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'यह' करने भारत में सबसे ज्यादा आ रहे हैं चीन के लोग
रैना पालीवाल
Updated Wed, 12 Jun 2013 01:34 AM IST
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सीमा के मुद्दे पर भले ही भारत और चीन अलग-अलग छोर पर खड़े हों, लेकिन बाजार ने उन्हें एक दूसरे के करीब ला दिया है।
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अब ग्लोबलाइजेशन ने साठ के दशक का नारा हिंदी चीनी भाई-भाई बुलंद कर दिया है। चीनी छात्रों में हिंदी सीखने की ललक बढ़ रही है।
आगरा स्थित केंद्रीय हिंदी संस्थान में हिंदी सीखने के लिए सबसे अधिक आवेदन चीन से आए हैं। पिछले पांच सालों में चीन से आने वाले छात्रों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है।
संस्थान के अंतरराष्ट्रीय हिंदी शिक्षण विभाग के नये सत्र की प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। अब तक करीब 18 देशों से 109 छात्रों के आवेदन आ चुके हैं।
25 फार्म के साथ चीन टॉप पर है। प्रवेश परीक्षा में चीन के 21 छात्रों की हिंदी अच्छी आंकी गई है। दूसरे नंबर पर श्रीलंका है।
करीब चार साल बाद मैक्सिको ने हिंदी के घर में अपनी दस्तक दी है। यहां से तीन आवेदन आए हैं। विभाग के चार पाठ्यक्रमों में 100 सीटें हैं।
आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 25 जून है। 7 अगस्त से विदेशी विद्यार्थियों की कक्षाएं शुरू हो जाएंगी। आवेदन करने वालों में छात्राओं की संख्या अधिक है।
केंद्रीय हिंदी संस्थान के कुलसचिव डॉ. चंद्रकांत त्रिपाठी ने कहा कि ज्यों-ज्यों चीन का बाजार फैल रहा है, वहां हिंदी की मांग बढ़ रही है।
वो चाहते हैं कि उनके यहां काम करने वाले हिंदी सीखें। खासकर फार्मेसी में हिंदी सीखने वालों की सबसे ज्यादा जरूरत है। आने वाले समय में मार्केट ही भाषा तय करने वाला है।
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