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उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की ब्राह्मण कार्ड खेलने की तैयारी, आचार्य प्रमोद कृष्णम को किया आगे

Wed, 09 Sep 2020 07:56 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 09 Sep 2020 07:56 PM IST
सार

प्रमोद कृष्णम के अलावा राकेश सचान, हरेंद्र मलिक, बेगम नूर बानो को भी जगह दी गई है। इसमें से तीन नेता जहां पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की जमीन को आधार देंगे, वहीं आचार्य प्रमोद कृष्णम गोरखपुर से लेकर गाजियाबाद तक मोर्चा संभालेंगे...

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Congress pushes Acharya Pramod Krishnam to contest CM Yogi Adityanath in Uttar Pradesh
आचार्य प्रमोद कृष्णम - फोटो : Amar Ujala (File)

विस्तार

कांग्रेस महासचिव और उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा प्रदेश में ब्राह्मण जनाधार को वापस लाने के लिए खास रणनीति तैयार कर रही हैं। प्रदेश 2022 में होने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारियों के मद्देनजर अपनी टीम को विस्तार देने का काम शुरू दिया है। इसी कड़ी में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने प्रियंका के सलाहकारों की टीम में कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम को नियुक्ति की है।

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राष्ट्रीय महासचिव और प्रदेश प्रभारी प्रियंका वाड्रा की सलाहकार समिति में राकेश सचान, आचार्य प्रमोद कृष्णम, हरेंद्र मलिक और बेगम नूर बानो को भी शामिल किया गया है। इसमें से तीन नेता जहां पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की जमीन को आधार देंगे, वहीं आचार्य प्रमोद कृष्णम गोरखपुर से लेकर गाजियाबाद तक मोर्चा संभालेंगे।
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आचार्य प्रमोद कृष्णम कल्कि पीठ के पीठाधीश्वर हैं, और ब्राह्मणों में उनकी अच्छी पैठ है। सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव हैं और प्रदेश स्तरीय और राष्ट्रीय मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं। वहीं प्रमोद कृष्णम इन दिनों ब्राह्मण वोट बैंक को कांग्रेस के साथ जोड़ने में जुटे हैं और प्रदेश में घूम-घूम कर भाजपा पर हमला कर रहे हैं। 
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हाल ही में शामली के गांव हसनपुर में हुई फायरिंग के प्रकरण में ब्राह्मण समाज के लोगों से मिलने आ रहे कांग्रेस नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम को गाजियाबाद में रोका गया था। उनके नेतृत्व में कांग्रेस का एक प्रतिनिधि मंडल शामली से पलायन कर रहे ब्राह्मण परिवारों से मिलने जा रहा था। 

माना जा रहा है कि आचार्य प्रमोद कृष्णम को प्रियंका गांधी की टीम में शामिल करने के पीछे का मकसद कांग्रेस की हिंदू विरोधी छाप को मिटाना है, जो आरोप भाजपा लगाती रही है। कांग्रेस ने हाल में कुछ कमेटियों का गठन किया है जिसमें ब्राह्मण नेताओं को प्रमुखता दी है। वहीं राकेश सचान लोकसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी से आए थे। जबकि हरेंद्र मलिक और बेगम नूर बानो पार्टी में लंबे समय से हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के करीबी रहे आचार्य प्रमोद कृष्णम को कांग्रेस पार्टी इससे पहले 2019 के लोकसभा चुनाव में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के विरुद्ध लखनऊ जैसी हाई-प्रोफाइल सीट से उतार चुकी है। वहीं इससे पहले वे संभल सीट से भी चुनाव लड़ चुके हैं। हालांकि इनमें से वे कोई भी चुनाव नहीं जीत पाए, लेकिन कांग्रेस संगठन में अपना कद बढ़ाने में कामयाब रहे हैं। 

दरअसल कांग्रेस को अगले विधानसभा चुनावों में मायावती का फॉर्मूला याद आ रहा है। जब 2007 में मायावती के नेतृत्व में बीएसपी ने ब्राह्मण, दलित और मुस्लिम समीकरण पर चुनाव लड़ा था तो उनकी बसपा की सरकार बन गई थी, बसपा ने इस चुनाव में 86 टिकट ब्राह्मणों को दिए थे। वहीं सपा की नजर यादव, कुर्मी, मुस्लिम और ब्राह्मण समीकरण पर है। वहीं कांग्रेस ब्राह्मण, दलित, मुस्लिम और पिछड़ों को अपनी ओर खींचने में जुटी है।


इससे पहले सात सितंबर को उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी में हुए विस्तार में दो उपाध्यक्ष, छह महासचिव, 22 सचिवों के साथ प्रदेश में संगठन का कामकाज देखने के लिए दो संगठन सचिव भी नियुक्त किए गए हैं। इन सभी की नियुक्ति जातीय फार्मूले पर की गई है। वहीं पार्टी का कहना है कि अब उत्तर प्रदेश कांग्रेस संगठन में 19 फीसदी ब्राह्मण, 17 फीसदी अल्पसंख्यकों के अलावा पिछड़ों और अतिपिछड़ों की भी भागीदारी है।

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