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चार दिन पहले गए थे केंद्रीय मंत्री बन, आएंगे सांसद बन
Updated Fri, 01 Sep 2017 11:48 PM IST
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देवरिया। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्री कलराज मिश्र के इस्तीफे की खबरों के चलते देवरिया स्थित उनके बंगले की रौनक शुक्रवार को फीकी दिखाई दी। आम दिनों की अपेक्षा समर्थकों का जमावड़ा कम रहा। बंगले पर आए लोगों के बीच दिनभर इस बारे में तहर-तरह की चलती रहीं। चेहरों पर मायूसी साफ झलक रही थी। अभी चार दिनों पहले कलराज मिश्र केंद्रीय मंत्री की हैसियत से आए थे, तो जिला पंचायत स्थित उनके बंगले पर रौनक और चहल-पहल शबाब पर दिखाई दे रही थी और अब यहां हर ओर मायूसी तैरती नजर आ रही है।
29 अगस्त को कलराज मिश्र यहां आए थे। पहले उन्होंने डाकघर में पासपोर्ट कार्यालय फिर जिला अस्पताल में ट्रॉमा विंग सेंटर का उद्घाटन किया। ये दोनों कार्यक्रम इतनी हड़बड़ी में तैयार हुए थे जिससे अंदेशा हो रहा था कुछ ‘गड़बड़’ है। चूंकि देवरिया में पासपोर्ट कार्यालय खुलवाना कलराज की प्राथमिकता में रहा है, इसलिए सबसे अधिक जोर उनका इसी पर था। उद्घाटन के एक दिन पहले उनके पीए ने दो स्थानों का निरीक्षण किया था। इससे साफ हो रहा है कि कलराज को यह इशारा मिल चुका था कि उनकी कुर्सी ज्यादा दिनों तक रहने वाली नहीं है। कलराज के लिए सबसे बड़ी बाधा उम्र है। वह 75 वर्ष से अधिक के हो गए हैं। केंद्र में उनके मंत्रालय के प्रदर्शन को भी संतोषजनक नहीं माने जाने की भी चर्चाएं जब-तब आती रहीं।
राज्यपाल बनने की भी चर्चा
कलराज के समर्थक अब इस बात को लेकर आशावान हैं कि मंत्री की कुर्सी भले ही चली जाए, लेकिन पार्टी के प्रति वफादारी और वरिष्ठता को देखते हुए प्रधानमंत्री उन्हें किसी राज्य का राज्यपाल बना सकते हैं। कोई उनके बिहार का राज्यपाल बनने का कयास लगा रहा था तो कोई कहीं और का। कलराज से जुड़े सूत्र बताते हैं कि उनकी भी इच्छा है कि वह कहीं का महामहिम बनकर सम्मानजनक तरीके से सक्रिय राजनीति से रिटायर हो जाएं।
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29 अगस्त को कलराज मिश्र यहां आए थे। पहले उन्होंने डाकघर में पासपोर्ट कार्यालय फिर जिला अस्पताल में ट्रॉमा विंग सेंटर का उद्घाटन किया। ये दोनों कार्यक्रम इतनी हड़बड़ी में तैयार हुए थे जिससे अंदेशा हो रहा था कुछ ‘गड़बड़’ है। चूंकि देवरिया में पासपोर्ट कार्यालय खुलवाना कलराज की प्राथमिकता में रहा है, इसलिए सबसे अधिक जोर उनका इसी पर था। उद्घाटन के एक दिन पहले उनके पीए ने दो स्थानों का निरीक्षण किया था। इससे साफ हो रहा है कि कलराज को यह इशारा मिल चुका था कि उनकी कुर्सी ज्यादा दिनों तक रहने वाली नहीं है। कलराज के लिए सबसे बड़ी बाधा उम्र है। वह 75 वर्ष से अधिक के हो गए हैं। केंद्र में उनके मंत्रालय के प्रदर्शन को भी संतोषजनक नहीं माने जाने की भी चर्चाएं जब-तब आती रहीं।
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राज्यपाल बनने की भी चर्चा
कलराज के समर्थक अब इस बात को लेकर आशावान हैं कि मंत्री की कुर्सी भले ही चली जाए, लेकिन पार्टी के प्रति वफादारी और वरिष्ठता को देखते हुए प्रधानमंत्री उन्हें किसी राज्य का राज्यपाल बना सकते हैं। कोई उनके बिहार का राज्यपाल बनने का कयास लगा रहा था तो कोई कहीं और का। कलराज से जुड़े सूत्र बताते हैं कि उनकी भी इच्छा है कि वह कहीं का महामहिम बनकर सम्मानजनक तरीके से सक्रिय राजनीति से रिटायर हो जाएं।
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