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Deoria News: साइबर थाना बनकर तैयार, सीएम की हरी झंडी का इंतजार
Tue, 13 Feb 2024 12:32 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Tue, 13 Feb 2024 12:32 AM IST
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इसी भवन में संचालित होगा साइबर थाना।संवाद
पुलिस कार्यालय में बना है साइबर थाना, एक इंस्पेक्टर सहित छह पुलिसकर्मियों की है तैनाती
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। जनपद मुख्यालय स्थित पुलिस कार्यालय में साइबर थाना बनकर तैयार हो गया है। इसका उद्घाटन मुख्यमंत्री के हाथों होना है। उसके बाद साइबर ठगी के शिकार लोगों को थानाें पर भटकना नहीं पड़ेगा।
फरियादी पुलिस कार्यालय आकर साइबर थाने में अपनी तहरीर देंगे। यहां केस दर्ज कर उनके मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा जनपद के सभी थानों में साइबर हेल्प डेस्क भी होगी। जहां साइबर ठगी के छोटे मामलों को आपसी सुलह के आधार पर ही निस्तारित कर लिया जाएगा।
साइबर ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। साइबर ठगी के प्रमुख रूप से दो तरह के मामले सामने आ रहे हैं। एक आर्थिक रूप से ठगी और दूसरा मानसिक रूप से। आर्थिक रूप से साइबर ठगी में ओटीपी, लिंक, सीवीवी, एप, फोन और गोपनीय सूचनाएं लेकर खाते से रुपये गायब करने के मामले आ रहे हैं।
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मानसिक रूप से ठगी में हनी ट्रैपिंग, व्हाट्सएप मैसेज, लिंक सहित और बहुत से तरीके से हैं। इससे साइबर ठग चारा डालते हैं। फिर झांसे में आने वाले व्यक्ति की सामाजिक छवि धूमिल करने की धमकी देकर मोटी रकम ऐंठ लेते हैं।
बढ़ते साइबर अपराध को देखते हुए प्रदेश सरकार ने हर जनपद में साइबर थाना खोलने का निर्णय लिया है। देवरिया में भी साइबर थाना बन गया है। इन सभी थानों का उद्घाटन मुख्यमंत्री के हाथों एक ही दिन होना है।
एक इंस्पेक्टर सहित छह पुलिसकर्मी होंगे तैनात
साइबर सेल प्रभारी सुनील कुमार पटेल ने बताया कि साइबर थाना बनकर तैयार है। इसका संचालन साइबर सेल के भवन में ही होगा। इसमें एक इंस्पेक्टर, दो दीवान और दो कांस्टेबल तैनात होंगे। इन पुलिसकर्मियों में एक महिला दीवान और एक महिला कांस्टेबल होंगी। इसके अलावा जनपद के सभी 23 थानों में एक-एक साइबर हेल्प डेस्क भी संचालित होगी। यहां साइबर ठगी के मामूली मामले निपटाए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि देवरिया पुलिस कार्यालय परिसर में साइबर थाना बनकर तैयार है। मुख्यमंत्री जी के हाथों सभी जनपदों में साइबर थानों का लोकार्पण होना है।
सबसे ज्यादा होने वाले साइबर फ्रॉड के तरीके
यूपीआई फ्रॉड
बिना मोलभाव किए हुए ठग आपको पैसे ट्रांसफर करने पर राजी हो जाएगा। आपको तुरंत एसएमएस आएगा, जिसमें लिखा होगा कि इतने पैसे आपके खाते में पहुंच गए, अप्रूव करने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें। यह लिंक आपके फोन पर किसी यूपीआई एप का होगा। जैसे ही आप उस लिंक पर क्लिक करेंगे, आपके खाते में पैसे आने के बजाय चले जाएंगे।-
क्यूआर कोड फ्रॉड
अगर आप नामी वेबसाइट पर कुछ बेच रहे हैं तो ठग आपको एक क्यूआर कोड भेजेगा। इस कोड को यूपीआई एप से स्कैन करने के लिए कहेगा। आपको बताया जाएगा कि इसको स्कैन करते ही आपके खाते में पैसे पहुंच जाएंगे। अगर आपने उसे स्कैन करके यूपीआई पिन डाल दिया, समझिए आपके खाते में पैसे आने के बजाय चले जाएंगे। कई बार वही ठग आपसे दोबारा संपर्क करेगा और बोलेगा कि उसने गलती से दूसरा क्यूआर कोड भेज दिया था और वह पैसे लौटना चाहता है। पैसे लौटाने के नाम पर एक और क्यूआर कोड आएगा और अगर यहां भी आपने गलती कर दी तो दोबारा आप पैसे गंवा बैठेंगे।
नकली पेमेंट रसीद
अगर आप कोई सामान बेच रहे हैं तो ठग आपसे सामान भेजने को कहेगा और आपके एक नकली पेमेंट की रसीद जैसे नेफ्ट ट्रांसफर का स्क्रीनशॉट या बैंक के मैसेज का स्क्रीनशॉट यह कहते हुए भेजेगा कि पैसे उसने ट्रांसफर कर दिए हैं। बैंक सर्वर में कोई दिक्कत होगी। थोड़ी देर में आपको पैसे मिल जाएंगे।
कोट
साइबर थाना बनकर पूरी तरह तैयार है। साइबर ठगी के सभी मामले यहीं से दर्ज किए जाएंगे। उनकी जांच-पड़ताल कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्हाेंने बताया कि साइबर ठगी से बचने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है कि अनजान व्यक्ति, अनजान फोन नंबर, किसी भी लिंक पर आसानी से भरोसा न करें। छोटे लाभ के चक्कर में बहुत बड़ा नुकसान हो सकता है।
