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कैसे चुने गए लाभार्थी, यह प्रस्ताव ही गायब

Tue, 15 May 2018 10:56 PM IST
Updated Tue, 15 May 2018 10:56 PM IST
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कैसे चुने गए लाभार्थी, यह प्रस्ताव ही गायब
अध्ाूरे श्ााौचालय - फोटो : अमर उजाला
देवरिया। पथरदेवा ब्लॉक के पकहां गांव में शौचालय निर्माण में धांधली के मामले में जांच के दौरान कई अहम अभिलेख भी गायब मिले हैं। जिम्मेदार वह दस्तावेज ही उपलब्ध नहीं करा सके, जिसके आधार पर लाभार्थियों का चयन हुआ था। काफी तलाश के बाद भी ग्राम पंचायत के प्रस्तावों की सूची उपलब्ध नहीं है। जांच अधिकारी ने इसे भी गड़बड़ी का हिस्सा माना है। मंगलवार को उन्होंने इसकी रिपोर्ट शासन को सौंप दी गई। अब कार्रवाई पर निगाहें हैं।
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कृषिमंत्री सूर्यप्रताप शाही के गांव पकहां में वर्ष 2013-14 में स्वीकृत शौचालयों के निर्माण में व्यापक गड़बड़ी सामने आई है। तत्कालीन योजना में राज्य वित्त, मनरेगा और लाभार्थी के अंशदान के साथ कुल 10 हजार रुपये के खर्च से 1082 शौचालय निर्माण की मंजूरी मिली थी। राज्य वित्त की धनराशि भी आवंटित हो गई। इस पर कागजों पर ही काम हुआ। धरातल पर अधिकांश शौचालय नहीं है। निर्मित शौचालयों की हालत भी धांधली की गवाही कर रहे है। मखलेश, कमलेश, छांगुर, हरिकिशुन, गुलाबी, प्रभा सरीखे दर्जनों लाभार्थी ऐसे हैं, जिनके नाम सूची में है, मगर शौचालय नहीं बने हैं। कृषि मंत्री की शिकायत के बाद शासन स्तर से अपर निदेशक पंचायतीराज राजेंद्र सिंह को जांच अधिकारी बनाकर गांव भेजा गया था। स्थलीय सत्यापन में 395 शौचालयों का ही वजूद मिला, मगर उनका निर्माण भी पूरा नहीं है। शेष शौचालय कहां गए, इस सवाल को कोई जवाब जिम्मेदार नहीं दे सके। बताते हैं कि योजना के तहत लाभार्थियों के चयन के लिए ग्राम पंचायत में बैठक कर प्रस्ताव तैयार किया जाने का उल्लेख है, मगर जांच अधिकारी ने पात्रों के सत्यापन के लिए स्वीकृत प्रस्ताव की प्रति मांगी तो काफी खोजबीन के बाद भी उसे उपलब्ध नहीं कराया जा सका। शौचालय निर्माण से जुड़े कई अन्य अभिलेख भी अधिकारी प्रस्तुत नहीं कर सके। माना जा रहा है कि गड़बड़ी के मकसद से इसे गायब किया गया है। बहरहाल, मंगलवार को इसकी रिपोर्ट जांच अधिकारी ने शासन को प्रेषित कर दी है। अपर निदेशक राजेंद्र सिंह ने बताया कि उन्हें भौतिक सत्यापन का निर्देश था। इसी आधार पर जांच की गई है। तमाम गड़बड़ियां मिली हैं। लाभार्थियों के चयन को लेकर ग्राम पंचायत के प्रस्ताव संबंधी अभिलेख मांगे गए थे, जो प्रस्तुत नहीं किए जा सके। कई अन्य दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं हो सके। वस्तुस्थिति की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर मुख्यमंत्री कार्यालय में भेज दिया गया है। कार्रवाई उन्हीं के स्तर पर होगी।
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शौचालयों में रखा जा रहा कूड़ा
केंद्र व प्रदेश सरकार की प्राथमिकता में शामिल स्वच्छ भारत अभियान का पकहां गांव में बुरा हाल है। शौचालय निर्माण पर यहां कागजों में लाखों रुपये खर्च हुए हैं, मगर उनकी हकीकत चौंकाने वाली है। गांव में जिन लाभार्थियों के शौचालय बने हैं, उनका उपयोग कहीं कचरा तो कहीं भूसा रखने में हो रहा है। कई शौचालयों के निर्माण की क्वालिटी इतनी खराब है कि उनके दीवारों के प्लास्टर उखड़ गए हैं। अधूरी छतों व दरवाजों के बिना शौचालयों में साड़ी का पर्दा लगा हुआ है।
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