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Chitrakoot News: दो बोरी खाद के लिए दिनभर करते रहे इंतजार
Tue, 06 Oct 2026 11:42 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
Updated Tue, 06 Oct 2026 11:42 PM IST
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सीकेटीपी-11-लोटन। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
पहाड़ी (चित्रकूट)। रबी की बोआई का समय नजदीक आते ही पहाड़ी में डीएपी खाद के लिए परेशानी बढ़ गई है। पहाड़ी की उत्तरी व दक्षिणी कृषक सेवा समितियों में मंगलवार को खाद लेने के लिए सुबह पांच बजे से ही किसानों की लंबी कतार लग गई। दो बोरी डीएपी के लिए किसान पूरे दिन भूखे-प्यासे लाइन में खड़े रहे।
स्थिति यह रही कि कई किसानों ने दो दिन पहले ही टोकन ले लिया था फिर भी सुबह पांच बजे आकर लाइन में लगना पड़ा। भीड़ में महिला किसान भी घंटों लाइन में खड़ी नजर आईं।
दोनों समितियों में सोमवार को 450 किसानों को टोकन दिए गए थे। समितियों पर कुल 1200 बोरी डीएपी उपलब्ध होने की बात कही जा रही है। शासन की व्यवस्था के अनुसार प्रत्येक किसान को दो बोरी डीएपी दी जा रही है। इसके बावजूद मंगलवार को 700 से अधिक किसान खाद लेने पहुंच गए। अचानक भीड़ बढ़ने से वितरण व्यवस्था चरमरा गई और कई किसानों को बिना खाद के ही लौटना पड़ा।
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बढ़ी डीएपी की जरूरत : अक्तूबर शुरू होते ही किसान गेहूं, चना और सरसों की बोआई की तैयारी में जुट गए हैं। बोआई के समय डीएपी की मांग बढ़ने से समितियों पर किसानों की भीड़ बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि समय से खाद नहीं मिली तो बोआई प्रभावित हो सकती है।
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पहाड़ी (चित्रकूट)। रबी की बोआई का समय नजदीक आते ही पहाड़ी में डीएपी खाद के लिए परेशानी बढ़ गई है। पहाड़ी की उत्तरी व दक्षिणी कृषक सेवा समितियों में मंगलवार को खाद लेने के लिए सुबह पांच बजे से ही किसानों की लंबी कतार लग गई। दो बोरी डीएपी के लिए किसान पूरे दिन भूखे-प्यासे लाइन में खड़े रहे।
स्थिति यह रही कि कई किसानों ने दो दिन पहले ही टोकन ले लिया था फिर भी सुबह पांच बजे आकर लाइन में लगना पड़ा। भीड़ में महिला किसान भी घंटों लाइन में खड़ी नजर आईं।
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दोनों समितियों में सोमवार को 450 किसानों को टोकन दिए गए थे। समितियों पर कुल 1200 बोरी डीएपी उपलब्ध होने की बात कही जा रही है। शासन की व्यवस्था के अनुसार प्रत्येक किसान को दो बोरी डीएपी दी जा रही है। इसके बावजूद मंगलवार को 700 से अधिक किसान खाद लेने पहुंच गए। अचानक भीड़ बढ़ने से वितरण व्यवस्था चरमरा गई और कई किसानों को बिना खाद के ही लौटना पड़ा।
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बढ़ी डीएपी की जरूरत : अक्तूबर शुरू होते ही किसान गेहूं, चना और सरसों की बोआई की तैयारी में जुट गए हैं। बोआई के समय डीएपी की मांग बढ़ने से समितियों पर किसानों की भीड़ बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि समय से खाद नहीं मिली तो बोआई प्रभावित हो सकती है।

सीकेटीपी-11-लोटन। संवाद