बाल गृह बालिका कांड: देवरिया पहुंची सीबीआई, छह साल बाद टूटा भवन का सील; जानिए क्या है पूरा मामला
पांच अगस्त 2018 को बाल गृह बालिका कांड का तत्कालीन एसपी रोहन पी कनय ने पर्दाफाश किया था। साथ ही मां विध्यवासिनी महिला प्रशिक्षण संस्थान की संचालक गिरिजा त्रिपाठी, पति मोहन त्रिपाठी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
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मां विध्यवासिनी महिला प्रशिक्षण संस्थान द्वारा संचालित बाल गृह बालिका कांड की जांच कर रही सीबीआई सोमवार को देवरिया पहुंची। दोपहर को अचानक सीबीआई लखनऊ के सीओ के नेतृत्व में टीम रेलवे स्टेशन रोड स्थित भवन पर पहुंची। वहां टीम ने भवन स्वामी जय प्रकाश अग्रवाल, आनंद कुमार अग्रवाल, राजू कुमार अग्रवाल, गृह की संचालिका रहीं गिरिजा त्रिपाठी व जिला प्रोबेशन अधिकारी अनिल कुमार को बुलाया।
टीम ने कोतवाली पुलिस की मौजूदगी में छह वर्ष पहले भवन में लगाए गए सील को सीबीआई की टीम ने तोड़ दिया और भवन स्वामी को कब्जा दिला दिया। लगभग एक घंटे तक सीबीआई की टीम देवरिया में जमी रही और उसके बाद टीम लखनऊ के लिए रवाना हो गई। साल 2018 में देवरिया में बाल गृह कांड हुआ था। इसकी जांच सीबीआई कर रही थी इसमें बाल गृह की संचालक गिरिजा त्रिपाठी व उनके पति मोहन तिवारी जेल को भी भेजा था।
पांच अगस्त 2018 हुआ था घटना का पर्दाफाश
पांच अगस्त 2018 को बाल गृह बालिका कांड का तत्कालीन एसपी रोहन पी कनय ने पर्दाफाश किया था। साथ ही मां विध्यवासिनी महिला प्रशिक्षण संस्थान की संचालक गिरिजा त्रिपाठी, पति मोहन त्रिपाठी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। बाद में इस मामले की जांच एसआइटी ने की और गिरिजा त्रिपाठी की बेटी अधीक्षक कंचनलता समेत कई लोगों को जेल भेज दिया। उस समय ही प्रदेश सरकार ने इसकी सीबीआई जांच की पेशकश की थी। इसके बाद सीबीआइ ने इस पूरे प्रकरण की जांच शुरू की। साथ ही लखनऊ में दो मुकदमे सीबीआई ने दर्ज कर किया था। यही नहीं संस्था को सील कर दिया था।
यह है पूरा मामला
देवरिया के स्टेशन रोड स्थित मां विध्यवासिनी महिला प्रशिक्षण संस्थान द्वारा संचालित बाल गृह बालिका से एक किशोरी भागकर 5 अगस्त 2018 को तत्कालीन एसपी रोहन पी कनय के पास पहुंची और संस्था में होने वाले कार्य को बताया था। दस बजे रात को एसपी ने संस्था के कार्यालय पर छापेमारी की और 23 लड़कियों को मुक्त कराने का दावा किया था। रात में ही बाल गृह बालिका कांड का पर्दाफाश एसपी ने प्रेस वार्ता में किया था। 6 अगस्त को ही मुख्यमंत्री ने एडीजी संजय सिघल के नेतृत्व में एसआइटी का गठन कर दिया। 10 अगस्त को देवरिया में एसआइटी ने जांच अपने हाथ में ली थी।
एसपी समेत कई अधिकारी हुए थे निलंबित
हाईप्रोफाइल इस मामले में सरकार ने भी बड़ा कदम उठाया था। 15 अगस्त 2018 को एडीजी गोरखपुर दावा शेरपा के जांच रिपोर्ट के बाद तत्कालीन एसपी डॉ. रोहन पी कनय, सीओ, शहर कोतवाल वीके सिंह गौर, सीओ सिटी व चौकी प्रभारी जटाशंकर सिंह को निलंबित कर दिया था। बाद में यह सभी अधिकारी उच्च न्यायालय के आदेश पर बहाल कर दिए गए थे।