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नई नगर पंचायतों के गठन का मामला लटका
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नई नगर पंचायतों के गठन का मामला लटका
देवरिया। जिले में सात नगर पंचायतों के गठन का मामला शासन में अधर में लटक गया है। यूं कहा जाए कि कैबिनेट में इसकी औपचारिक मंजूरी नहीं मिलने की वजह से पूरा मामला ठंडे बस्ते में चला गया है। सात नगर पंचायतों के गठन एवं दो नगरपालिकाओं के विस्तार की अधिसूचना जारी होने के बाद सत्ताधारी दल के नेताओं ने खूब वाहवाही लूटी थी।
जिले में दो नगरपालिकाओं गौरा बरहज एवं देवरिया का विस्तारीकरण एवं सात नगर पंचायतों के गठन की अधिसूचना दिसंबर 2020 में जारी हुई थी। प्रशासनिक सुस्ती एवं मानक पूरा नहीं करने की वजह से पूरा मामला शासन स्तर पर ठंडे बस्ते में चला गया है। गौरा बरहज में आठ गांवों के शामिल होने की मंजूरी तो मिल गई है, लेकिन देवरिया नगरपालिका के विस्तार एवं सात नगर पंचायतों के गठन के मामले में शासन स्तर पर ब्रेक लग गया है। जिन्हें नगर पंचायत बनाया गया है, उसमें लक्ष्मीपुर, मदनपुर, तरकुलवा, पथरदेवा, हेतिमपुर में कोई आपत्ति नहीं आई। जबकि बैतालपुर में बलुआ गांव को हटाएं जाने की आपत्ति आई तो इसका निस्तारण कर दूसरे गांव को जोड़ दिया गया। बरवामीर छापर में कुछ गांवों को काटकर दूसरे गांवों को जोड़ने की आपत्ति का भी निस्तारण कर शासन को भेज दिया गया, लेकिन शासन ने इस मामले में कोई खास रुचि नहीं ली, यहीं वजह है कि पूरा मामला अधर में लटक गया है।
गांवों में फिर तेज हुई पंचायत चुनाव की तैयारी
नगर पंचायत बनाएं जाने की घोषणा कराकर सत्ताधारी दल के नेताओं ने शहरी विकास का सपना लोगों को दिखाया जरूर, लेकिन यह सपना चकनाचूर होता नजर आ रहा है। मंजूरी नहीं मिलने की भनक पाकर नगर पंचायतों में शामिल गांवों में पंचायत चुनाव की तैयारियां तेज हो गई हैं। इसमें लक्ष्मीपुर में छह, मदनपुर में 17, तरकुलवा में सात, पथरदेवा में आठ, हेमितपुर में आठ, बरवामीर छापर में सात, बैतालपुर में 12 गांवों को शामिल किया गया है। इसके अलावा देवरिया नगरपालिका क्षेत्र के सीमा विस्तार में 30 से अधिक गांव शामिल हैं। बरहज के आठ गांवों को शामिल करने की मंजूरी अलबत्ता मिल चुकी है।
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कृषि मंत्री भी जता चुके हैं आशंका
महुुआडीह थाना के शुभारंभ के मौके पर तीन जनवरी को डीएम अमित किशोर ने कृषि मंत्री के क्षेत्र में पांच नगर पंचायतों की सौगात मिलने की बात कह उनकी प्रशंसा के पुल बांधे, लेकिन जब कृषि मंत्री के संबोधन की बारी आई तो उन्होंने मामले को संभाला। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अभी मामला अधर में है। उन्होंने नगर पंचायत बनने के राह में दिक्क्तों का भी जिक्र किया।
मानक पूरा नहीं कर पा रहे नगर पंचायत
विभागीय सूत्रों के मुताबिक नवसृजित नगर पंचायत उन कस्बों को बनाया जा सकता है जहां की आबादी 20 हजार हो, 75 प्रतिशत व्यवसाय कृषि आधारित न हो, सड़कें चौड़ी हो, शहरी माहौल एवं आवासीय कालोनियां हो, थाना, डाकखाना, अस्पताल सहित अन्य सुविधाएं हो। देखा जाए तो दो-तीन को छोड़कर कहीं भी मानक पूरा नहीं हो रहा था। जो भी हो प्रशासन ने अपने स्तर से आपत्तियों का निस्तारण कर अपनी मुहर लगाकर शासन में प्रस्ताव भेज दिया, लेकिन कैबिनेट की मंजूरी नहीं मिलने की वजह से पूरा मामला अधर में लटक गया है।
नगर पंचायतों के संबंध में आई आपत्तियों का निस्तारण करके प्रपोजल शासन को भेज दिया गया है। शासन स्तर से ही इस संबंध में निर्णय होना है।
