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सूर्य को अर्घ्य
चंदौली ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Tue, 08 Nov 2016 01:07 AM IST
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महिला को अर्घ्य दिलाती युवती।
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नगर सहित पूरे जनपद में सूर्योपासना के महापर्व डाला छठ पर श्रद्धालुओं ने उदयाचल सूर्य को अर्घ्य देकर चार दिवसीय व्रत का पारायण किया। भोर में ही नदी, तालाब के तटों पर अर्घ्य देने के लिए व्रती महिलाओं की भीड़ जुटी। भोर में अर्घ्य देने के बाद घाटों पर आतिशबाजी की गई। वहीं घाटों पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया। व्रत के समापन के बाद प्रसाद पाने के लिए लोगों की भीड़ जुटी।
डाला छठ के अंतिम दिन भोर में ही उठ कर व्रतियों ने स्नान-ध्यान किया और घाट पर जाने की तैयारी की। कई घरों में तो पूरी रात ही तैयारी होती रही और गीतों और भजन से घर गुलजार रहा। व्रतियों के साथ परिवार के सदस्य भी जागकर घाट पर जाने की तैयारी में जुटे रहे। भगवान भास्कर को अर्घ्य देने के लिए व्रतियों ने सूप और दउरी में फल, पूजन सामग्री, फूल माला, धूप, दीप, पान सुपाड़ी आदि सजाया। पूरे परिवार के साथ व्रती नंगे पैर गंगा घाटों की ओर निकले। पुरुष सदस्यों ने माथे पर दउरी रखी, तो किशोर ने गन्ने को कंधे पर सजाया और व्रती महिलाएं हाथ में कलश और उस पर जलता दीपक लेकर समूह में गीत गाते हुए गंगा घाट की ओर चलीं।
कुछ बच्चे अलसाए तो कुछ उत्साह के साथ चल रहे थे, वहीं कच्ची नींद से जागे नौनिहाल चल रहे थे। कुल मिलाकर पूरे रास्ते माहौल धार्मिक माहौल बना रहा। भोर में ढाई से तीन बजे के बीच व्रतियों के घर से बाहर निकलने का सिलसिला शुरू हुआ। कुछ व्रती महिलाएं घर से दंडवत करते हुए तालाब पोखरों तक पहुंचीं, तो कुछ बैंड, बाजा, ढोल तासा के साथ पहुंचे। नगर के मानसरोवर, दामोदरदास पोखरा, आरपीएफ कालोनी मालगोदाम, सिकटिया पोखरा, अलीनगर में रामजानकी पोखरा सहित अन्य पोखरों पर पहुंच कर महिलाओं ने पूर्व में बनी वेदी पर पूजा अर्चन किया और दीप प्रज्ज्वलित किया। इसके बाद व्रतियों ने कमर भर पानी में खड़े को सूर्य की लालिमा दिखने का इंतजार किया। जैसे ही आसमान में लालिमा छायी, व्रतियों ने सूर्य को दूध और जल से अर्घ्य दिया और व्रत का समापन किया। पूजा समितियों के अलावा तालाब, पोखरों के आसपास रहने वालों भी अर्घ्य के लिए दूध का इंतजाम किया गया था। समितियों द्वारा अर्घ्य के बाद व्रत तोड़ने के लिए चाय आदि का इंतजाम किया गया। धानापुर संवाददाता के अनुसार क्षेत्र के रायपुर, नौघरा, बुद्धपुर, प्रसहटा, रामपुर, दिया सहित अन्य क्षेत्रों से व्रती नरौली घाट पर पहुंच कर अर्घ्य दिया।
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डाला छठ के अंतिम दिन भोर में ही उठ कर व्रतियों ने स्नान-ध्यान किया और घाट पर जाने की तैयारी की। कई घरों में तो पूरी रात ही तैयारी होती रही और गीतों और भजन से घर गुलजार रहा। व्रतियों के साथ परिवार के सदस्य भी जागकर घाट पर जाने की तैयारी में जुटे रहे। भगवान भास्कर को अर्घ्य देने के लिए व्रतियों ने सूप और दउरी में फल, पूजन सामग्री, फूल माला, धूप, दीप, पान सुपाड़ी आदि सजाया। पूरे परिवार के साथ व्रती नंगे पैर गंगा घाटों की ओर निकले। पुरुष सदस्यों ने माथे पर दउरी रखी, तो किशोर ने गन्ने को कंधे पर सजाया और व्रती महिलाएं हाथ में कलश और उस पर जलता दीपक लेकर समूह में गीत गाते हुए गंगा घाट की ओर चलीं।
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कुछ बच्चे अलसाए तो कुछ उत्साह के साथ चल रहे थे, वहीं कच्ची नींद से जागे नौनिहाल चल रहे थे। कुल मिलाकर पूरे रास्ते माहौल धार्मिक माहौल बना रहा। भोर में ढाई से तीन बजे के बीच व्रतियों के घर से बाहर निकलने का सिलसिला शुरू हुआ। कुछ व्रती महिलाएं घर से दंडवत करते हुए तालाब पोखरों तक पहुंचीं, तो कुछ बैंड, बाजा, ढोल तासा के साथ पहुंचे। नगर के मानसरोवर, दामोदरदास पोखरा, आरपीएफ कालोनी मालगोदाम, सिकटिया पोखरा, अलीनगर में रामजानकी पोखरा सहित अन्य पोखरों पर पहुंच कर महिलाओं ने पूर्व में बनी वेदी पर पूजा अर्चन किया और दीप प्रज्ज्वलित किया। इसके बाद व्रतियों ने कमर भर पानी में खड़े को सूर्य की लालिमा दिखने का इंतजार किया। जैसे ही आसमान में लालिमा छायी, व्रतियों ने सूर्य को दूध और जल से अर्घ्य दिया और व्रत का समापन किया। पूजा समितियों के अलावा तालाब, पोखरों के आसपास रहने वालों भी अर्घ्य के लिए दूध का इंतजाम किया गया था। समितियों द्वारा अर्घ्य के बाद व्रत तोड़ने के लिए चाय आदि का इंतजाम किया गया। धानापुर संवाददाता के अनुसार क्षेत्र के रायपुर, नौघरा, बुद्धपुर, प्रसहटा, रामपुर, दिया सहित अन्य क्षेत्रों से व्रती नरौली घाट पर पहुंच कर अर्घ्य दिया।
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