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Deoria News: शराब के शाैकीनों ने बिहार बाॅर्डर से सटे होटलों में बनाया ठिकाना
Mon, 21 Apr 2025 12:31 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Mon, 21 Apr 2025 12:31 AM IST
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देवरिया। शराब के शौकिन युवाओं में नशे की ऐसी लत लग गई है कि घर वालों के डर से बिहार बाॅर्डर से सटे शहरों के होटलों को रात का ठिकाना बना रहे हैं। वह होटलों में रुककर जमकर शराब पीते हैं। जब शराब का नशा उतर जाता है तो वह वापस चले जाते हैं।
इसके लिए वह होटल मालिकों को अच्छा पैसा भी देते हैं। होटल संचालक पैसे के बदले उनको सुरक्षा का वादा करते हैं। ग्राहक जिस तरह का पैसा देते हैं वह उन्हें उस तरह की सुविधा देते हैं। जिले के सलेमपुर, भाटपाररानी, लार, भटनी, बैकुंठपुर जैसे तमाम जगहों में संचालित हो रहे होटलों संचालकों इन दिनों खूब चांदी है।
बिहार में शराब बंदी के बाद बाॅर्डर पर सख्ती को देखते हुए शराब के शौकिन युवा बाॅर्डर क्षेत्र के शहरों में संचालित हो रहे होटलों को ठिकाना बना लिए हैं।
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किसी न किसी बहाने से शाम ढलते ही बिहार प्रांंत के शराब के आदी युवा घर छोड़कर बाॅर्डर पार कर ले रहे हैं और होटलों में कमरा लेने के बाद दुकान से शराब की बोतलें ला रहे हैं। एक-दूसरे के साथ मिलकर पूरी रात होटल में रुककर शराब पीते हैं और मौजमस्ती करते हैं। नशा टूटने पर उन्हें का घर याद आ रहा है तो पुन: घर चले जा रहे हैं। उधर, युवाओं की लत को देखते हुए बाॅर्डर से सटे नगरों में होटल एक कारोबार की तरह बढ़ने लगा है।
पहले जहां इक्का दुक्का होटल हुआ करते थे। अब सलेमपुर जैसे छोटे कस्बे में करीब 15 होटल संचालित हो रहे हैं। वहीं लार में भी करीब 10 होटल संचालित हो रहे हैं। भटनी में करीब आधा दर्जन होटल संचालित हो रहे हैं, जबकि भाटपाररानी में करीब 10 होटल चल रहे हैं। होटल संचालकों को एक कमरे का 1500 से 2500 रुपये मिल जाता है। अच्छी कमाई को देखते हुए जिले में बाॅर्डर इलाकों धड़ाधड़ होटल खुल रहे हैं।
लेमपुर की बात करें तो पिछले एक दशक की अपेक्षा आज चार गुना होटल संचालित हो रहे हैं। एक होटल संचालक से जब इस पर बात की गई तो नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि बिहार में शराब बंदी के बाद से बाॅर्डर क्षेत्र होटलों में शराब के आदी युवा शराब लेकर आते हैं। होटलों में ठहरकर रात भर जाम लड़ाते हैं। इसके लिए मुंह मांगा रकम भी देते हैं। 12 घंटे के लिए एक-कमरे से 15 सौ से 25 सौ रुपये की कमाई हो जाती है।
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इसके लिए वह होटल मालिकों को अच्छा पैसा भी देते हैं। होटल संचालक पैसे के बदले उनको सुरक्षा का वादा करते हैं। ग्राहक जिस तरह का पैसा देते हैं वह उन्हें उस तरह की सुविधा देते हैं। जिले के सलेमपुर, भाटपाररानी, लार, भटनी, बैकुंठपुर जैसे तमाम जगहों में संचालित हो रहे होटलों संचालकों इन दिनों खूब चांदी है।
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बिहार में शराब बंदी के बाद बाॅर्डर पर सख्ती को देखते हुए शराब के शौकिन युवा बाॅर्डर क्षेत्र के शहरों में संचालित हो रहे होटलों को ठिकाना बना लिए हैं।
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किसी न किसी बहाने से शाम ढलते ही बिहार प्रांंत के शराब के आदी युवा घर छोड़कर बाॅर्डर पार कर ले रहे हैं और होटलों में कमरा लेने के बाद दुकान से शराब की बोतलें ला रहे हैं। एक-दूसरे के साथ मिलकर पूरी रात होटल में रुककर शराब पीते हैं और मौजमस्ती करते हैं। नशा टूटने पर उन्हें का घर याद आ रहा है तो पुन: घर चले जा रहे हैं। उधर, युवाओं की लत को देखते हुए बाॅर्डर से सटे नगरों में होटल एक कारोबार की तरह बढ़ने लगा है।
पहले जहां इक्का दुक्का होटल हुआ करते थे। अब सलेमपुर जैसे छोटे कस्बे में करीब 15 होटल संचालित हो रहे हैं। वहीं लार में भी करीब 10 होटल संचालित हो रहे हैं। भटनी में करीब आधा दर्जन होटल संचालित हो रहे हैं, जबकि भाटपाररानी में करीब 10 होटल चल रहे हैं। होटल संचालकों को एक कमरे का 1500 से 2500 रुपये मिल जाता है। अच्छी कमाई को देखते हुए जिले में बाॅर्डर इलाकों धड़ाधड़ होटल खुल रहे हैं।
लेमपुर की बात करें तो पिछले एक दशक की अपेक्षा आज चार गुना होटल संचालित हो रहे हैं। एक होटल संचालक से जब इस पर बात की गई तो नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि बिहार में शराब बंदी के बाद से बाॅर्डर क्षेत्र होटलों में शराब के आदी युवा शराब लेकर आते हैं। होटलों में ठहरकर रात भर जाम लड़ाते हैं। इसके लिए मुंह मांगा रकम भी देते हैं। 12 घंटे के लिए एक-कमरे से 15 सौ से 25 सौ रुपये की कमाई हो जाती है।