{"_id":"4518a7be-cc81-11e2-80c9-d4ae52bc57c2","slug":"court-verdict-on-divorce","type":"story","status":"publish","title_hn":"अगर जीवनसाथी हो 'ऐसा' तो मिल सकता है तलाक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अगर जीवनसाथी हो 'ऐसा' तो मिल सकता है तलाक
इलाहाबाद/ब्यूरो
Updated Tue, 04 Jun 2013 12:43 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वैवाहिक संबंध पति या पत्नी में से यदि किसी का व्यवहार मानसिक क्रूरता की परिधि में आता है और स्थिति ऐसी बनती है कि इस क्रूरता का शिकार दूसरे के साथ सामान्य जीवन नहीं बिता सकता है तो उसे तलाक लेने का अधिकार है।
विज्ञापन
ऐसे एक मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने परिवार न्यायालय द्वारा पति की अर्जी को स्वीकार करके तलाक मंजूर करने को सही करार दिया है। कोर्ट ने पत्नी द्वारा वैवाहिक संबंधों के पुनर्स्थापन के लिए दिए गए प्रार्थना को खारिज करने के निर्णय को भी सही करार दिया है।
विज्ञापन
न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एसपी गुप्ता की खंडपीठ ने रुचिता श्रीवास्तव की अपील पर सुनवाई करते हुए पाया कि विपक्षी पति विवेक स्वरूप मानसिक क्रूरता का शिकार हुआ है।
विज्ञापन
कोर्ट ने ‘मानसिक क्रूरता’ की व्याख्या करते हुए कहा कि पक्षकारों के संपूर्ण वैवाहिक जीवन को दृष्टिगत रखते हुए यदि एक पक्ष को मानसिक तौर से जबरदस्त पीड़ा, घृणापूर्ण व्यवहार, बेरुखी का बर्ताव इस मात्रा में सहना पड़ता है कि उसका दूसरे के साथ रहना नामुमकिन हो जाए तो मानसिक क्रूरता कहा जाएगा।
कोर्ट ने कहा कि मौजूदा मामले में भी पत्नी ने पति के खिलाफ दहेज उत्पीड़न और मारपीट का मुकदमा दर्ज जिससे उसे जेल जाना पड़ा। वह नौकरी से निलंबित किया गया।
इतना ही पत्नी ने पति के उच्चअधिकारियों को उसकी शिकायतें लिखीं। इसलिए परिवार न्यायालय के न्यायाधीश द्वारा यह निष्कर्ष निकालना कि पति मानसिक क्रूरता का शिकार हुआ है, गलत नहीं है। कोर्ट ने पति को निर्देश दिया है वह रुचिता को स्थायी भरण पोषण के तौर पर साढ़े सात लाख रुपये दो माह के भीतर दे।
बता दें कि मम्मफोर्डगंज निवासी विवेक स्वरूप का विवाह अल्लापुर की रुचिता श्रीवास्तव से 12 फरवरी 2007 को हुआ था। विनय स्वरूप उस समय हरिद्वार में सीनियर ट्रेजरी ऑफीसर के पद पर तैनात थे।
शादी के चार माह बाद ही पति-पत्नी के संबंधों में इस प्रकार से दरार आ गई कि रुचिता ने 27 जुलाई 2007 को विनय और उनके परिवार वालों के खिलाफ दहेज उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज करा दिया। विनय ने चार अक्तूबर 2007 को तलाक का मुकदमा दर्ज किया जो 30 मार्च 2010 को उनके पक्ष में डिक्री हो गया।