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पीतल-तांबे के बर्तनों का है क्रेज
चंदौली अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 08 Nov 2015 02:46 AM IST
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पूरे जिले में बर्तन की पचास से साठ दुकानें हैं। सर्वाधिक दुकानें नगरीय क्षेत्र में हैं। धनतेरस पर बर्तन खरीदने की परंपरा की वजह से बाजार में इससे आस होती है। यही कारण है कि दुकानदार पूर्व में तैयारी कर चुके हैं। दुकानों पर एडवांस में माल मंगा चुके हैं। वर्तमान में दुकानों पर विभिन्न कंपनियों के इलेक्ट्रानिक बर्तनों की खेप उतार दी है। एक दुकान से धनतेरस पर तीन से चार लाख रुपये मूल्य के बर्तनों की बिक्री की आस है। ऐसे में पूरे जिले में चार से पांच करोड़ रुपये के व्यवसाय की संभावना है। शहरी इलाकों में इलेक्ट्रानिक बर्तनों की डिमांड है तो ग्रामीण इलाकों में पीतल और तांबे के बर्तनों की। मुगलसराय नगर के बर्तन विक्रेता घनश्याम ने बताया कि स्टील और एल्यूनिमियम के बर्तनों में खाना खाने से गिरते स्वास्थ्य को देखते हुए लोग स्टील के बर्तनों की बजाए पीतल और तांबे के बर्तनों की डिमांड कर रहे हैं। हालांकि नगरीय इलाके में इंडक्शन चूल्हा, रोटी मेकर, इलेक्ट्रानिक राइस कूकर, इंडक्शन चुल्हा के बर्तन आदि की बिक्री होने की संभावना है। बताया कि बाजार में एरिस्टो, कुमार, देवी दयाल, विनोद, सेलम, तनीश आदि कंपनियों के स्टील के बर्तन छाये हैं तो कूकर आदि में नामी गिरामी कंपनियों के अलावा लोकल कंपनियों की भी डिमांड है। मिर्जापुर और मुरादाबाद के पीतल के बर्तन भी बाजार में डिमांडेंड हैं।
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