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दो दिन से भूखा है अग्निपीड़ित परिवार
ब्यूरो अमर उजाला/ देवरिया
Updated Sun, 24 Apr 2016 10:46 PM IST
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आग में सब कुछ बर्बाद हो जाने के बाद चादर तान कर गुजर कर रहा महिला का परिवार।
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फत्तेपुर के भटौली टोला पर आग से बर्बाद कुनबे का हाल बद से बदत्तर होता जा रहा है। घटना के 48 घंटा बीतने के बाद भी उन्हें कोई सरकारी सहायता नहीं मिली। गरीब महिला अपने तीन बच्चों को लेकर चादर तान कर रात काटने को विवश है। उसने दो दिन से खाना नहीं बनाया। बच्चे पेट की भूख मिटाने को बागीचे मे गिरा कच्चा आग चुनकर खा रहें।
भटौली की ऊषा देवी की जिंदगी झंझावातों से भरी है। दस साल पहले पति के छोड़कर चले जाने के बाद तीन बच्चों का परवरिश कर रही महिला को आग ने बर्बाद कर दिया। दस बोरी गेहूं के साथ घर गृहस्थी के सामान और रकम जलकर नष्ट हो जोने के बाद वह खुले आसमान के नीचे रात काटने को मजबूर है। आग से पूरी तरह बर्बाद हो चुकी ऊषा के घर दो दिन से चुल्हा नही जला। उसके बच्चे भूख से तड़प रहे हैं।
आशियाना गवाने के बाद वह छोटी चादर तान कर रात काट रही है। दोपहर में लू के थपेड़े और रात की सनसनाहट मॉ और बच्चों को जानलेवा लगने लगी है। इमदाद के नाम पर सरकारी सहायता का कही पता नहीं है। ऊषा ने बताया कि वह दो दिन से जले घर की राख पर रात काट रही । दिन में धूप से बचने के लिए गांव के लोगों से मिली चांदर तान कर रहती है। सुबह गांव के किसी आदमी ने कुछ रोटियां पहुंचाई थी। जिसे बच्चों को खिला दिया। वह और उसकी दो बेटी कुछ खा नहीं रही है।
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बंधक पड़ी जमींन को छुड़ाने के लिए कर्ज का रुपया जल जाने से ऊषा पूरी तरह टूट गई है। उसके सामने मकान बनाने से लेकर जमींन का कर्ज चुकाने तक बड़ी चुनौती है। गांव के लोगों ने पीड़ित परिवार को मकान बनवाने और खाने पीने का इंतजाम करने की प्रशासन से मांग की हैं। इस बाबत तहसीलदार राहुल देव भट्ट ने कहा कि परिवार को हर संभव सरकारी मदद दी जाएगी।
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भटौली की ऊषा देवी की जिंदगी झंझावातों से भरी है। दस साल पहले पति के छोड़कर चले जाने के बाद तीन बच्चों का परवरिश कर रही महिला को आग ने बर्बाद कर दिया। दस बोरी गेहूं के साथ घर गृहस्थी के सामान और रकम जलकर नष्ट हो जोने के बाद वह खुले आसमान के नीचे रात काटने को मजबूर है। आग से पूरी तरह बर्बाद हो चुकी ऊषा के घर दो दिन से चुल्हा नही जला। उसके बच्चे भूख से तड़प रहे हैं।
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आशियाना गवाने के बाद वह छोटी चादर तान कर रात काट रही है। दोपहर में लू के थपेड़े और रात की सनसनाहट मॉ और बच्चों को जानलेवा लगने लगी है। इमदाद के नाम पर सरकारी सहायता का कही पता नहीं है। ऊषा ने बताया कि वह दो दिन से जले घर की राख पर रात काट रही । दिन में धूप से बचने के लिए गांव के लोगों से मिली चांदर तान कर रहती है। सुबह गांव के किसी आदमी ने कुछ रोटियां पहुंचाई थी। जिसे बच्चों को खिला दिया। वह और उसकी दो बेटी कुछ खा नहीं रही है।
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बंधक पड़ी जमींन को छुड़ाने के लिए कर्ज का रुपया जल जाने से ऊषा पूरी तरह टूट गई है। उसके सामने मकान बनाने से लेकर जमींन का कर्ज चुकाने तक बड़ी चुनौती है। गांव के लोगों ने पीड़ित परिवार को मकान बनवाने और खाने पीने का इंतजाम करने की प्रशासन से मांग की हैं। इस बाबत तहसीलदार राहुल देव भट्ट ने कहा कि परिवार को हर संभव सरकारी मदद दी जाएगी।