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Deoria News: कुदरत की मार से टूटे किसानों के अरमान

Fri, 30 Oct 2026 11:47 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया Updated Fri, 30 Oct 2026 11:47 PM IST
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Farmers' aspirations shattered by the onslaught of nature
खुखुंदू के खिरसर गांव में बारिश के दौरान गिरी धान की फसल
देवरिया। बंगाल की खाड़ी से उठे चक्रवाती तूफान के असर से हुई बेमौसम बारिश ने किसानों के अरमानों पर पानी फेर दिया। धान की कटाई के ऐन वक्त पर तेज हवा और बारिश से खेतों में फसल बिछ गई। दो दिन में 27 एमएम बारिश से किसानों की छह माह की मेहनत पर कुदरत की मार पड़ी।
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कृषि विज्ञान केंद्र मल्हना के अनुसार, शनिवार से बारिश का जोर कम पड़ने के आसार हैं। तेज हवा के चलते खेतों में पककर तैयार धान की फसल जमीन पर गिर गई।
कई जगह खेतों में पानी भरने से गिरी हुई फसल के सड़ने, बालियों के काले पड़ने और दानों में अंकुर निकलने का खतरा बढ़ गया है। जिन किसानों ने धान की कटाई कर ली थी, उनकी उपज भी बारिश में भीगकर खराब होने की आशंका है।
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कई क्षेत्रों में सब्जी, केला, सरसों, मटर और अन्य फसलों को भी नुकसान पहुंचा है। खेतों में जलभराव के कारण गेहूं की बुवाई पिछड़ने की आशंका बढ़ गई है। फसल बर्बाद होने से किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
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उनका कहना है कि कर्ज की अदायगी और परिवार का खर्च चलाना मुश्किल होगा। किसानों ने प्रशासन से फसलों के नुकसान का सर्वे कराकर उचित मुआवजा देने की मांग की है।
धान की फसल जमीन पर गिरी, चूल्हा जलाने की चिंता : सोनूघाट। सदर ब्लॉक के सोनूघाट, सुबिखर, शाहपुर, बैरौना, बारीपुर, एकडंगा, देवरिया दुबे, अखनपुरा, पिपरा मिश्र, लोहरा, पचौहा, गुड्डी चकिया, बभनी बाबू, हाटा खास और मठटोडरगिरी सहित 24 से अधिक गांवों में धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। किसानों के मुताबिक, क्षेत्र में करीब 100 एकड़ से अधिक खड़ी फसल तेज हवाऔर बारिश से गिर गई है। खेतों में पानी भरने से फसल के सड़ने की आशंका है।
किसान रामानंद सिंह, इंद्रजीत यादव, दुर्गेश कुमार यादव, दयाशंकर तिवारी, भारत भूषण मणि त्रिपाठी, महेंद्र पांडेय, बड़े शाही, गंगेश्वर चतुर्वेदी, मदन मोहन उपाध्याय, संजय उपाध्याय, राजू उपाध्याय, राधेश्याम पाठक और शशिप्रकाश राव ने बताया कि फसल कटाई के लिए तैयार थी। तेज हवा और पानी ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। छोटे किसानों का कहना है कि अब घर का चूल्हा जलाना भी मुश्किल होगा।
धान के साथ केले और गन्ने की फसल भी गिरी : भाटपाररानी। तेज हवा-बारिश से धान की फसल को सर्वाधिक नुकसान पहुंचा है। खेतों में पककर तैयार धान की बालियां वजन बढ़ने के कारण पानी और हवा के दबाव से गिर गई हैं। इससे दाने काले पड़ने और उनमें अंकुर निकलने का खतरा है। कटाई के बाद रखी फसल को सुखाने में भी किसानों को परेशानी हो रही है।

बंगरा, जासपार, मायापुर, पिपरा बघेल और छपिया बघेल सहित आसपास के गांवों में केले और गन्ने की फसल भी प्रभावित हुई है।
केला उत्पादक मनोज कुमार शर्मा, रमाकांत सिंह, राधेश्याम यादव, पशुपतिनाथ और महेंद्र कुशवाहा ने बताया कि एक माह के भीतर दूसरी बार चक्रवाती बारिश से केले की फसल को नुकसान हुआ।
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