{"_id":"5c61bdabbdec22736436ad60","slug":"111549909419-deoria-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सरयू में डूबे युवक का मिला शव","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
सरयू में डूबे युवक का मिला शव
विज्ञापन
शत्रुध्न पांडेय का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
बरहज। मोहन सेतु के पास सरयू में डूबे संविदा कर्मी का शव सोमवार को बरामद हुआ। गोरखपुर की एनडीआरएफ टीम व स्थानीय गोताखोरों की मदद से शव बरामद करते हुए पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
ग्राम पंचायत अमांव के बरसात गांव निवासी शत्रुध्न पांडेय उर्फ सन्नी बीए की पढ़ाई करने के साथ तहसील के आपूर्ति कार्यालय में संविदा कर्मी था। वह रविवार को अपनी मां सरस्वती देवी को स्नान कराने बरहज आया हुआ था। नहाने के दौरान डूब गया था। पुलिस स्थानीय मछुआरों और नावों के जरिए उसकी तलाश करा रही थी। सोमवार को प्रशासन ने गोरखपुर से एनडीआरएफ टीम और स्थानीय मछुआरों की मदद से दुबारा तलाश शुरू की। शाम करीब पांच बजे डूबे जगह पर उसका शव बरामद हुआ। शव मिलते ही परिजनों में चीख-पुकार मच गई। थानाध्यक्ष वीरबहादुर सिंह ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। बसंत पंचमी पर स्नान के लिए बेटे के साथ आई सरस्वती बदहवास हैं। शव मिलने की जानकारी होने पर रो-रो कर बुरा हाल है। वह अपने किस्मत को कोस रही थीं। सात भाई-बहनों में सबसे छोटा शत्रुध्न था। वह बचपन से ही कुशाग्र और मिलनसार था। करीब तीन साल पूर्व पिता कन्हैया की मौत हो गई थी। पिता की मौत के बाद से वह अपनी मां को प्रत्येक रविवार को स्नान कराने सरयू तट पर ले आता था। सरस्वती की आंखों के सामने ही डूब चुके बेटे को लेकर वह विक्षिप्त सी हो गई हैं।
विज्ञापन
ग्राम पंचायत अमांव के बरसात गांव निवासी शत्रुध्न पांडेय उर्फ सन्नी बीए की पढ़ाई करने के साथ तहसील के आपूर्ति कार्यालय में संविदा कर्मी था। वह रविवार को अपनी मां सरस्वती देवी को स्नान कराने बरहज आया हुआ था। नहाने के दौरान डूब गया था। पुलिस स्थानीय मछुआरों और नावों के जरिए उसकी तलाश करा रही थी। सोमवार को प्रशासन ने गोरखपुर से एनडीआरएफ टीम और स्थानीय मछुआरों की मदद से दुबारा तलाश शुरू की। शाम करीब पांच बजे डूबे जगह पर उसका शव बरामद हुआ। शव मिलते ही परिजनों में चीख-पुकार मच गई। थानाध्यक्ष वीरबहादुर सिंह ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। बसंत पंचमी पर स्नान के लिए बेटे के साथ आई सरस्वती बदहवास हैं। शव मिलने की जानकारी होने पर रो-रो कर बुरा हाल है। वह अपने किस्मत को कोस रही थीं। सात भाई-बहनों में सबसे छोटा शत्रुध्न था। वह बचपन से ही कुशाग्र और मिलनसार था। करीब तीन साल पूर्व पिता कन्हैया की मौत हो गई थी। पिता की मौत के बाद से वह अपनी मां को प्रत्येक रविवार को स्नान कराने सरयू तट पर ले आता था। सरस्वती की आंखों के सामने ही डूब चुके बेटे को लेकर वह विक्षिप्त सी हो गई हैं।
विज्ञापन