-संकल्प शर्मा, एसपी
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संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। जनपद मुख्यालय स्थित पुलिस कार्यालय में साइबर थाना बनकर तैयार हो गया है। इसका उद्घाटन मुख्यमंत्री के हाथों होना है। उसके बाद साइबर ठगी के शिकार लोगों को थानाें पर भटकना नहीं पड़ेगा।
फरियादी पुलिस कार्यालय आकर साइबर थाने में अपनी तहरीर देंगे। यहां केस दर्ज कर उनके मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा जनपद के सभी थानों में साइबर हेल्प डेस्क भी होगी। जहां साइबर ठगी के छोटे मामलों को आपसी सुलह के आधार पर ही निस्तारित कर लिया जाएगा।
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साइबर ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। साइबर ठगी के प्रमुख रूप से दो तरह के मामले सामने आ रहे हैं। एक आर्थिक रूप से ठगी और दूसरा मानसिक रूप से। आर्थिक रूप से साइबर ठगी में ओटीपी, लिंक, सीवीवी, एप, फोन और गोपनीय सूचनाएं लेकर खाते से रुपये गायब करने के मामले आ रहे हैं।
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मानसिक रूप से ठगी में हनी ट्रैपिंग, व्हाट्सएप मैसेज, लिंक सहित और बहुत से तरीके से हैं। इससे साइबर ठग चारा डालते हैं। फिर झांसे में आने वाले व्यक्ति की सामाजिक छवि धूमिल करने की धमकी देकर मोटी रकम ऐंठ लेते हैं।
बढ़ते साइबर अपराध को देखते हुए प्रदेश सरकार ने हर जनपद में साइबर थाना खोलने का निर्णय लिया है। देवरिया में भी साइबर थाना बन गया है। इन सभी थानों का उद्घाटन मुख्यमंत्री के हाथों एक ही दिन होना है।
एक इंस्पेक्टर सहित छह पुलिसकर्मी होंगे तैनात
साइबर सेल प्रभारी सुनील कुमार पटेल ने बताया कि साइबर थाना बनकर तैयार है। इसका संचालन साइबर सेल के भवन में ही होगा। इसमें एक इंस्पेक्टर, दो दीवान और दो कांस्टेबल तैनात होंगे। इन पुलिसकर्मियों में एक महिला दीवान और एक महिला कांस्टेबल होंगी। इसके अलावा जनपद के सभी 23 थानों में एक-एक साइबर हेल्प डेस्क भी संचालित होगी। यहां साइबर ठगी के मामूली मामले निपटाए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि देवरिया पुलिस कार्यालय परिसर में साइबर थाना बनकर तैयार है। मुख्यमंत्री जी के हाथों सभी जनपदों में साइबर थानों का लोकार्पण होना है।
सबसे ज्यादा होने वाले साइबर फ्रॉड के तरीके
यूपीआई फ्रॉड
बिना मोलभाव किए हुए ठग आपको पैसे ट्रांसफर करने पर राजी हो जाएगा। आपको तुरंत एसएमएस आएगा, जिसमें लिखा होगा कि इतने पैसे आपके खाते में पहुंच गए, अप्रूव करने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें। यह लिंक आपके फोन पर किसी यूपीआई एप का होगा। जैसे ही आप उस लिंक पर क्लिक करेंगे, आपके खाते में पैसे आने के बजाय चले जाएंगे।-
क्यूआर कोड फ्रॉड
अगर आप नामी वेबसाइट पर कुछ बेच रहे हैं तो ठग आपको एक क्यूआर कोड भेजेगा। इस कोड को यूपीआई एप से स्कैन करने के लिए कहेगा। आपको बताया जाएगा कि इसको स्कैन करते ही आपके खाते में पैसे पहुंच जाएंगे। अगर आपने उसे स्कैन करके यूपीआई पिन डाल दिया, समझिए आपके खाते में पैसे आने के बजाय चले जाएंगे। कई बार वही ठग आपसे दोबारा संपर्क करेगा और बोलेगा कि उसने गलती से दूसरा क्यूआर कोड भेज दिया था और वह पैसे लौटना चाहता है। पैसे लौटाने के नाम पर एक और क्यूआर कोड आएगा और अगर यहां भी आपने गलती कर दी तो दोबारा आप पैसे गंवा बैठेंगे।
नकली पेमेंट रसीद
अगर आप कोई सामान बेच रहे हैं तो ठग आपसे सामान भेजने को कहेगा और आपके एक नकली पेमेंट की रसीद जैसे नेफ्ट ट्रांसफर का स्क्रीनशॉट या बैंक के मैसेज का स्क्रीनशॉट यह कहते हुए भेजेगा कि पैसे उसने ट्रांसफर कर दिए हैं। बैंक सर्वर में कोई दिक्कत होगी। थोड़ी देर में आपको पैसे मिल जाएंगे।
कोट
साइबर थाना बनकर पूरी तरह तैयार है। साइबर ठगी के सभी मामले यहीं से दर्ज किए जाएंगे। उनकी जांच-पड़ताल कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्हाेंने बताया कि साइबर ठगी से बचने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है कि अनजान व्यक्ति, अनजान फोन नंबर, किसी भी लिंक पर आसानी से भरोसा न करें। छोटे लाभ के चक्कर में बहुत बड़ा नुकसान हो सकता है।
-संकल्प शर्मा, एसपी