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Chitrakoot News: ट्रेन की चपेट में आने से सिपाही की मौत
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चित्रकूट। दीपदान मेले में ड्यूटी पर आए जीआरपी में तैनात सिपाही की बुधवार को कर्वी स्टेशन के आउटर पर मालगाड़ी की चपेट में आने से मौत हो गई। स्थानीय लोगों ने बताया कि सिपाही कान में लीड लगाए था। इससे दूसरे छोर से आ रही ट्रेन की आवाज नहीं सुन सका।
जीआरपी थाना प्रभारी अजय भदौरिया ने बताया कि एटा जिले के अलीगंज तहसील क्षेत्र के ग्राम बिल्सड़, थाना राजा का रामपुर निवासी सिपाही विकास कुमार पांडेय (47) वाराणसी में तैनात थे। सोमवार को चित्रकूट दीपदान मेले में ड्यूटी पर आए थे। मंगलवार की रात कर्वी स्टेशन के मानिकपुर की तरफ आउटर पर टहल रहे थे। तभी मानिकपुर की तरफ से आ रही मालगाड़ी की चपेट में आने मौत हो गई।
जानकारी होने पर जीआरपी ने परिजनों को सूचना दी और शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा। घटनास्थल पर मौजूद कुछ यात्रियों व स्थानीय लोगों ने बताया कि सिपाही के कान में लीड लगी थी। टहलते हुए पटरी के बेहद करीब आ गया था। इसी बीच एक ट्रेन को आता देख कुछ लोगों ने चिल्लाकर हटने के लिए कहा, लेकिन लगा कि सुनाई ही नहीं दिया। उसे ट्रेन की भी आवाज नहीं सुनाई दी। इसी बीच वह ट्रेन की चपेट में आ गया।
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सिपाही विकास के तीन पुत्र ऋतिक, वंशगोपाल, भविष्य पांडेय हैं। दो भाइयों में सबसे बड़े थे। इस घटना से सिपाही के घर में दिवाली की खुशियां गम में बदल गईं। बेटों ने बताया कि दिवाली में घर की सजावट और पटाखे के लिए पापा ने पैसे दिए थे। काफी सामान खरीद भी लिया था, लेकिन हमें यह पता नहीं था कि ड्यूटी पर जा रहे पापा फिर कभी नहीं लौटेंगे। घटना की जानकारी होने पर एसपी अरुण कुमार सिंह, अपर एसपी चक्रपाणि त्रिपाठी, सीओ राजकमल व कोतवाल उपेंद्र सिंह मौके पर पहुंचे। पोस्टमार्टम के बाद शव विशेष वाहन से परिजनों के साथ उनके गांव भेजा गया।
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जीआरपी थाना प्रभारी अजय भदौरिया ने बताया कि एटा जिले के अलीगंज तहसील क्षेत्र के ग्राम बिल्सड़, थाना राजा का रामपुर निवासी सिपाही विकास कुमार पांडेय (47) वाराणसी में तैनात थे। सोमवार को चित्रकूट दीपदान मेले में ड्यूटी पर आए थे। मंगलवार की रात कर्वी स्टेशन के मानिकपुर की तरफ आउटर पर टहल रहे थे। तभी मानिकपुर की तरफ से आ रही मालगाड़ी की चपेट में आने मौत हो गई।
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जानकारी होने पर जीआरपी ने परिजनों को सूचना दी और शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा। घटनास्थल पर मौजूद कुछ यात्रियों व स्थानीय लोगों ने बताया कि सिपाही के कान में लीड लगी थी। टहलते हुए पटरी के बेहद करीब आ गया था। इसी बीच एक ट्रेन को आता देख कुछ लोगों ने चिल्लाकर हटने के लिए कहा, लेकिन लगा कि सुनाई ही नहीं दिया। उसे ट्रेन की भी आवाज नहीं सुनाई दी। इसी बीच वह ट्रेन की चपेट में आ गया।
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सिपाही विकास के तीन पुत्र ऋतिक, वंशगोपाल, भविष्य पांडेय हैं। दो भाइयों में सबसे बड़े थे। इस घटना से सिपाही के घर में दिवाली की खुशियां गम में बदल गईं। बेटों ने बताया कि दिवाली में घर की सजावट और पटाखे के लिए पापा ने पैसे दिए थे। काफी सामान खरीद भी लिया था, लेकिन हमें यह पता नहीं था कि ड्यूटी पर जा रहे पापा फिर कभी नहीं लौटेंगे। घटना की जानकारी होने पर एसपी अरुण कुमार सिंह, अपर एसपी चक्रपाणि त्रिपाठी, सीओ राजकमल व कोतवाल उपेंद्र सिंह मौके पर पहुंचे। पोस्टमार्टम के बाद शव विशेष वाहन से परिजनों के साथ उनके गांव भेजा गया।