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चित्रकूटः श्रीराम के वनवास से ऋषि मुनियों क े संकट हुए दुर

Mon, 24 Feb 2020 11:30 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 24 Feb 2020 11:30 PM IST
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Chitrakoot: Sage Ram's exile caused crisis for sage monks
Chitrakoot: Sage Ram's exile caused crisis for sage monks - फोटो : CHITRAKUTT
चित्रकूट। भगवान राम की साधनास्थली चित्रकूट में राष्ट्रीय रामायण मेला के पंाच दिवसीय रामायण मेला में चौथे दिन कई विद्वानों ने प्रवचन दिया। इसके साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रम के आयोजन में कलाकारों ने धूम मचाई।
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चतुर्थ दिवस डा. तीरथदीन पटेल ने बताया कि माता कैकेयी ने विधवा होने पर भी राष्ट्र को एकसूत्र में बांधा है। बताया कि राम का वनवास काल राष्ट्र का सुधारक काल कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। उन्होंने माता कैकेयी को राष्ट्र की नायिका बताया। राम के वनवास काल में राक्षसों का विनाश होने के साथ ही योगी तपस्वी, ऋषि मुनियों के संकट दूर हुए थे। तभी विश्व में रामराज्य आया था। रामराज्य लाने की प्रथम श्रेष्ठता माता कैकेयी ही हैं। चित्रकूट की महिमा का बखान करते हुए डा. पटेल ने कहा कि यहां का एक-एक कण राममय, यहां की रज भगवान का प्रसाद रूप और धूल माथे का तिलक है। कामदगिरि की परिक्रमा के बारे में कहा कि परिक्रमा स्थल की धूल सुहागिन स्त्रियों का सिंदूर और पुरुषों के माथे का शीतल चंदन है। प्रयागराज से पधारे डा. सीताराम सिंह ‘विश्वबंधु’ ने रामचरितमानस को जीवन जीने का संविधान बताया। वहीं इसे मर्यादा ग्रंथ भी बताया। कवियित्री कोमल द्विवेदी ने कविता के माध्यम से चित्रकूट की महिमा का वर्णन किया। डा. मसूद इकबाल ने सारी मानवता को प्रेम, भाईचारे और एकता का संदेश दिया। मप्र के खंडवा से पधारे रमेश चन्द्र तिवारी ने अरण्यकाण्ड का प्रसंग वर्णित करते हुए नारी महत्ता की मीमांसा प्रस्तुत की। सनत कुमार मिश्र मानस किंकर ने हनुमंत लाल को एकादशवें रुद्र का अवतार बताया। ग्वालियर के डा. श्रीलाल पचौरी ने बताया कि कैकेयी उच्च धर्मपरायण कुल की कन्या तथा धर्मधुरंधर राजा दशरथ की पत्नी थीं।
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वहीं आकाशवाणी इलाहाबाद के कलाकारों ने लोक संगीत और लोकनाट्य प्रस्तुत कर दर्शकों को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। मऊरानीपुर के रामाधीन आर्य और साथियों ने अपने भजन से दर्शकों की वाहवाही बटोरी। अंत में वृंदावन से पधारे ख्यातिलब्ध रसाचार्य देवकी नंदन शर्मा की मंडली ने भगवान श्रीकृष्ण की मनोहारी लीलाओं का जीवंत अभिनय किया।
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रामायण मेला के कार्यकारी अध्यक्ष राजेश कुमार करवरिया, नगरपालिका की पूर्व अध्यक्ष नीलम करवरिया, भालेन्दु सिंह एड., प्रद्युम्न कुमार दुबे, राजाबाबू पांडेय, शिवमंगल शास्त्री, मोहम्मद युसूफ सिद्दीकी, कलीमुद्दीन बेग, घनश्याम अवस्थी, हरिप्रसाद दुबे अयोध्या, ज्ञानचंद्र गुप्ता, राजेंद्र मोहन त्रिपाठी, मनोज मोहन गर्ग, प्रिंस करवरिया, मो. इम्तियाज, राजेंद्र राम, नत्थू प्रसाद सोनकर, माधव बंसल आदि मौजूद रहे।
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