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Deoria News: कोविड काल में अपनों को खो चुके 439 बच्चों काे बजट इंतजार, जैसे-तैसे चला रहे काम

Fri, 14 Jul 2023 11:33 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 14 Jul 2023 11:33 PM IST
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Budget awaited for 439 children who lost their loved ones during Kovid period
अभिभावकों को हो रही परेशानी, दूसरे से उधार लेकर जमा कर रहे बच्चों की फीस
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संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। कोविड काल में अपनों को खो चुके 439 बच्चों को चार माह से सहायता राशि नहीं मिल रही है। इसके कारण इन बच्चों के अभिभावकों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। किसी के अभिभावक स्कूल की फीस जमा करने के लिए उधार ले रहे हैं तो कोई रिश्तेदार के भरोसे इनकी परवरिश करा रहा है।
कोरोना काल में जिले में 439 बच्चों में किसी ने मां को खो दिया तो किसी ने पिता को। इसके अलावा नौ बच्चे ऐसे भी हैं, जिनके माता-पिता दोनों कोविड के दौरान साथ छोड़ गए। इनकी सहायता के लिए प्रदेश सरकार मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत प्रत्येक बच्चे को चार हजार रुपये प्रति माह देती है। यह राशि अप्रैल माह से अभी तक आई नहीं है। जिसके चलते इन्हें दिक्कतें आ रही हैं। इनका परवरिश करने वाले अभिभावक किसी तरह रुपये की व्यवस्था कर रहे हैं। अब इन अभिभावकों को समझ में नहीं आ रहा है कि धन खाते में कब आएगी।
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उधार लेकर लिखाना पड़ा स्कूल में नाम
शहर के एक मुहल्ला निवासी दो बच्चों के पिता की कोविड काल में मौत हाे गई। मां के साथ रहने वाले दोनों बच्चों की परवरिश इसी धन के भरोसे हैं। मां ने बताया कि अप्रैल में दोनों बच्चों का नाम लिखवाना था। एडमिशन और फीस जमा करनी थी। साथ ही ड्रेस भी बनवाना था। इसके लिए हमें दूसरे से 18 हजार रुपये उधार लेना पड़ा। इसके अलावा अन्य खर्च भी उधार लेकर काम चलाना पड़ रहा है।
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ब्याज पर रुपये लेकर कराना पड़ा इलाज
भलुअनी थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी एक व्यक्ति के रिश्तेदार की मौत कोविड काल में हो गई थी। इस कारण उन्हें दो बच्चों को अपने पास लाना पड़ा। उन्होंने बताया कि दूसरे की सहायता करना गलत नहीं है, लेकिन दिक्कत तब हो जाती है, जब आर्थिक परेशानी से जूझना पड़ता है। अभी एक बच्चे की कुछ दिन पहले तबीयत खराब हो गई। आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी, इस कारण ब्याज पर रुपये लेकर इलाज कराना पड़ा।

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समय से रुपये न मिलने से आर्थिक संकट से जूझना पड़ रहा
योजना तो अच्छी है, लेकिन समय से रुपये न मिलने के कारण इसका फायदा नहीं मिल रहा है। एक बच्चे की परवरिश कर रहा हूं। हालत यह है कि पिछले माह भी छह माह बाद पैसा आया था और एकमुश्त दूसरे को उधारी चुकानी पड़ी। यही हाल इस बार भी है। बच्चे के कपड़ा, पढ़ाई आदि पर मोटी रकम खर्च हो रही है।
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उप्र मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत अभी बजट नहीं आया है। बजट उपलब्ध होने पर लाभार्थी के खाते में धन भेज दिया जाएगा।


अनिल सोनकर, जिला प्रोबेशन अधिकारी
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