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Chitrakoot News: ग्लास ब्रिज डिजाइन में मिली खामी, अब शुरुआत होने में लगेगा वक्त
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स्कायी ग्लासब्रिज।
- फोटो : संवाद
चित्रकूट। रानीपुर टाइगर रिजर्व क्षेत्र के पर्यटन स्थल तुलसी शबरी प्रपात के पास बने स्काईवॉक ग्लास ब्रिज की जांच करने प्रयागराज और हरियाणा के कुरुक्षेत्र से टीमें आईं।
टीम ने ब्रिज की डिजाइन में तकनीकी खामी पाई। इसके अलावा ब्रिज की चौड़ाई भी कम पाई। टीम ने चौड़ाई बढ़ाने के भी निर्देश दिए।
मानिकपुर क्षेत्र के टिकारिया गांव के पास तुलसी जल प्रपात पर तीन करोड़ 70 लाख रुपये की लागत से यूपी का पहला स्काईवाॅक ग्लास ब्रिज बनाया गया है।
ब्रिज का निर्माण पवन सेतु कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड ने किया है। परियोजना की जिम्मेदारी रानीपुर टाइगर रिजर्व को दी गई थी। उसने ग्लासब्रिज की डिजाइन एनआईटी कुरुक्षेत्र से तैयार कराई थी। ब्रिज धनुष अकार में बनवाया गया है।
एक साल से अधिक समय से ब्रिज तैयार है, लेकिन शुभारंभ नहीं हो सका। इस स्थान पर पर्यटक आते रहते हैं। टीम का कहना है कि जरूरी सुधारों के बिना आम लोगों के लिए खोलना सुरक्षित नहीं है।
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ब्रिज पर ग्लास की क्षमता प्रति वर्ग मीटर 500 किलो होनी चाहिए। ब्रिज की चौड़ाई 35 मीटर रखी गई है। इसे बढ़ाना चाहिए।
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टीम ने ब्रिज की डिजाइन में तकनीकी खामी पाई। इसके अलावा ब्रिज की चौड़ाई भी कम पाई। टीम ने चौड़ाई बढ़ाने के भी निर्देश दिए।
मानिकपुर क्षेत्र के टिकारिया गांव के पास तुलसी जल प्रपात पर तीन करोड़ 70 लाख रुपये की लागत से यूपी का पहला स्काईवाॅक ग्लास ब्रिज बनाया गया है।
ब्रिज का निर्माण पवन सेतु कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड ने किया है। परियोजना की जिम्मेदारी रानीपुर टाइगर रिजर्व को दी गई थी। उसने ग्लासब्रिज की डिजाइन एनआईटी कुरुक्षेत्र से तैयार कराई थी। ब्रिज धनुष अकार में बनवाया गया है।
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एक साल से अधिक समय से ब्रिज तैयार है, लेकिन शुभारंभ नहीं हो सका। इस स्थान पर पर्यटक आते रहते हैं। टीम का कहना है कि जरूरी सुधारों के बिना आम लोगों के लिए खोलना सुरक्षित नहीं है।
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ब्रिज पर ग्लास की क्षमता प्रति वर्ग मीटर 500 किलो होनी चाहिए। ब्रिज की चौड़ाई 35 मीटर रखी गई है। इसे बढ़ाना चाहिए।