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Chandauli News: निर्माणाधीन विद्यालय का बारजा गिरा, गुणवत्ता पर उठे सवाल
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चंदौली के पड्या में गिरा निर्माणाधीन कंपोजिट विद्यालय। स्रोत:-जागरूक पाठक
चंदौली। सदर ब्लॉक के पड़या गांव में मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के तहत करीब 1.30 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे कंपोजिट विद्यालय के निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। शनिवार को निर्माणाधीन विद्यालय का बारजा गिरने से हड़कंप मच गया। गनीमत रही कि इस दौरान कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। घटना के बाद ग्रामीणों ने निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराने की मांग की है।
ग्रामीणों का आरोप है कि विद्यालय निर्माण में इस्तेमाल की जा रही बालू, सीमेंट, गिट्टी और सरिया की गुणवत्ता की जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि बारजा गिरने की घटना से निर्माण कार्य और उसकी निगरानी पर सवाल खड़े होते हैं। ग्रामीणों ने कार्यदायी संस्था के साथ ही निर्माण की निगरानी करने वाले जिम्मेदारों की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की है।
इनसेट-
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टूटे हिस्से की मरम्मत में जल्दबाजी पर सवाल
बारजा गिरने के बाद क्षतिग्रस्त हिस्से को दोबारा दुरुस्त करने की प्रक्रिया पर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि मरम्मत से पहले हादसे के कारणों का पता लगाया जाना चाहिए। इसके लिए निर्माण सामग्री के नमूनों की जांच और तकनीकी विशेषज्ञों से भवन की गुणवत्ता का आकलन कराना जरूरी है, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे की आशंका न रहे।
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इनसेट-
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मुख्यमंत्री से जांच और कार्रवाई की मांग
करीब 1.30 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे विद्यालय के निर्माण में कथित अनियमितताओं को लेकर ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री से गुहार लगाई है। उन्होंने निर्माण कार्य की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराने, सामग्री की गुणवत्ता परखने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय बच्चों की पढ़ाई के लिए बनाया जा रहा है, इसलिए इसकी मजबूती और सुरक्षा से समझौता नहीं होना चाहिए। बारजा गिरने के वास्तविक कारणों का पता तकनीकी जांच के बाद ही चल सकेगा।
कोट-
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- सदर ब्लॉक के पड़या गांव में कंपोजिट विद्यालय के निर्माणाधीन भवन का बारजा गिरना दुखद है। मामले की जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। - सचिन कुमार, बीएसए, चंदौली
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ग्रामीणों का आरोप है कि विद्यालय निर्माण में इस्तेमाल की जा रही बालू, सीमेंट, गिट्टी और सरिया की गुणवत्ता की जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि बारजा गिरने की घटना से निर्माण कार्य और उसकी निगरानी पर सवाल खड़े होते हैं। ग्रामीणों ने कार्यदायी संस्था के साथ ही निर्माण की निगरानी करने वाले जिम्मेदारों की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की है।
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इनसेट-
टूटे हिस्से की मरम्मत में जल्दबाजी पर सवाल
बारजा गिरने के बाद क्षतिग्रस्त हिस्से को दोबारा दुरुस्त करने की प्रक्रिया पर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि मरम्मत से पहले हादसे के कारणों का पता लगाया जाना चाहिए। इसके लिए निर्माण सामग्री के नमूनों की जांच और तकनीकी विशेषज्ञों से भवन की गुणवत्ता का आकलन कराना जरूरी है, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे की आशंका न रहे।
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मुख्यमंत्री से जांच और कार्रवाई की मांग
करीब 1.30 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे विद्यालय के निर्माण में कथित अनियमितताओं को लेकर ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री से गुहार लगाई है। उन्होंने निर्माण कार्य की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराने, सामग्री की गुणवत्ता परखने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय बच्चों की पढ़ाई के लिए बनाया जा रहा है, इसलिए इसकी मजबूती और सुरक्षा से समझौता नहीं होना चाहिए। बारजा गिरने के वास्तविक कारणों का पता तकनीकी जांच के बाद ही चल सकेगा।
कोट-
- सदर ब्लॉक के पड़या गांव में कंपोजिट विद्यालय के निर्माणाधीन भवन का बारजा गिरना दुखद है। मामले की जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। - सचिन कुमार, बीएसए, चंदौली