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मानदेय बढ़ाने की मांग की तो चली गई नौकरी
Updated Wed, 28 Jun 2017 10:31 PM IST
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देवरिया। सेवा प्रदाता कंपनी के जरिए कंप्यूटर ऑपरेटर और सहायक लेखाकार पद पर नौकरी करने वालों ने पहली बार मानदेय बढ़ाए जाने की मांग की तो नौकरी ही चली गई। बीएसए ने सेवा प्रदाता कंपनी का अनुबंध ही रद कर दिया। ऐसे में 34 लोग बेरोजगार हो गए हैं।
सेवा प्रदाता कंपनी के जरिए जिले के 16 ब्लॉक और नगर क्षेत्र के ब्लॉक संसाधन केंद्रों पर एक-एक कंप्यूटर ऑपरेटर और सहायक लेखाकार की नियुक्ति वर्ष 2011 में की गई। विभागीय अधिकारियों के आदेश पर ये सभी कार्यों का निष्पादन करते थे। पहले कंप्यूटर ऑपरेटर के लिए सीएमएस कंप्यूटर जलकल रोड और सहायक लेखाकार के लिए अजय बरनवाल एंड एसोसिएट न्यूज कॉलोनी का चयन किया गया था। बीते साल बीएसए रहे मनोज मिश्र ने मेसर्स संजरी कार्पोरेट सर्विसेज बेगमगंज, मकबरा फैजाबाद का चयन सेवा प्रदाता कंपनी के रूप में किया। नए सेवा प्रदाता कंपनी ने 13 लोगों को हटाकर उनकी जगह नए लोगों को रख दिया। 20 दिन पूर्व सेवा प्रदाता के माध्यम से कार्य कर रहे लोग बीएसए कार्यालय पर एकत्र हुए और मानदेय बढ़ाने की मांग करते हुए हंगामा करने लगे। इससे बीएसए नाराज चल रहे थे। उन्होंने 24 जून को ही इस साल के लिए सेवा प्रदाता कंपनी का चयन रद कर दिया। इससे सभी की नौकरी चली गई। कंप्यूटर आपरेटर और सहायक लेखाकारों का कहना है कि छह साल तक नौकरी करने के बाद आखिर अब वे कहां जाएंगे। बीएसए की हठधर्मिता के चलते उन लोगों के समक्ष रोजी-रोटी का संकट उत्पन्न हो गया है।
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सेवा प्रदाता कंपनी के जरिए जिले के 16 ब्लॉक और नगर क्षेत्र के ब्लॉक संसाधन केंद्रों पर एक-एक कंप्यूटर ऑपरेटर और सहायक लेखाकार की नियुक्ति वर्ष 2011 में की गई। विभागीय अधिकारियों के आदेश पर ये सभी कार्यों का निष्पादन करते थे। पहले कंप्यूटर ऑपरेटर के लिए सीएमएस कंप्यूटर जलकल रोड और सहायक लेखाकार के लिए अजय बरनवाल एंड एसोसिएट न्यूज कॉलोनी का चयन किया गया था। बीते साल बीएसए रहे मनोज मिश्र ने मेसर्स संजरी कार्पोरेट सर्विसेज बेगमगंज, मकबरा फैजाबाद का चयन सेवा प्रदाता कंपनी के रूप में किया। नए सेवा प्रदाता कंपनी ने 13 लोगों को हटाकर उनकी जगह नए लोगों को रख दिया। 20 दिन पूर्व सेवा प्रदाता के माध्यम से कार्य कर रहे लोग बीएसए कार्यालय पर एकत्र हुए और मानदेय बढ़ाने की मांग करते हुए हंगामा करने लगे। इससे बीएसए नाराज चल रहे थे। उन्होंने 24 जून को ही इस साल के लिए सेवा प्रदाता कंपनी का चयन रद कर दिया। इससे सभी की नौकरी चली गई। कंप्यूटर आपरेटर और सहायक लेखाकारों का कहना है कि छह साल तक नौकरी करने के बाद आखिर अब वे कहां जाएंगे। बीएसए की हठधर्मिता के चलते उन लोगों के समक्ष रोजी-रोटी का संकट उत्पन्न हो गया है।
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