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लेखपालों ने दिखाई ताकत
चंदौली ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Fri, 02 Sep 2016 01:32 AM IST
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अपने छह सूत्री मांगों के समर्थन में गुरुवार को एक बार फिर जनपद के लेखपालों ने मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन किया। लेखपालों ने जमकर शासन और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। कहा कि शासन और जिला प्रशासन लेखपालों पर गलत तरीके से कार्रवाई कर रहा है। लेखपाल किसी भी प्रकार की धमकी से डरने वाले नहीं है, जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं हो जाती आंदोलन जारी रहेगा।
इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि लेखपाल अपनी जायज मांगों को लेकर धरना दे रहे हैं। लेखपाल किसी भी हाल में आंदोलन की राह से नहीं हटेंगे। शासन-प्रशासन चाहे जितना उत्पीड़न कर लें, लेखपाल अपना हक लेकर रहेंगे। कहा कि लेखपाल संवर्ग का पदनाम राजस्व उपनिरीक्षक किया जाए। साथ ही इसके लिए शैक्षिक योग्यता इंटरमीडिएट से स्नातक करते हुए प्रारंभिक वेतनमान को भी बढ़ाया जाना चाहिए। एक अप्रैल 2005 से पूर्व चयनित लेखपालों को पुरानी पेंशन व्यवस्था का लाभ दिया जाए। साथ ही इसके बाद नियुक्त लेखपालों को नई पेंशन योजना में सुधार करते हुए आकस्मिक निकासी एवं सेवानिवृत्ति व मृत्यु पर सुनिश्चित पेंशन की सुविधा प्रदान की जाए। कहा कि ई-डिस्ट्रिक्ट, आईजीआरएस आदि योजनाओं के सुचारू रूप से क्रियान्वयन के मद्देनजर लेखपालों को तत्काल लैपटाप जाए। इस अवसर पर चंद्रजीत, मिथिलेश, रामचरित्र, मनीष, वासदेव, रामदुलार, राजकिशोर आदि उपस्थित रहे। अध्यक्षता सियाराम और संचालन लोकेश कुमार द्विवेदी ने किया।
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इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि लेखपाल अपनी जायज मांगों को लेकर धरना दे रहे हैं। लेखपाल किसी भी हाल में आंदोलन की राह से नहीं हटेंगे। शासन-प्रशासन चाहे जितना उत्पीड़न कर लें, लेखपाल अपना हक लेकर रहेंगे। कहा कि लेखपाल संवर्ग का पदनाम राजस्व उपनिरीक्षक किया जाए। साथ ही इसके लिए शैक्षिक योग्यता इंटरमीडिएट से स्नातक करते हुए प्रारंभिक वेतनमान को भी बढ़ाया जाना चाहिए। एक अप्रैल 2005 से पूर्व चयनित लेखपालों को पुरानी पेंशन व्यवस्था का लाभ दिया जाए। साथ ही इसके बाद नियुक्त लेखपालों को नई पेंशन योजना में सुधार करते हुए आकस्मिक निकासी एवं सेवानिवृत्ति व मृत्यु पर सुनिश्चित पेंशन की सुविधा प्रदान की जाए। कहा कि ई-डिस्ट्रिक्ट, आईजीआरएस आदि योजनाओं के सुचारू रूप से क्रियान्वयन के मद्देनजर लेखपालों को तत्काल लैपटाप जाए। इस अवसर पर चंद्रजीत, मिथिलेश, रामचरित्र, मनीष, वासदेव, रामदुलार, राजकिशोर आदि उपस्थित रहे। अध्यक्षता सियाराम और संचालन लोकेश कुमार द्विवेदी ने किया।
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