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स्कूल सुविधाओं से दूर
चंदौली ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Wed, 30 Nov 2016 01:18 AM IST
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विद्यालय में सुखाई जा रही उपली।
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शासन के तमाम प्रयासों के बाद भी परिषदीय विद्यालयों की दशा में अपेक्षित सुधार नहीं है। मूलभूत संरचनाओं का हाल बेहाल है तो और सुविधाओं की बात करना बेमानी है। शिक्षकों की कमी तो है ही, बच्चों की उपस्थिति सभी विद्यालयों पर कम रहती है। शौचालयों की स्थिति तो यह है कि शिक्षिकाएं और बालिकाएं आड़ लेकर किसी तरह लघुशंका करती हैं। मंगलवार को अमर उजाला टीम ने जगह-जगह तफ्शीश की तो सच्चाई कुछ इस तरह उभरकर सामने आई।
नियामताबाद संवाददाता के अनुसार विकासखंड में कुल 111 प्राथमिक तो 49 पूर्व माध्यमिक विद्यालय हैं जहां बच्चों को पढ़ाने के लिए 700 अध्यापक हैं। विकासखंड के अधिकांश विद्यालयों की स्थिति खराब है। प्राथमिक विद्यलाय शिवनाथपुर विद्यालय परिसर में ग्रामीणों द्वारा उपली पाथी जा रही है। यहां 81 बच्चों को पढ़ाने के लिए प्रधानाध्यापिका समेत तीन शिक्षिकाएं हैं जो पठन-पाठन का कार्य करती हैं। प्रधानाध्यापिका पूनम पाठक ने बताया कि विद्यालय में मानक के अनुरूप मिड डे मील बनाया जा रहा है। वहीं शौचालयों की स्थिति न तो बहुत खराब है और न ही बहुत ठीक।
दुलहीपुर संवाददाता के अनुसार प्राथमिक विद्यालय हरिशंकरपुर में बच्चों को मध्याह्न भोजन लकड़ी और उपले पर बनाकर दिया जा रहा है। बच्चों को खाने में मेन्यू के मुताबिक चावल और दाल दिया गया जबकि दाल की स्थिति यह थी कि बच्चे किसी तरह खाना निगल रहे थे। कक्षा तीन की एक छात्रा खाने की खराब गुणवत्ता की वजह से फेंकने जा रही थी। शौचालय की हालत यह थी एक में ताला बंद था दूसरा प्रयोग करने योग्य नहीं। मानक के अनुसार शिक्षकों की संख्या कम रही। यहां विद्युतीकरण है। प्राथमिक विद्यालय लेड़ुआपुर में बच्चों की संख्या के सापेक्ष अध्यापकों की संख्या बराबर है लेकिन ढाई हजार की आबादी वाले गांव में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या मात्र 68 है। ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार विद्यालय विद्युतीकरण भी नहीं हुआ है।
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एमडीएम की स्थिति सामान्य रही। प्राथमिक विद्यालय मवईंकला में बच्चों की संख्या के अनुरूप शिक्षकों की कमी है। प्रधानाध्यापक समेत कुल तीन लोगों जिम्मे 260 बच्चों की जिम्मेदारी है जबकि भवन भी जर्जर है। शौचालय तो इतने गंदे हैं कि वहां जाने की बजाए बच्चे गली में ही लघुशंका करते हैं। हरिशंकरपुर की प्रधानाध्यापिका अनीता देवी और प्रधान लालती देवी, लेड़ुआपुर के प्रधानाध्यापक लालजी पटेल और प्राथमिक विद्यालय मवई कला के प्रधानाध्यापक सुबोध कुमार का कहना है कि गैस सिलेंडर की मांग की गई है लेकिन अभी तक नहीं मिला है।
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नियामताबाद संवाददाता के अनुसार विकासखंड में कुल 111 प्राथमिक तो 49 पूर्व माध्यमिक विद्यालय हैं जहां बच्चों को पढ़ाने के लिए 700 अध्यापक हैं। विकासखंड के अधिकांश विद्यालयों की स्थिति खराब है। प्राथमिक विद्यलाय शिवनाथपुर विद्यालय परिसर में ग्रामीणों द्वारा उपली पाथी जा रही है। यहां 81 बच्चों को पढ़ाने के लिए प्रधानाध्यापिका समेत तीन शिक्षिकाएं हैं जो पठन-पाठन का कार्य करती हैं। प्रधानाध्यापिका पूनम पाठक ने बताया कि विद्यालय में मानक के अनुरूप मिड डे मील बनाया जा रहा है। वहीं शौचालयों की स्थिति न तो बहुत खराब है और न ही बहुत ठीक।
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दुलहीपुर संवाददाता के अनुसार प्राथमिक विद्यालय हरिशंकरपुर में बच्चों को मध्याह्न भोजन लकड़ी और उपले पर बनाकर दिया जा रहा है। बच्चों को खाने में मेन्यू के मुताबिक चावल और दाल दिया गया जबकि दाल की स्थिति यह थी कि बच्चे किसी तरह खाना निगल रहे थे। कक्षा तीन की एक छात्रा खाने की खराब गुणवत्ता की वजह से फेंकने जा रही थी। शौचालय की हालत यह थी एक में ताला बंद था दूसरा प्रयोग करने योग्य नहीं। मानक के अनुसार शिक्षकों की संख्या कम रही। यहां विद्युतीकरण है। प्राथमिक विद्यालय लेड़ुआपुर में बच्चों की संख्या के सापेक्ष अध्यापकों की संख्या बराबर है लेकिन ढाई हजार की आबादी वाले गांव में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या मात्र 68 है। ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार विद्यालय विद्युतीकरण भी नहीं हुआ है।
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एमडीएम की स्थिति सामान्य रही। प्राथमिक विद्यालय मवईंकला में बच्चों की संख्या के अनुरूप शिक्षकों की कमी है। प्रधानाध्यापक समेत कुल तीन लोगों जिम्मे 260 बच्चों की जिम्मेदारी है जबकि भवन भी जर्जर है। शौचालय तो इतने गंदे हैं कि वहां जाने की बजाए बच्चे गली में ही लघुशंका करते हैं। हरिशंकरपुर की प्रधानाध्यापिका अनीता देवी और प्रधान लालती देवी, लेड़ुआपुर के प्रधानाध्यापक लालजी पटेल और प्राथमिक विद्यालय मवई कला के प्रधानाध्यापक सुबोध कुमार का कहना है कि गैस सिलेंडर की मांग की गई है लेकिन अभी तक नहीं मिला है।