अमृतलाल बिंद, सीआरओ/ प्रशासक, नगर निकाय
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देवरिया। जिले में सात नगर पंचायतों के गठन का मामला शासन में अधर में लटक गया है। यूं कहा जाए कि कैबिनेट में इसकी औपचारिक मंजूरी नहीं मिलने की वजह से पूरा मामला ठंडे बस्ते में चला गया है। सात नगर पंचायतों के गठन एवं दो नगरपालिकाओं के विस्तार की अधिसूचना जारी होने के बाद सत्ताधारी दल के नेताओं ने खूब वाहवाही लूटी थी।
जिले में दो नगरपालिकाओं गौरा बरहज एवं देवरिया का विस्तारीकरण एवं सात नगर पंचायतों के गठन की अधिसूचना दिसंबर 2020 में जारी हुई थी। प्रशासनिक सुस्ती एवं मानक पूरा नहीं करने की वजह से पूरा मामला शासन स्तर पर ठंडे बस्ते में चला गया है। गौरा बरहज में आठ गांवों के शामिल होने की मंजूरी तो मिल गई है, लेकिन देवरिया नगरपालिका के विस्तार एवं सात नगर पंचायतों के गठन के मामले में शासन स्तर पर ब्रेक लग गया है। जिन्हें नगर पंचायत बनाया गया है, उसमें लक्ष्मीपुर, मदनपुर, तरकुलवा, पथरदेवा, हेतिमपुर में कोई आपत्ति नहीं आई। जबकि बैतालपुर में बलुआ गांव को हटाएं जाने की आपत्ति आई तो इसका निस्तारण कर दूसरे गांव को जोड़ दिया गया। बरवामीर छापर में कुछ गांवों को काटकर दूसरे गांवों को जोड़ने की आपत्ति का भी निस्तारण कर शासन को भेज दिया गया, लेकिन शासन ने इस मामले में कोई खास रुचि नहीं ली, यहीं वजह है कि पूरा मामला अधर में लटक गया है।
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गांवों में फिर तेज हुई पंचायत चुनाव की तैयारी
नगर पंचायत बनाएं जाने की घोषणा कराकर सत्ताधारी दल के नेताओं ने शहरी विकास का सपना लोगों को दिखाया जरूर, लेकिन यह सपना चकनाचूर होता नजर आ रहा है। मंजूरी नहीं मिलने की भनक पाकर नगर पंचायतों में शामिल गांवों में पंचायत चुनाव की तैयारियां तेज हो गई हैं। इसमें लक्ष्मीपुर में छह, मदनपुर में 17, तरकुलवा में सात, पथरदेवा में आठ, हेमितपुर में आठ, बरवामीर छापर में सात, बैतालपुर में 12 गांवों को शामिल किया गया है। इसके अलावा देवरिया नगरपालिका क्षेत्र के सीमा विस्तार में 30 से अधिक गांव शामिल हैं। बरहज के आठ गांवों को शामिल करने की मंजूरी अलबत्ता मिल चुकी है।
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कृषि मंत्री भी जता चुके हैं आशंका
महुुआडीह थाना के शुभारंभ के मौके पर तीन जनवरी को डीएम अमित किशोर ने कृषि मंत्री के क्षेत्र में पांच नगर पंचायतों की सौगात मिलने की बात कह उनकी प्रशंसा के पुल बांधे, लेकिन जब कृषि मंत्री के संबोधन की बारी आई तो उन्होंने मामले को संभाला। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अभी मामला अधर में है। उन्होंने नगर पंचायत बनने के राह में दिक्क्तों का भी जिक्र किया।
मानक पूरा नहीं कर पा रहे नगर पंचायत
विभागीय सूत्रों के मुताबिक नवसृजित नगर पंचायत उन कस्बों को बनाया जा सकता है जहां की आबादी 20 हजार हो, 75 प्रतिशत व्यवसाय कृषि आधारित न हो, सड़कें चौड़ी हो, शहरी माहौल एवं आवासीय कालोनियां हो, थाना, डाकखाना, अस्पताल सहित अन्य सुविधाएं हो। देखा जाए तो दो-तीन को छोड़कर कहीं भी मानक पूरा नहीं हो रहा था। जो भी हो प्रशासन ने अपने स्तर से आपत्तियों का निस्तारण कर अपनी मुहर लगाकर शासन में प्रस्ताव भेज दिया, लेकिन कैबिनेट की मंजूरी नहीं मिलने की वजह से पूरा मामला अधर में लटक गया है।
नगर पंचायतों के संबंध में आई आपत्तियों का निस्तारण करके प्रपोजल शासन को भेज दिया गया है। शासन स्तर से ही इस संबंध में निर्णय होना है।
अमृतलाल बिंद, सीआरओ/ प्रशासक, नगर निकाय