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Deoria News: पांच घंटे की मान-मनाैअल के बाद परिवार ने किया अंतिम संस्कार

Fri, 17 Jul 2026 12:05 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 17 Jul 2026 12:05 AM IST
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Family performs last rites after five hours of man-manaial
खुखुंदू। पुरैनी पतलापुर गांव में करंट की चपेट में आने से हुई 18 वर्षीय छात्र की मौत के बाद जब शव पोस्टमार्टम के बाद गांव लाया गया तो परिवार वाले शव को दरवाजे पर रखकर पिता के बाहर से आने का इंतजार करने लगे।
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बृहस्पतिवार की सुबह जब पिता घर पहुंचे तो ग्रामीणों ने शव का अंतिम संस्कार करने से इन्कार करते हुए परिवार को 30 लाख रुपये आर्थिक सहायता समेत सात मांगें रखीं। मौके पर पहुंचे अधिकारियों के पांच घंटे मान-मनौव्वल के बाद छात्र के अंतिम संस्कार के लिए ग्रामीण और परिवार वाले किसी तरह राजी हुए। ग्रामीणों ने डीएम मधुसूदन हुल्गी के नाम संबोधित मांग पत्र तहसीलदार अलका सिंह को सौंपा। पुरैनी पतलापुर गांव निवासी संजय कुशवाहा का बड़ा बेटा निखिल कुमार कुशवाहा घर पर रहकर बीएससी प्रथम सेमेस्टर की पढ़ाई के साथ-साथ एयरफोर्स में भर्ती की तैयारी कर रहा था।
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बुधवार की दोपहर में वह गांव में आई धनकुट्टी मशीन पर धान कुटाने जा रहा था। घर के पास स्थित बिजली के खंभे में करंट उतरने से उसकी चपेट में आ गया। मेडिकल कॉलेज ले जाने पर डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया था।
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परिवार वाले ने शव का पोस्टमार्टम कराया। पोस्टमार्टम के बाद शाम को शव घर लाया गया। वे शव को दरवाजे पर रखकर दिल्ली से पिता संजय के आने का इंतजार करने लगे। पिता बृहस्पतिवार की सुबह करीब छह बजे घर पहुंचे। इसके बाद ग्रामीणों ने सात सूत्री मांग करते हुए शव का अंतिम संस्कार करने से इन्कार कर दिया।
फिर उसके दरवाजे पर इंस्पेक्टर खुखुंदू राहुल कुमार सिंह, तहसीलदार अलका सिंह, नायब तहसीलदार गोपालजी सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी पहुंचने लगे।
ग्रामीणों ने डीएम मधुसूदन हुल्गी के नाम सात सूत्री मांग पत्र तैयार किया था। इसमें परिवार को 30 लाख आर्थिक मुआवजा, परिवार के एक सदस्य की नौकरी, किसान दुर्घटना बीमा का लाभ, बिजली निगम से भी क्षतिपूर्ति, गांव के मुख्य मार्ग से मृतक परिवार के घर तक आरसीसी सड़क निर्माण, जर्जर तारों को बदलकर नया लगवाने और मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से आर्थिक सहायता दिलाने की मांग शामिल थे।

तहसीलदार अलका सिंह ने मांगपत्र डीएम के पास भेजने और परिवार को न्यायोचित आर्थिक सहायता दिलाने का आश्वासन दिया। तब जाकर परिवार वाले और ग्रामीण अंतिम संस्कार के लिए तैयार हुए।
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