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44 साल पहले की याद कर धर्मनगरी के लोगों की छलक पड़ी आंखें

Sun, 06 Feb 2022 10:57 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 06 Feb 2022 10:57 PM IST
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चित्रकूट। भारतरत्न स्वर कोकिला लता मंगेशकर के चित्रकूट से भी गहरे संस्मरण जुडे़ हुए हैं। आज से 44 साल पहले 1978 में डा. राममनोहर लोहिया प्रेक्षागृह में रामायण मेला के आयोजन में तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई आए तो दूसरे दिन लता दीदी भी धर्मनगरी आईं थीं।
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साधु-संतों से आशीर्वाद लेने के बाद वह पंजाबी भगवान आश्रम पहुंची फिर भगवान कामतानाथ के दर्शन किए। यहीं से उनका धर्मनगरी से ऐसा आत्मिक व आध्यात्मिक जुड़ाव हुआ कि जब भी राष्ट्रीय रामायण मेला का उन्हें निमंत्रण पत्र प्राप्त होता तो वह पत्र लिखकर संदेश जरूर भेजती थीं। पत्र में रामायण मेला आयोजन की सराहना करते हुए कहती थीं कि ऐसे सांस्कृतिक व धार्मिक कार्यक्रम में कलाकारों को अपना हुनर प्रस्तुत करने का अवसर मिलता है। जिससे उन्हें अपनी कला निखारने का एक अच्छा मंच प्राप्त होता है।
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राष्ट्रीय रामायण मेला के कार्यकारी अध्यक्ष राजेश करवरिया ने स्वार साम्राज्ञी से जुड़े संस्मरणों को याद करते हुए बताया कि लता दीदी ने कई बार पत्रों के माध्यम से रामायण मेला में आना वाले विद्वानों व यहां के साधु-संतों से भावनात्मक व आध्यात्मिक प्रेम दर्शाया। इसी तरह एक पत्र में उन्होंने लिखा था कि ‘विद्वानों की कहीं हुई बातों से हमेशा कुछ न कुछ सीखने को मिलता है’।
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शनिवार को उनके निधन की जानकारी होने पर आमजनों के साथ यहां के मठ-मंदिरों के साधु-संतों ने भी गहरा शोक जताया। भरत मंदिर के महंत दिव्यजीवन दास ने कहा कि लता जी के गाए भक्ति गीतों की आवाज कान में पड़ते ही पूरे भक्ति भाव उभरते हैं। फलाहारी आश्रम के महंत रामप्यारे दास ने कहा कि भारतरत्न लता जी जैसा कोई दूसरा हो ही नहीं सकता। बड़ा मठ मंदिर के महंत गोविंद दास ने कहा कि स्वर कोकिला हमेशा के लिए दुनिया से चली गईं, लेकिन उनकी आवाज लोगों के जेहन में जीवित व सम्मानित रहेगी।

उनकी आत्मा मां सरस्वती से मिल गई-जगद्गुरु रामभद्राचार्य
चित्रकूट। भारत रत्न लता मंगेशकर का साधु-संतों से भी बड़ा लगाव था। उनके निधन पर तुलसी पीठ के जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि आज का दिन बेहद अप्रिय है। लता जी से जुड़े एक संस्मरण को याद करते हुए उन्होंने बताया कि भारतरत्न मां सरस्वती की अवतार स्वरूपा लता जी से जब प्रथम बार बात की तो लगा कि वह वाकई मां सरस्वती की दी हुई मधुर वाणी से बात सुन रहे हैं। उनकी आत्मा मां सरस्वती से मिल गई।
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