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Chitrakoot News: 150 साल पुराने चबूतरे पर प्रतिमा स्थापना के लिए विवाद, प्रशासन ने रोका
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30 सीकेटीपी-39-बजरंग बली जी की मूर्ति एवं मौजूद ग्रामीण। संवाद
30 सीकेटीपी-39-बजरंग बली जी की मूर्ति एवं मौजूद ग्रामीण। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
मऊ (चित्रकूट)। कोटरा खांभा गांव के टिटिहिरिया का पुरवा में करीब 150 वर्ष पुराने धार्मिक चबूतरे पर नई हनुमान प्रतिमा स्थापित करने पर विवाद हो गया। प्रशासन ने बिना अनुमति प्रतिमा स्थापना करने पर रोक लगा दी है। पुलिस और राजस्व विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर मामला शांत कराया।
ग्रामीणों ने बताया कि चबूतरे पर पहले से छोटी मूर्ति, शिवलिंग और हवन कुंड मौजूद हैं। यहां वर्षों से धार्मिक आयोजन होते रहे हैं। हाल ही में पिन्टू निषाद और अन्य ग्रामीणों ने बड़ी हनुमान प्रतिमा स्थापित करने का प्रयास किया। इस पर राम सलोने और उनके परिजनों ने आपत्ति जताई। इसके बाद दोनों पक्षों में विवाद बढ़ गया। लेखपाल की जांच में यह भूमि गाटा संख्या 717 ग्राम सभा की बंजर भूमि के रूप में दर्ज पाई गई है।
उप जिलाधिकारी राम ऋषि रमन ने बताया कि सार्वजनिक स्थल पर नई धार्मिक परंपरा या प्रतिमा स्थापना की अनुमति नहीं दी जा सकती। इसके लिए सक्षम अनुमति लेना अनिवार्य है। प्रतिमा निजी भूमि पर ही स्थापित की जा सकती है। प्रशासन ने अनुमति मिलने तक मौके पर यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस और राजस्व विभाग लगातार निगरानी कर रहे हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
मऊ (चित्रकूट)। कोटरा खांभा गांव के टिटिहिरिया का पुरवा में करीब 150 वर्ष पुराने धार्मिक चबूतरे पर नई हनुमान प्रतिमा स्थापित करने पर विवाद हो गया। प्रशासन ने बिना अनुमति प्रतिमा स्थापना करने पर रोक लगा दी है। पुलिस और राजस्व विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर मामला शांत कराया।
ग्रामीणों ने बताया कि चबूतरे पर पहले से छोटी मूर्ति, शिवलिंग और हवन कुंड मौजूद हैं। यहां वर्षों से धार्मिक आयोजन होते रहे हैं। हाल ही में पिन्टू निषाद और अन्य ग्रामीणों ने बड़ी हनुमान प्रतिमा स्थापित करने का प्रयास किया। इस पर राम सलोने और उनके परिजनों ने आपत्ति जताई। इसके बाद दोनों पक्षों में विवाद बढ़ गया। लेखपाल की जांच में यह भूमि गाटा संख्या 717 ग्राम सभा की बंजर भूमि के रूप में दर्ज पाई गई है।
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उप जिलाधिकारी राम ऋषि रमन ने बताया कि सार्वजनिक स्थल पर नई धार्मिक परंपरा या प्रतिमा स्थापना की अनुमति नहीं दी जा सकती। इसके लिए सक्षम अनुमति लेना अनिवार्य है। प्रतिमा निजी भूमि पर ही स्थापित की जा सकती है। प्रशासन ने अनुमति मिलने तक मौके पर यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस और राजस्व विभाग लगातार निगरानी कर रहे हैं।
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