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Deoria News: उग्रसेन सेतु में फिर हुआ छेद नए पुल के निर्माण की उम्मीद
Fri, 30 Oct 2026 12:29 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Fri, 30 Oct 2026 12:29 AM IST
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बरहज के कपवार उग्रसेन सेतु पर बना होल
बरहज। राप्ती नदी पर कपरवार में बना उग्रसेन सेतु बार-बार क्षतिग्रस्त होने से आवागमन में बाधा बन रहा है। करीब 40 साल में चार बार पुल में छेद हो चुके हैं। 27 अक्तूबर को फिर क्षतिग्रस्त होने के बाद मरम्मत शुरू हो गई है। वहीं, रामजानकी मार्ग के चौड़ीकरण को देखते हुए समानांतर नए पुल के निर्माण की उम्मीद बढ़ी है।
रामजानकी मार्ग (एनएच-227ए) के चौड़ीकरण के मद्देनजर पुल के समानांतर नया सेतु बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। नए पुल पर तीन नवंबर को दिल्ली में प्रस्तावित बैठक में निर्णय होने की उम्मीद है।
ओवरलोड से बार-बार क्षतिग्रस्त हो रहा पुल 26 दिसंबर 1986 को सेतु निगम ने 13 पिलर पर 660 मीटर लंबे उग्रसेन सेतु का निर्माण कराया था।
यह पुल देवरिया और गोरखपुर को जोड़ने के साथ बिहार, अयोध्या, प्रयागराज, वाराणसी, गाजीपुर, मऊ और आजमगढ़ की ओर आने-जाने वालों के लिए महत्वपूर्ण मार्ग है।
रामजानकी मार्ग के फोरलेन बनने से इस पर वाहनों का दबाव और बढ़ने की आशंका है।
19 मार्च 2019 को पुल के पश्चिमी छोर पर पांचवें डेक में बड़ा छेद हो गया था। 24 जनवरी 2023 को मध्य हिस्से में फिर छेद हो गया। इसके बाद 16 जुलाई 2026 को मध्य हिस्से में क्षति के कारण आवागमन पूरी तरह रोकना पड़ा था। करीब 30 लाख रुपये की मरम्मत के बाद यातायात बहाल हुआ। 27 अक्तूबर को पश्चिमी छोर पर फिर छेद होने से भारी वाहनों का रूट डायवर्ट किया गया है।
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रामजानकी मार्ग (एनएच-227ए) के चौड़ीकरण के मद्देनजर पुल के समानांतर नया सेतु बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। नए पुल पर तीन नवंबर को दिल्ली में प्रस्तावित बैठक में निर्णय होने की उम्मीद है।
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ओवरलोड से बार-बार क्षतिग्रस्त हो रहा पुल 26 दिसंबर 1986 को सेतु निगम ने 13 पिलर पर 660 मीटर लंबे उग्रसेन सेतु का निर्माण कराया था।
यह पुल देवरिया और गोरखपुर को जोड़ने के साथ बिहार, अयोध्या, प्रयागराज, वाराणसी, गाजीपुर, मऊ और आजमगढ़ की ओर आने-जाने वालों के लिए महत्वपूर्ण मार्ग है।
रामजानकी मार्ग के फोरलेन बनने से इस पर वाहनों का दबाव और बढ़ने की आशंका है।
19 मार्च 2019 को पुल के पश्चिमी छोर पर पांचवें डेक में बड़ा छेद हो गया था। 24 जनवरी 2023 को मध्य हिस्से में फिर छेद हो गया। इसके बाद 16 जुलाई 2026 को मध्य हिस्से में क्षति के कारण आवागमन पूरी तरह रोकना पड़ा था। करीब 30 लाख रुपये की मरम्मत के बाद यातायात बहाल हुआ। 27 अक्तूबर को पश्चिमी छोर पर फिर छेद होने से भारी वाहनों का रूट डायवर्ट किया गया है।
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