे तक कभी उठकर टहलने लगते थे, कभी लेटकर सोने का प्रयास करते रहे।

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Former IPS officer Amitabh Thakur s first night in jail was spent in restlessness
अमिताभ ठाकुर (फाइल फोटो) - फोटो : AI Generated

विस्तार

इंडस्ट्रियल एस्टेट में प्लॉट खरीद-बिक्री में धोखाधड़ी के आरोपों में घिरे पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर की जिला कारागार में पहली रात बेचैनी में कटी। रात में करीब एक बजे तक वह कभी उठकर कमरे में टहलने लगते तो कभी सोने का प्रयास कर रहे थे। चश्मा टूटने की वजह से उन्हें देखने और कुछ पढ़ने में दिक्कत आ रही थी।

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बुधवार को देर शाम मेडिकल परीक्षण के बाद अमिताभ ठाकुर को देवरिया जिला कारागार भेजा गया। वहां इनके स्वास्थ्य को देखते हुए अस्पताल के एक कमरे में रखने का निर्णय लिया गया। कमरे में जाने के बाद उन्होंने चश्मे के अभाव में देखने में दिक्कत की बात कही। रात में उन्हें भोजन दिया गया। भोजन व दवा खाने के बाद वे काफी देर तक कमरे में ही टहलते रहे। कभी सोने का प्रयास करते रहे तो कभी उठकर टहलने लगते। रात में करीब एक बजे के बाद वह सोए, लेकिन सुबह जल्दी उठ गए। 

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दिन भर होती रही नूतन ठाकुर के आने की चर्चा
बृहस्पतिवार दोपहर में अचानक चर्चा होने लगी कि इस मामले में आरोपी और अमिताभ ठाकुर की पत्नी नूतन ठाकुर भी देवरिया आई हैं और वे सीधे जिला कारागार जाकर पहले पति से मिलेंगी, इसके बाद कोर्ट में जाकर पति की जमानत के लिए अर्जी दाखिल करेंगी। हालांकि शाम पांच बजे तक उनके जिले में आने की कोई जानकारी नहीं थी।

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किराए पर चलती थी संजय सिंह की फैक्टरी...
आद्यौगिक क्षेत्र के जिस बी-2 नंबर के प्लॉट को नूतन ठाकुर ने खरीदा था, वह उस समय खाली था। प्लॉट का आवंटन लेने वाले रामजनक शर्मा इसे सरेंडर करने के लिए उद्योग विभाग का चक्कर लगा रहे थे। वहीं नूतन ठाकुर ने भी तीन साल बाद ही इसे सरेंडर करने के लिए विभाग को मौखिक सूचना दी थी। इसके बाद साल 2003 में नूतन ठाकुर ने 618 वर्ग मीटर के इस प्लॉट शराब कारोबारी संजय सिंह को बेच दिया था। संजय सिंह उस समय इसी इलाके में किराए की जमीन पर एक फैक्टरी संचालित कर रहे थे। जमीन मिलने के बाद उन्होंने पक्का निर्माण कराकर अपना कारखाना स्थापित किया। करीब पांच साल पहले यह मामला चर्चा में आया था।

नब्बे के दशक में हर जिला मुख्यालय और बड़े कस्बों में उद्योग विभाग की तरफ से इंडस्ट्रियल एस्टेट बनवाया गया था। देवरिया में भी पूरवा चौराहे के पास इस क्षेत्र के लिए जमीन आवंटित हुई थी। इस क्षेत्र में कुछ बड़ी फर्मों ने अपने कारखाने लगाने के लिए जमीन आवंटित कराई थी। इन प्लॉटों के बीच एक बड़ा पार्क है, जिसके दूसरी तरफ उपायुक्त उद्योग का दफ्तर है। इस पार्क के सामने ही प्लॉट नंबर बी-2 है। यह प्लॉट नूतन ठाकुर के नाम से गलत तरीके से आवंटित करने का मुद्दा पांच साल पहले उठा था।

तब विभाग ने जांच कराई तो यह बात सामने आई कि जिले से पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर का ट्रांसफर होने के बाद पत्नी नूतन ठाकुर ने प्लॉट सरेंडर करने के लिए उद्योग विभाग को मौखिक सूचना दे दी थी। उस समय संजय सिंह भी लोहे का छोटा कारखाना चलाते थे। वह कारखाना किराए की जमीन पर था। संजय सिंह ने भी प्लॉट के लिए विभाग में संपर्क किया तो जमीन उपलब्ध होने पर आवंटन का आश्वासन मिला था।

इसी बीच उन्हें किसी ने बताया कि पार्क के सामने स्थित बी-2 को नूतन ठाकुर सरेंडर करने वाली हैं। विभागीय नियमों के अनुसार प्लॉट सरेंडर होने पर उसे दोबारा आवंटन के लिए लॉटरी या फिर वरियता क्रम को आधार बनाया जाता। इसमें प्लॉट किसी दूसरे को भी मिलने की संभावना होती। इससे बचने के लिए नूतन ठाकुर और संजय सिंह के बीच ही विभागीय लोगों ने हस्तांतरण की प्रक्रिया को पूरा करा दिया। पूर्व आईपीएल अमिताभ ठाकुर मार्च 1998 से मार्च 2000 तक देवरिया के एसपी रहे थे।

प्लॉट पर अपनी फर्म का नाम आने के बाद संजय सिंह ने वहां पहले टिनशेड और फिर पक्का निर्माण करा लिया। किराए पर चल रहे कारखाने को भी इसमें शिफ्ट कर दिया। हालांकि वर्ष 2010 आते-आते संजय सिंह का खुद का कारोबार दिल्ली शिफ्ट हो गया और इसी के साथ प्लॉट नंबर बी-2 पर लगा कारखाना भी अधिकतर बंद रहने लगा। इस संबंध में उपायुक्त उद्योग एस. सिद्दकी ने कहा कि मामले से जुड़ी जो भी जानकारी मांगी गई थी, वह सब उपलब्ध करा दिया गया है।

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